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मुंद्रा पोर्ट ड्रग्स केस में ED की बड़ी कार्रवाई, दिल्ली में 5 ठिकानों पर छापेमारी; नाइट क्लब निवेश की जांच तेज

मुंद्रा पोर्ट पर 2,988 किलो हेरोइन बरामदगी मामले में ED ने दिल्ली के 5 ठिकानों पर छापेमारी की। जांच में ड्रग्स से कमाए गए धन को नाइट क्लबों में निवेश किए जाने के संकेत मिले हैं।

मुंद्रा पोर्ट ड्रग्स केस में ED की बड़ी कार्रवाई, दिल्ली में 5 ठिकानों पर छापेमारी; नाइट क्लब निवेश की जांच तेज
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नई दिल्ली। देश के सबसे चर्चित मादक पदार्थ तस्करी मामलों में शामिल मुंद्रा पोर्ट ड्रग्स बरामदगी केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली में पांच स्थानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई करीब 3,000 किलोग्राम हेरोइन की बरामदगी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत की गई। अधिकारियों के अनुसार, जांच का केंद्र अवैध ड्रग्स कारोबार से अर्जित धन के इस्तेमाल और उसके निवेश के नेटवर्क को उजागर करना है।

पीएमएलए के तहत की गई कार्रवाई

ईडी ने मनी लांड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत दिल्ली में हरप्रीत सिंह तलवार उर्फ कबीर तलवार, शमशुद्दीन और उनके सहयोगियों से जुड़े परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी को आशंका है कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी से प्राप्त रकम को विभिन्न कारोबारों में निवेश किया गया।

प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि अवैध धन का एक हिस्सा राष्ट्रीय राजधानी के कुछ नाइट क्लबों और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में लगाया गया था। इसी एंगल से ईडी वित्तीय लेन-देन और निवेश की गहन जांच कर रही है।

मुंद्रा पोर्ट पर पकड़ी गई थी लगभग 3,000 किलो हेरोइन

यह मामला सितंबर 2021 में गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पकड़ी गई 2,988 किलोग्राम हेरोइन से जुड़ा है। राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने उस समय कंटेनरों में छिपाकर लाई गई इस खेप को जब्त किया था। जांच में सामने आया था कि हेरोइन को अर्ध-प्रसंस्कृत टैल्क और बिटुमिनस कोयले जैसे आयातित सामानों में छिपाकर भारत लाया जा रहा था।

एनआईए ने 2022 में की थी गिरफ्तारी

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अगस्त 2022 में दिल्ली निवासी हरप्रीत सिंह तलवार और प्रिंस शर्मा को गिरफ्तार किया था। दोनों पर अफगानिस्तान से समुद्री मार्ग के जरिए भारत में हेरोइन की तस्करी करने वाले अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े होने का आरोप है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी और शेल कंपनियों के माध्यम से आयात प्रक्रिया का इस्तेमाल किया। बाद में मादक पदार्थों को दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में सक्रिय नेटवर्क तक पहुंचाया जाता था।

पैसे के नेटवर्क की तलाश में एजेंसियां

ईडी अब ड्रग्स तस्करी से जुड़े धन के स्रोत, निवेश और लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी है। एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि क्या इस नेटवर्क से जुड़े अन्य कारोबारी, निवेशक या विदेशी संपर्क भी इसमें शामिल हैं।

अधिकारियों का मानना है कि मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए अवैध कमाई को वैध कारोबारों में खपाने की कोशिश की गई। इसी कारण नाइट क्लब, हॉस्पिटैलिटी और अन्य व्यावसायिक निवेशों की जांच को प्राथमिकता दी जा रही है।

जांच अभी जारी

ईडी और एनआईए दोनों एजेंसियां इस अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क की पूरी सप्लाई चेन, वित्तीय लेन-देन और सहयोगियों की पहचान करने के लिए संयुक्त रूप से अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही हैं। आने वाले दिनों में मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।


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