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'धुंध और घंटियों के बीच मिला सुकून', जया भट्टाचार्य ने किए दार्जिलिंग के महाकाल मंदिर के दर्शन

मुंबई, भागदौड़ भरी जिंदगी और लगातार शूटिंग के बीच जब कलाकारों को कुछ पल अपने लिए मिलते हैं, तो वो अक्सर किसी शांत जगह का रुख करते हैं। टीवी अभिनेत्री जया भट्टाचार्य ने भी कुछ ऐसा ही किया। अपनी हाल की शूटिंग खत्म करने के बाद जया दार्जिलिंग पहुंचीं और वहां के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में समय बिताया। उन्होंने इस खूबसूरत अनुभव को फैंस के साथ साझा किया।

धुंध और घंटियों के बीच मिला सुकून, जया भट्टाचार्य ने किए दार्जिलिंग के महाकाल मंदिर के दर्शन
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मुंबई, भागदौड़ भरी जिंदगी और लगातार शूटिंग के बीच जब कलाकारों को कुछ पल अपने लिए मिलते हैं, तो वो अक्सर किसी शांत जगह का रुख करते हैं। टीवी अभिनेत्री जया भट्टाचार्य ने भी कुछ ऐसा ही किया। अपनी हाल की शूटिंग खत्म करने के बाद जया दार्जिलिंग पहुंचीं और वहां के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में समय बिताया। उन्होंने इस खूबसूरत अनुभव को फैंस के साथ साझा किया।

जया भट्टाचार्य ने इंस्टाग्राम पर महाकाल मंदिर से जुड़ा एक वीडियो शेयर किया। वीडियो में जया कैमरे के सामने आकर कहती हैं, ''शूटिंग पूरी हो गई है और हम निकल पड़े हैं। हमने सोचा महाकाल मंदिर चलते हैं।''

इसके बाद कैमरा मंदिर की तरफ मुड़ जाता है। वीडियो में मंदिर की पुरानी सीढ़ियां, पत्थरों से बना मंदिर, चारों तरफ फैली हरियाली और धुंध दिखाई देती है। जगह-जगह बंधे हुए झंडे हवा में उड़ते नजर आते हैं। घंटियों की आवाज बैकग्राउंड में लगातार सुनाई देती है।

वीडियो में मंदिर के अंदर का शांत माहौल भी दिखाया गया है। लोग दीपक जला रहे हैं, प्रार्थना कर रहे हैं। जया ने मंदिर के आसपास के खूबसूरत नजारों को भी कैद किया।

वीडियो के साथ जया ने कैप्शन में लिखा, ''मंदिर की घंटियों की आवाज, चारों तरफ धुंध, लहराते झंडे और लोगों के धीमे-धीमे चलते कदमों के बीच मुझे एक अजीब सी शांति महसूस हुई। इस मंदिर की सबसे खास बात ये है कि यहां हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों की प्रार्थनाएं कई पीढ़ियों से एक साथ गूंजती हैं। ये पवित्र जगह हमें याद दिलाती है कि आस्था और आपसी भाईचारा साथ-साथ रह सकते हैं।''

कैप्शन में जया ने आगे लिखा, ''मैं सोच रही कि कितने लोग होंगे जो अपनी उम्मीद लेकर या शुक्रिया कहने के लिए यहां आए होंगे। टूटे हुए दिल के साथ या बस भगवान से अकेले में बात करने के लिए इन सीढ़ियों पर चढ़कर आए होंगे। मैं यहां पर कई परेशानियां लेकर आई थी, लेकिन लौटना हल्के मन के साथ हुआ।'


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