Top
Begin typing your search above and press return to search.

मीनाक्षी शेषाद्रि ने फिर ताजा की 'ओ मेरे ख्वाबों के शहजादे' की यादें

मुंबई, अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्रि ने अपने मशहूर गाने 'ओ मेरे ख्वाबों के शहजादे' को एक बार फिर नए अंदाज में पेश कर पुरानी यादें ताजा कर दी हैं।

मीनाक्षी शेषाद्रि ने फिर ताजा की ओ मेरे ख्वाबों के शहजादे की यादें
X

मुंबई, अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्रि ने अपने मशहूर गाने 'ओ मेरे ख्वाबों के शहजादे' को एक बार फिर नए अंदाज में पेश कर पुरानी यादें ताजा कर दी हैं। 1985 में आई फिल्म 'मेरी जंग' के इस रोमांटिक गानों को दर्शकों ने खूब पसंद किया था। अब करीब चार दशक बाद अभिनेत्री ने इसी गाने पर एक नया वीडियो साझा किया है, जिसमें वह पहले से बिल्कुल अलग रूप में नजर आ रही हैं। वीडियो सामने आते ही फैंस के बीच उस दौर की यादें फिर से ताजा हो गई हैं।

मीनाक्षी शेषाद्रि ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह 'ओ मेरे ख्वाबों के शहजादे' पर उसी गाने की यादों को दोबारा जीती दिखाई दे रही हैं। हालांकि इस बार उनका आउटफिट पहले से काफी अलग है। फिल्म के ओरिजनल गाने में मीनाक्षी लाल रंग की खूबसूरत ड्रेस में नजर आई थीं, जबकि इस नए वीडियो में उन्होंने ब्लैक लेदर जैकेट, व्हाइट टॉप और ब्लू जींस पहनी है। वीडियो में उनका आत्मविश्वास और गाने के साथ तालमेल लोगों का ध्यान खींच रहा है।

वीडियो साझा करते हुए मीनाक्षी ने कैप्शन में लिखा, ''बारिश के इस मौसम में मुझे इस खूबसूरत रोमांटिक गाने से जुड़ी बेहद प्यारी यादें आ रही हैं। उस समय मुंबई के समुद्री बीच पर भारी बारिश के बीच इस गाने की शूटिंग हुई थी। कोरियाग्राफी बेहद जादुई थी। मैंने इस बार गाने को थोड़ा सहज अंदाज में दोबारा पेश किया है।''

'ओ मेरे ख्वाबों के शहजादे' गाने को अनुराधा पौडवाल ने गाया था। इसका संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने तैयार किया था, जबकि गीत आनंद बख्शी ने लिखा था। सुभाष घई के निर्देशन में बनी 'मेरी जंग' में मीनाक्षी के साथ अनिल कपूर मुख्य भूमिका में थे।

फिल्म की कहानी अरुण शर्मा (अनिल कपूर) के इर्द-गिर्द घूमती है। उसके पिता दीपक वर्मा (गिरीश कर्नाड) और माता आरती (नूतन) एक खुशहाल जीवन जीते हैं। लेकिन एक दिन ताकतवर वकील जी. डी. ठकराल (अमरीश पुरी) अपने रसूख और पैसों के दम पर दीपक वर्मा पर एक झूठा आरोप लगवाता है। इस झूठे आरोप के अपमान को अरुण के पिता सहन नहीं कर पाते और उनकी मृत्यु हो जाती है। ऐसे में अरुण वर्मा एक काबिल वकील बनता है और पिता की मौत के जिम्मेदार ठकराल से बदला लेने की कसम खाता है। अरुण कोर्ट में ठकराल को उसके ही दांव-पेंच सिखाकर उसी की भाषा में चुनौती देता है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it