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'सतलुज' विवाद : फिल्म का विरोध करने वाले वकील को जान से मारने की धमकी, दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज

नई दिल्ली, दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट के वकील विनीत जिंदल ने कहा है कि फिल्म का विरोध करने और इसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के बाद उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकियां मिली हैं।

सतलुज विवाद : फिल्म का विरोध करने वाले वकील को जान से मारने की धमकी, दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज
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नई दिल्ली, दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट के वकील विनीत जिंदल ने कहा है कि फिल्म का विरोध करने और इसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के बाद उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकियां मिली हैं।

उनका कहना है कि व्हाट्सएप मैसेज और फोन कॉल के जरिए धमकी दी गई कि उनका और उनके परिवार का वही हाल किया जाएगा, जैसा पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह का हुआ था। इस मामले में उन्होंने सबूतों के साथ दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और सुरक्षा की मांग की है।

वकील विनीत जिंदल ने बताया कि उन्होंने इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय को शिकायत देकर फिल्म 'सतलुज', अभिनेता दिलजीत दोसांझ, फिल्म के निर्देशक और ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और जांच कराने की मांग की थी। उन्होंने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि फिल्म में कथित तौर पर खालिस्तान समर्थक विचारधारा के प्रति सहानुभूति दिखाई गई है। उनका कहना है कि फिल्म पंजाब में 1980 और 1990 के दशक के उग्रवाद से जुड़ी घटनाओं को एकतरफा नजरिए से पेश करती है और अलगाववादी सोच को बढ़ावा देने की कोशिश करती है। इसी शिकायत के बाद लगातार धमकी भरे मैसेज मिलने शुरू हुए।

इसी बीच फिल्म को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में भी जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका मोहाली के जीरकपुर निवासी सरवन सिंह ने दाखिल की है, जो खुद को मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा का प्रशंसक और जी5 का सब्सक्राइबर बताते हैं। याचिका में कहा गया है कि फिल्म को 3 जुलाई 2026 को जी5 पर रिलीज किया गया था, लेकिन केवल दो दिन बाद 5 जुलाई को बिना किसी सार्वजनिक आदेश, अदालत के निर्देश या स्पष्ट सरकारी आदेश के प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया।

याचिकाकर्ता का कहना है कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों का सवाल है। फिल्म को दोबारा प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इस मामले में केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी), पंजाब सरकार और जी एंटरटेनमेंट को पक्षकार बनाया गया है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील हाकम सिंह ने कहा कि फिल्म को हटाने के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में यह जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला दिया गया है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है। फिल्म को हटाने से पहले न तो कोई स्पष्ट कारण बताया गया और न ही कोई सार्वजनिक नोटिस जारी किया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार ने तीन सदस्यीय समिति बनाई है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि फिल्म को रोकने के पीछे वास्तविक वजह क्या थी। हमें उम्मीद है कि अदालत जल्द इस मामले की सुनवाई करेगी।

फिल्म 'सतलुज' मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। पहले इसका नाम 'पंजाब 95' रखा गया था। फिल्म लंबे समय तक सेंसर से जुड़े विवादों में फंसी रही। फिल्म निर्माताओं का कहना था कि सेंसर बोर्ड ने बड़ी संख्या में कट लगाने और कई बदलाव करने को कहा था, जिन्हें स्वीकार करना संभव नहीं था। बाद में फिल्म का नाम बदलकर 'सतलुज' रखा गया और इसे 3 जुलाई 2026 को जी5 पर रिलीज किया गया। हालांकि रिलीज के दो दिन बाद ही इसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया।

फिल्म हटाने पर, जी5 ने अपने बयान में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए फिल्म को फिलहाल हटाया गया है और इसे दोबारा उपलब्ध कराने के विकल्पों पर काम किया जा रहा है।


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