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पुण्यतिथि पर याद: भरत व्यास जिन्होंने 'ऐ मालिक तेरे बंदे हम' जैसे अमर गीत लिखा

मुंबई, हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे बेहतरीन गीतकार हुए हैं, जिन्होंने शब्दों को भावना के साथ इतनी कुशलता से पिरोया है कि उनकी रचनाएं सदाबहार गाने बन गई हैं और पीढ़ियों के दिलों में उन्होंने हमेशा के लिए अपनी जगह बना ली है।

पुण्यतिथि पर याद: भरत व्यास जिन्होंने ऐ मालिक तेरे बंदे हम जैसे अमर गीत लिखा
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मुंबई, हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे बेहतरीन गीतकार हुए हैं, जिन्होंने शब्दों को भावना के साथ इतनी कुशलता से पिरोया है कि उनकी रचनाएं सदाबहार गाने बन गई हैं और पीढ़ियों के दिलों में उन्होंने हमेशा के लिए अपनी जगह बना ली है। उन्हीं बेमिसाल गीतकारों में एक नाम पंडित भरत व्यास का है, जिन्होंने 'ऐ मालिक तेरे बंदे हम' और 'ज्योत से ज्योत जलाते चलो' जैसे कभी न भूले जाने वाले गीतों की रचना की।

भरत व्यास हिंदी सिनेमा के एक दिग्गज गीतकार और लेखक थे, जिनकी रचना ने अमिट छाप छोड़ी। उनका जन्म 6 जनवरी 1918 को राजस्थान के बीकानेर में हुआ था। वे मूल रूप से चुरू जिले के निवासी थे। व्यास को बचपन से ही लेखनी में काफी रुचि थी। उन्होंने अपने करियर में लगभग 125 से अधिक फिल्मों के लिए गीत लिखे थे।

भरत व्यास को बॉलीवुड के सबसे मशहूर गीतकारों में से एक माना जाता था। वे आसान शब्दों के जरिए भावनाओं को छूने की अपनी काबिलियत के लिए प्रसिद्ध रहे। उनके गानों की खासियत शब्दों की गहराई और आम लोगों की भावनाओं को समझने की क्षमता है।

व्यास ने अपनी मैट्रिक तक की पढ़ाई चुरू से पूरी की। इसके बाद वह कलकत्ता चले गए, जहां उन्होंने अपनी लेखनी को और निखारा। उनका पहला लिखा गीत 'आओ वीरो हिलमिल गाए वंदे मातरम' था। इसके बाद उन्होंने 1943 में रिलीज हुई फिल्म 'दुहाई' से हिंदी सिनेमा में बतौर लेखक और गीतकार कदम रखा।

भरत ने अपने करियर के शुरुआती दौर में लेखनी के साथ-साथ अभिनय में भी हाथ आजमाया, लेकिन उन्हें असल पहचान अपनी लेखनी की असाधारण कला से मिली। उनकी कुछ प्रमुख रचनाओं में 'आधा है चंद्रमा रात आधी', 'आ लौट के आजा मेरे मीत', 'जरा सामने तो आओ छलिए', 'तू छिपी है कहां', 'तेरा सुर और मेरे गीत', 'यूं ही तुम मुझसे बात करती रहो', 'जीवन में पिया तेरा साथ रहे', 'दिल का खिलौना हाय टूट गया', 'मस्ताना मौसम', 'तेरी शहनाई बोले' शामिल हैं।

हिंदी सिनेमा के महान गीतकार और कवि भरत व्यास का निधन 4 जुलाई 1982 को हुआ, लेकिन अपनी अमर लेखनी के कारण वह आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है।


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