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पल्लवी जोशी: डेली सोप बन गए राक्षस, रचनात्मकता पड़ा असर

मुंबई, अभिनेत्री और फिल्ममेकर पल्लवी जोशी का मानना है कि डेली सोप्स (रोजाना प्रसारित होने वाले धारावाहिकों) ने भारतीय टेलीविजन को पूरी तरह बदल दिया है। उनके अनुसार, इनकी वजह से टेलीविजन पर बड़े और अव्यवस्थित प्रोडक्शन शेड्यूल का चलन बढ़ा है, जिससे रचनात्मकता प्रभावित हुई है।

पल्लवी जोशी: डेली सोप बन गए राक्षस, रचनात्मकता पड़ा असर
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मुंबई, अभिनेत्री और फिल्ममेकर पल्लवी जोशी का मानना है कि डेली सोप्स (रोजाना प्रसारित होने वाले धारावाहिकों) ने भारतीय टेलीविजन को पूरी तरह बदल दिया है। उनके अनुसार, इनकी वजह से टेलीविजन पर बड़े और अव्यवस्थित प्रोडक्शन शेड्यूल का चलन बढ़ा है, जिससे रचनात्मकता प्रभावित हुई है।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से खास बातचीत में पल्लवी ने बताया कि साप्ताहिक कार्यक्रमों से डेली सोप्स की ओर बदलाव ने लेखकों और क्रिएटर्स पर काफी दबाव बढ़ा दिया है। इसका असर कंटेंट की गुणवत्ता पर भी पड़ा है।

उन्होंने कहा, "जब डेली सोप्स शुरू हुए, तो टेलीविजन एक ऐसे राक्षस की तरह बन गया, जिसे हर दिन कुछ नया देना पड़ता था।"

इस बदलाव से जुड़ी चुनौतियों के बारे में बताते हुए पल्लवी ने कहा कि जो इंडस्ट्री हर हफ़्ते एपिसोड बनाने की आदी थी, उसे अचानक लगभग हर दिन कंटेंट तैयार करना पड़ रहा था।

उन्होंने बताया, "एक क्रिएटिव इंडस्ट्री के लिए, जो हर हफ्ते शो बनाने की आदी है, अब हम महीने में सिर्फ 15-16 दिनों में चार एपिसोड की शूटिंग कर रहे हैं। पहले जहां 28 दिनों के शो के लिए करीब 24 दिन शूटिंग के लिए मिलते थे, वहीं अब समय कम हो गया है। ऐसे में एक दिन में लगभग डेढ़ एपिसोड की शूटिंग करनी पड़ती है।"

अनुभवी अभिनेत्री के अनुसार, ऐसे व्यस्त शेड्यूल का लेखकों पर भी काफी नकारात्मक असर पड़ा।

उन्होंने कहा, "शूटिंग अपनी जगह है लेकिन लेखकों के लिए इतने सारे एपिसोड लिखना बहुत मुश्किल होता है। आप जानते हैं कि 'राइटर ब्लॉक' जैसी समस्या भी होती है। ऐसे में क्या किया जा सकता है? उन्हें लगातार लिखते रहना पड़ता है।"

पल्लवी ने आगे कहा कि लगातार कंटेंट तैयार करने के दबाव के कारण टेलीविजन पर एक जैसी कहानियां बार-बार दिखाई जाने लगीं।

उन्होंने कहा, "जब कोई तरीका काम नहीं करता था, तो वही पुराने और आजमाए हुए फॉर्मूले फिर से अपनाए जाने लगते थे।"

उनके मुताबिक, क्योंकि सास भी कभी बहू थी' की सफलता को याद करते हुए पल्लवी ने कहा कि यह शो शुरुआत में इसलिए खास था, क्योंकि इसमें दर्शकों को कुछ नया देखने को मिला था। हालांकि, उनका मानना है कि इसकी सफलता के बाद इसी तरह के कई और शो बनने लगे।

उन्होंने कहा, "जब 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' आया, तो एक शो के रूप में इसने बहुत अच्छा काम किया, क्योंकि यह दर्शकों के लिए एक अलग अनुभव था। लेकिन, जब इसी तरह के 10 और शो बनने लगे, तो महिलाओं की भूमिका कम होने लगी। उस समय तक पुरुष भी प्रोड्यूसर के तौर पर इस क्षेत्र में आने लगे थे।"

उन्होंने आगे कहा कि पर्दे के पीछे बदलते हालातों का असर टेलीविजन पर महिलाओं को दिखाने के तरीके पर भी पड़ा।

पल्लवी ने कहा, "और अचानक यह फिर से ऐसा माध्यम बन गया, जहां पुरुषों का दबदबा बढ़ गया। उनकी बातों को ज्यादा महत्व दिया जाने लगा। इसलिए जब इसमें आर्थिक पहलू जुड़ जाता है, तो चीजें बिगड़ने लगती हैं।"

मौजूदा मनोरंजन जगत के बारे में अपनी राय रखते हुए अभिनेत्री ने कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को भी इसी तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, "ओटीटी की शुरुआत तो बहुत अच्छी हुई थी। लेकिन, सच कहूं तो अभी मुझे नहीं पता कि यह किस दिशा में जा रहा है।"

प्रोफ़ेशनल तौर पर, पल्लवी हाल ही में रिलीज हुई वेब सीरीज 'मारगाओ फ़ाइल्स' में नज़र आईं।


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