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मधु का बयान: पहले कलाकारों को सीखने का समय मिलता था, अब पहली फिल्म से ही साबित करना होता है

मुंबई, 90 के दशक की चर्चित अभिनेत्री मधु ने अपनी फिल्मों से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी। उन्होंने 'फूल और कांटे', 'रोजा', 'जेंटलमैन' और 'योधा' जैसी कई यादगार फिल्मों में काम किया। वह लंबे समय तक फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा रहीं।

मधु का बयान: पहले कलाकारों को सीखने का समय मिलता था, अब पहली फिल्म से ही साबित करना होता है
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मुंबई, 90 के दशक की चर्चित अभिनेत्री मधु ने अपनी फिल्मों से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी। उन्होंने 'फूल और कांटे', 'रोजा', 'जेंटलमैन' और 'योधा' जैसी कई यादगार फिल्मों में काम किया। वह लंबे समय तक फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा रहीं।

मधु का मानना है कि उनके दौर की अभिनेत्रियों को खुद को निखारने और दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाने का समय मिलता था, जबकि आज की अभिनेत्रियों के सामने शुरुआत से ही खुद को साबित करने की बड़ी चुनौती होती है।

आईएएनएस से बात करते हुए मधु ने कहा, ''हम सभी का करियर काफी लंबा रहा। मैंने अपनी इच्छा से करीब 9 साल बाद फिल्मों से दूरी बना ली, लेकिन मेरी साथ की अभिनेत्रियां लगातार काम करती रहीं। उन्होंने समय के साथ खुद को बदला, नए किरदार अपनाए और दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाए रखी। आज की अभिनेत्रियों को इतना लंबा समय नहीं मिल पाता। वे पहली ही फिल्म में बेहद खूबसूरत और पूरी तरह तैयार नजर आती हैं, कुछ फिल्में करती हैं और फिर उनके जगह पर कोई नया चेहरा आ जाता है।''

उन्होंने आगे कहा, ''हमारे समय का फायदा यह था कि शुरुआत में परफेक्ट न होने के बावजूद हमें खुद को साबित करने का मौका मिलता था। आज की अभिनेत्रियां शुरुआत से ही परफेक्ट होती हैं, लेकिन उन पर पहली ही फिल्म से अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव रहता है। उन्हें काफी सपोर्ट मिलता है, लेकिन अगर पहली फिल्म में दर्शकों को प्रभावित नहीं कर पाईं तो उनके लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है।''

मधु ने अपना उदाहरण देते हुए कहा, ''अगर दर्शकों को हम पसंद नहीं आते थे, तो हमें दूसरा और तीसरा मौका भी मिलता था। मेरे 9 साल के करियर में हर फिल्म मेरे लिए सीखने का एक नया अवसर थी। मैं शुरुआत में उतनी अच्छी नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे बेहतर होती गई। दर्शकों ने मुझे खुद को सुधारने का समय दिया। मेरी पहली फिल्म 'फूल और कांटे' में मैं बेस्ट नहीं थी, लेकिन लोगों ने मुझसे जुड़ाव महसूस किया। इसके बाद मुझे अपने अभिनय के साथ-साथ हेयरस्टाइल, मेकअप और स्क्रीन प्रेजेंस जैसी चीजों में भी सुधार करने का मौका मिला। आज के समय में कलाकार पूरी तैयारी के साथ आते हैं, इसलिए या तो पहली ही फिल्म में प्रभावित करना पड़ता है या फिर इंडस्ट्री से बाहर होने का खतरा रहता है।''

गौरतलब है कि मधु ने साल 1991 में अजय देवगन के साथ फिल्म 'फूल और कांटे' से बॉलीवुड में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने 'रोजा', 'अल्लारी प्रियुडु', 'योधा' और 'जेंटलमैन' जैसी कई सफल फिल्मों में काम किया। खास तौर पर 'रोजा' में उनके अभिनय को आज भी याद किया जाता है।


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