पंजाब में AAP विधायक अमनदीप कौर के 7 ठिकानों पर ईडी की रेड, सरकारी जमीन हड़पने का आरोप
पंजाब में प्रवर्तन निदेशालय ने मोगा से AAP विधायक अमनदीप कौर अरोड़ा और उनके परिवार से जुड़े सात ठिकानों पर छापेमारी की। मामला सरकारी जमीन के म्यूटेशन और मुआवजे में कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है।

चंडीगढ़। पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आम आदमी पार्टी की विधायक अमनदीप कौर अरोड़ा के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। बुधवार को ईडी की टीमों ने मोगा से विधायक अमनदीप कौर और उनके परिवार से जुड़े सात ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित मनी लॉन्ड्रिंग और सरकारी संपत्ति को धोखाधड़ी से हासिल करने के मामले में की गई है।
छापेमारी के दौरान विधायक के आवास के अलावा उनके परिवार के सदस्यों, सहयोगियों और अन्य संबंधित लोगों के परिसरों की भी तलाशी ली गई। इस कार्रवाई में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के हथियारबंद जवान भी ईडी की टीमों के साथ मौजूद रहे।
पति से जुड़े नशा मुक्ति केंद्र पर भी तलाशी
ईडी की कार्रवाई में विधायक के पति डॉ. राकेश अरोड़ा से जुड़े एक नशा मुक्ति केंद्र को भी शामिल किया गया। जांच एजेंसी की टीमें सात अलग-अलग स्थानों पर दस्तावेजों और अन्य संभावित साक्ष्यों की पड़ताल कर रही हैं।
अमनदीप कौर अरोड़ा मोगा विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी की विधायक हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी ने उन्हें आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए इसी सीट से दोबारा उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में चुनाव से पहले हुई इस कार्रवाई ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।
2024 की FIR से जुड़ा है पूरा मामला
इस मामले की शुरुआत जून 2024 में हुई थी, जब पंजाब पुलिस ने कथित धोखाधड़ी को लेकर एफआईआर दर्ज की थी। बाद में प्रवर्तन निदेशालय ने इसी प्राथमिकी के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच शुरू की।
ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित अनियमितताओं से किसी तरह की अवैध कमाई हुई या नहीं और उसमें किन लोगों की भूमिका रही।
नेशनल हाईवे के पास सरकारी जमीन का मामला
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि मोगा जिले में नेशनल हाईवे-754A के लिए अधिग्रहित सरकारी जमीन के म्यूटेशन में गड़बड़ी की गई। इसके अलावा जमीन के बदले मिलने वाले मुआवजे का कथित तौर पर गलत तरीके से भुगतान किए जाने का भी आरोप है।
जांच का प्रमुख पहलू यह है कि सरकारी जमीन से जुड़े रिकॉर्ड में किस तरह बदलाव किए गए और मुआवजे का लाभ किन लोगों को मिला। ईडी की छापेमारी को इसी जांच का हिस्सा माना जा रहा है।
फिलहाल यह कार्रवाई जांच के स्तर पर है। विधायक और उनके परिवार के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।


