ईडी की बड़ी कार्रवाई: एनएचओआई टोल घोटाले में 14 ठिकानों पर छापेमारी, फर्जी सॉफ्टवेयर से करोड़ों की वसूली का आरोप
एनएचएआई टोल घोटाले में ईडी ने 14 ठिकानों पर छापेमारी की। फर्जी सॉफ्टवेयर से टोल वसूली में करोड़ों की हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच जारी है।

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के टोल प्लाजा से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (एएमएलए), 2002 के तहत देश के अलग-अलग हिस्सों में 14 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, एनसीआर और कोलकाता में की गई।
ईडी की इस कार्रवाई का संबंध टोल वसूली में कथित बड़े फर्जीवाड़े से है। जांच एजेंसी को आशंका है कि आरोपियों ने एनएचएआई के आधिकारिक सिस्टम के समानांतर एक फर्जी सॉफ्टवेयर तैयार किया और उसके जरिए टोल से मिलने वाली रकम में हेराफेरी की।
फर्जी सॉफ्टवेयर से सरकारी सिस्टम को लगाया चूना
जांच के मुताबिक, आरोपियों ने ऐसा समानांतर सॉफ्टवेयर तैयार किया था, जिससे टोल प्लाजा पर होने वाली वास्तविक वसूली को आधिकारिक रिकॉर्ड में कम दिखाया जा सके। आरोप है कि कुल टोल कलेक्शन का केवल करीब पांच प्रतिशत हिस्सा सरकारी सिस्टम में दर्ज किया जाता था, जबकि शेष करीब 95 प्रतिशत रकम को कथित तौर पर आधिकारिक लेखांकन व्यवस्था से बाहर रखा जाता था।
इस तरह फर्जी सॉफ्टवेयर के माध्यम से टोल रसीदें तैयार करने और वास्तविक आय को छिपाने का आरोप है। इससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है।
यूपी एसटीएफ की जांच के बाद सामने आया मामला
इस कथित टोल घोटाले का खुलासा उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) की कार्रवाई के बाद हुआ था। मामले में दर्ज पुलिस एफआईआर के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी तरीके से वसूली गई रकम कहां भेजी गई, किन लोगों या संस्थाओं को इसका फायदा मिला और इस पूरी व्यवस्था में कौन-कौन लोग शामिल थे।
फोरेंसिक जांच में फर्जीवाड़े के सबूत
ईडी के अनुसार, जांच के दौरान फोरेंसिक विश्लेषण और एनएचएआई के रिकॉर्ड की पड़ताल में कथित फर्जी सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। एजेंसी को आशंका है कि टोल कलेक्शन के आंकड़ों में जानबूझकर हेरफेर किया गया और बड़ी रकम को आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम से बाहर डायवर्ट किया गया।
ताजा छापेमारी के दौरान ईडी डिजिटल डिवाइस, दस्तावेज और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड जुटाने पर भी फोकस कर रही है। इन सबूतों के आधार पर कथित अवैध कमाई और उससे जुड़े नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जाएगी।
14 ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई
ईडी की टीमों ने अलग-अलग राज्यों में एक साथ तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी का उद्देश्य फर्जी टोल वसूली से जुड़े लोगों और संस्थाओं की भूमिका स्पष्ट करना, डिजिटल सबूत जुटाना और कथित अपराध से अर्जित संपत्ति का पता लगाना है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और लोगों से पूछताछ या अन्य कानूनी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


