राहुल गांधी का सरकार पर हमला, पूछा- लाखों मजदूर-किसान सड़क पर, क्या मोदीजी सुनेंगे
देशभर में चार श्रम संहिता पर जारी घमासान के बीच राहुल गांधी ने केंद्र सरकर पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि देशभर में मजदूर और किसान अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि नई श्रम संहिताएं मजदूरों के हक कमजोर कर सकती हैं, व्यापार समझौते से किसानों को सही दाम नहीं मिलेगा।

नई दिल्ली। देशभर में जहां एक ओर चार श्रम संहिता को लेकर घमासान सातवें आसमान पर पहुंच गया है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मजदूरों और किसानों के मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि आज देशभर में लाखों मजदूर और किसान अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। राहुल गांधी ने लिखा कि मजदूरों को डर है कि सरकार द्वारा लाई गई चार नई श्रम संहिताएं उनके अधिकारों को कमजोर कर सकती हैं।
उनका कहना है कि इन कानूनों से काम के घंटे, नौकरी की सुरक्षा और यूनियनों की ताकत पर असर पड़ सकता है, जिससे मजदूरों की स्थिति और कठिन हो सकती है। कांग्रेस नेता ने किसानों की चिंताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि किसानों को आशंका है कि सरकार के व्यापार समझौते उनकी आजीविका पर चोट कर सकते हैं।
आज देशभर में लाखों मजदूर और किसान अपने हक़ की आवाज़ बुलंद करने सड़कों पर हैं।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 12, 2026
मजदूरों को डर है कि चार श्रम संहिताएँ उनके अधिकारों को कमजोर कर देंगी।
किसानों को आशंका है कि व्यापार समझौता उनकी आजीविका पर चोट करेगा।
और मनरेगा को कमजोर या खत्म करने से गांवों का आख़िरी सहारा भी…
किसानों को नहीं मिल पाएगा सही दाम- राहुल
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में आगे कहा कि अगर सस्ते विदेशी कृषि उत्पाद देश में आए, तो किसानों को अपनी उपज का सही दाम नहीं मिल पाएगा। राहुल गांधी ने मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि अगर इस योजना को कमजोर किया गया या खत्म किया गया, तो गांवों में गरीब परिवारों का आखिरी सहारा भी छिन जाएगा।
मनरेगा का भी उठाया मुद्दा
अपने पोस्ट में राहुल गांधी ने मनरेगा योजना को लेकर भी केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब मजदूरों और किसानों के भविष्य से जुड़े फैसले लिए गए, तब उनकी आवाज को नजरअंदाज किया गया। राहुल गांधी ने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब उनकी बात सुनेंगे, या उन पर किसी ‘ग्रिप’ की पकड़ बहुत मजबूत है। अंत में राहुल गांधी ने कहा कि वह मजदूरों और किसानों के मुद्दों और उनके संघर्ष के साथ मजबूती से खड़े हैं।
क्या है चार श्रम संहिता, और क्यों हो रहा है विरोध?
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर चार नई श्रम संहिताएं (लेबर कोड) बनाई हैं। सरकार का कहना है कि इससे श्रम कानून सरल होंगे और उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन कई मजदूर संगठनों और ट्रेड यूनियनों ने इसका विरोध किया है।
क्यों हो रहा है विरोध?
मजदूर संगठनों का आरोप है कि नई संहिताओं से कंपनियों को कर्मचारियों की छंटनी में ज्यादा छूट मिल जाएगी। 300 तक कर्मचारियों वाली कंपनियों को बिना सरकारी अनुमति छंटनी की अनुमति देने वाले प्रावधान पर खास आपत्ति है। यूनियनों का कहना है कि इससे नौकरी की सुरक्षा कमजोर होगी और हड़ताल करना कठिन हो जाएगा।
इतना ही नहीं कुछ संगठनों को यह भी चिंता है कि ठेका श्रमिकों और असंगठित क्षेत्र के कामगारों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलेगी। हालांकि सरकार का कहना है कि इन संहिताओं से पारदर्शिता बढ़ेगी, रोजगार के अवसर बनेंगे और श्रमिकों को एक समान अधिकार मिलेंगे।


