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बंगाल चुनाव हार के बाद टीएमसी में बढ़ी हलचल, सांसद काकोली घोष ने पार्टी के सभी पदों से दिया इस्तीफा

टीएमसी सांसद काकोली घोष ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दिया। बंगाल चुनाव हार के बाद पार्टी में असंतोष बढ़ा, भाजपा ने कई नेताओं के संपर्क में होने का दावा किया।

बंगाल चुनाव हार के बाद टीएमसी में बढ़ी हलचल, सांसद काकोली घोष ने पार्टी के सभी पदों से दिया इस्तीफा
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कोलकाता। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद लगातार झटके लग रहे हैं। बुधवार को पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने टीएमसी के सभी पदों से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। काकोली घोष लंबे समय से पार्टी से जुड़ी रही हैं और उन्हें ममता बनर्जी की करीबी नेताओं में गिना जाता था।

काकोली घोष ने हाल ही में बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दिया था। माना जा रहा था कि पार्टी नेतृत्व से नाराजगी के चलते वह बड़ा कदम उठा सकती हैं। अब उनके इस्तीफे ने बंगाल की राजनीति में हलचल और बढ़ा दी है।

चीफ व्हिप पद से हटाए जाने के बाद बढ़ी नाराजगी

काकोली घोष लगभग 9 से 10 महीने तक लोकसभा में टीएमसी की चीफ व्हिप रहीं। लेकिन हाल ही में पार्टी ने उन्हें इस जिम्मेदारी से हटाकर Kalyan Banerjee को नया चीफ व्हिप नियुक्त कर दिया। इस फैसले के बाद से ही उनके असंतोष की खबरें सामने आने लगी थीं।

उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट भी साझा किया था, जिसमें लिखा था, “1976 से जुड़ाव और 1984 से राजनीतिक सफर शुरू हुआ। आज चार दशकों की वफादारी का यही इनाम मिला है।” इस पोस्ट के बाद राजनीतिक गलियारों में उनके इस्तीफे की अटकलें तेज हो गई थीं।

शुभेंदु अधिकारी की बैठक में पहुंचने से बढ़ी चर्चाएं

इस्तीफे से पहले काकोली घोष छह अन्य विधायकों के साथ कल्याणी में आयोजित प्रशासनिक समीक्षा बैठक में शामिल हुई थीं। इस बैठक की अगुवाई शुभेंदु अधिकारी ने की थी। बैठक में टीएमसी के कई विधायक भी मौजूद रहे, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चाओं को और बल मिला।

सूत्रों के मुताबिक, काकोली घोष ने अपने इस्तीफे के पत्र में चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC पर भी सवाल उठाए थे। इससे साफ संकेत मिला कि वह पार्टी की कार्यशैली और नेतृत्व के कुछ फैसलों से खुश नहीं थीं।

भाजपा सांसद का बड़ा दावा

इसी बीच भाजपा सांसद Soumitra Khan ने दावा किया है कि टीएमसी के करीब 50 विधायक और 20 सांसद पार्टी से नाराज हैं। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा नेतृत्व हरी झंडी देता है, तो बड़ी संख्या में नेता भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

सौमित्र खान ने कहा, “अगर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व एक बार भी हामी भर दे तो टीएमसी नहीं बचेगी। कई विधायक और सांसद पार्टी छोड़ना चाहते हैं।”

बंगाल की राजनीति में बढ़ सकती है हलचल

काकोली घोष के इस्तीफे को टीएमसी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। चुनावी हार के बाद पार्टी में असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। आने वाले दिनों में यदि और नेता पार्टी छोड़ते हैं तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।


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