‘ओवैसी से सीखे विपक्ष’, किरेन रिजिजू ने एआईएमआईएम प्रमुख की तारीफ की; एलन मस्क विवाद पर सियासत तेज
एलन मस्क के स्टारलिंक विवाद पर असदुद्दीन ओवैसी के बयान की किरेन रिजिजू ने तारीफ की। भाजपा नेता ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए राष्ट्रीय हित को लेकर सवाल उठाए।

नई दिल्ली। एलन मस्क और भारत में उनकी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को मंजूरी मिलने में देरी का विवाद अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। इस मुद्दे पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयान के बाद भाजपा ने भी प्रतिक्रिया दी है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने ओवैसी की तारीफ करते हुए कहा कि राष्ट्रीय हित से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष को उनसे सीखना चाहिए। रिजिजू के मुताबिक, राजनीतिक मतभेदों के बावजूद देश के हित को प्राथमिकता देना जरूरी है।
ओवैसी बोले- भारत के फैसले कोई विदेशी नहीं करेगा
असदुद्दीन ओवैसी ने एलन मस्क की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके कई राजनीतिक मतभेद हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि किसी विदेशी कारोबारी को भारत के प्रधानमंत्री या देश के फैसलों पर सवाल उठाने का अधिकार मिल जाता है।
ओवैसी ने कहा कि भारत के संसाधनों का इस्तेमाल कैसे होगा, इसका फैसला देश खुद करेगा। उन्होंने देश में सस्ते इंटरनेट डेटा का भी उल्लेख किया। उनका तर्क था कि सरकार का विरोध करना और किसी विदेशी कारोबारी को भारत की नीतियां तय करने देना दो अलग बातें हैं।
किरेन रिजिजू ने विपक्ष को दी ओवैसी से सीखने की सलाह
रिजिजू ने ओवैसी के रुख की सराहना करते हुए कहा कि वह कई बार राष्ट्रीय हित से जुड़े मुद्दों पर समझदारी की बात करते हैं। हालांकि, उन्होंने ओवैसी की मुस्लिम-केंद्रित राजनीतिक नीतियों से असहमति भी जताई।
रिजिजू ने विपक्ष के उन नेताओं पर निशाना साधा, जो भाजपा की बातों से सहमत नहीं होते। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित के सवाल पर विपक्ष को ओवैसी के रुख से सीखना चाहिए। उन्होंने ‘भारत-विरोधी गिरोह’ को लेकर भी टिप्पणी की। यह राजनीतिक बयानबाजी ऐसे समय में सामने आई है, जब स्टारलिंक को लेकर सरकार, विपक्ष और उद्योग जगत के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं।
एलन मस्क ने स्टारलिंक की मंजूरी पर उठाए सवाल
विवाद तब बढ़ा, जब स्पेसएक्स और टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क ने भारत में स्टारलिंक की व्यावसायिक शुरुआत में देरी पर सवाल उठाए। मस्क ने दावा किया कि उनकी कंपनी कई देशों में सेवा शुरू करने की अनुमति हासिल कर चुकी है और भारत में भी नियामकीय जरूरतें पूरी करने में काफी समय लगाया है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी भारत में प्रतिस्पर्धा को रोकना चाहते हैं और मुकेश अंबानी का नाम लेकर तंज कसा। हालांकि, मस्क ने अपने सार्वजनिक पोस्ट में इन आरोपों को साबित करने वाला कोई ठोस सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया।
सरकार और कंपनियों का क्या कहना है?
स्टारलिंक को लेकर केंद्र सरकार का कहना है कि सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के संचालन के लिए सुरक्षा मंजूरी और नियामकीय प्रक्रियाओं का पालन जरूरी है। रिलायंस ने भी कहा है कि उसकी अपनी सैटेलाइट सेवा को आवश्यक मंजूरियों का इंतजार है और घरेलू तथा विदेशी कंपनियों पर समान नियम लागू होने चाहिए।
इस पूरे विवाद में ओवैसी ने विदेशी हस्तक्षेप के सवाल को उठाया, जबकि विपक्ष के कुछ नेताओं ने सरकार और बड़े उद्योगपतियों के संबंधों पर सवाल किए हैं। ऐसे में स्टारलिंक की मंजूरी से जुड़ा मामला अब दूरसंचार नीति के साथ-साथ राष्ट्रीय हित और राजनीतिक जवाबदेही की बहस का हिस्सा बन गया है।


