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संगीत की टीचर बनना चाहती थीं के. एस. चित्रा, किस्मत ने बना दिया सुरों की मलिका

मुंबई, सिंगर के. एस. चित्रा ने चार दशक से ज्यादा लंबे करियर में न सिर्फ फिल्मी गीत गाए, बल्कि अपने विनम्र स्वभाव से लोगों के दिल भी जीते। चित्रा का सपना गायिका बनना नहीं, बल्कि संगीत की एक अच्छी शिक्षिका बनने का था। हालांकि किस्मत ने उन्हें ऐसा रास्ता दिखाया कि वह भारत की सबसे सम्मानित गायिकाओं में शामिल हो गईं।

संगीत की टीचर बनना चाहती थीं के. एस. चित्रा, किस्मत ने बना दिया सुरों की मलिका
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मुंबई, सिंगर के. एस. चित्रा ने चार दशक से ज्यादा लंबे करियर में न सिर्फ फिल्मी गीत गाए, बल्कि अपने विनम्र स्वभाव से लोगों के दिल भी जीते। चित्रा का सपना गायिका बनना नहीं, बल्कि संगीत की एक अच्छी शिक्षिका बनने का था। हालांकि किस्मत ने उन्हें ऐसा रास्ता दिखाया कि वह भारत की सबसे सम्मानित गायिकाओं में शामिल हो गईं।

के. एस. चित्रा का जन्म 27 जुलाई 1963 को केरल के तिरुवनंतपुरम में हुआ था। उनके पिता कृष्णन नायर स्कूल शिक्षक थे और संगीत के भी बड़े प्रेमी थे। उनकी मां शांताकुमारी भी संगीत शिक्षिका थीं। घर में शुरू से ही संगीत का माहौल था। पिता ने बचपन में ही चित्रा की आवाज की खासियत पहचान ली थी और उन्हें संगीत सीखने के लिए प्रेरित किया।

चित्रा पढ़ाई में भी अच्छी थीं। उन्होंने तिरुवनंतपुरम के एक स्कूल से पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने संगीत में स्नातक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के दौरान उनका लक्ष्य गायिका बनना नहीं, बल्कि संगीत की शिक्षा देना था। वह चाहती थीं कि आगे चलकर बच्चों को संगीत सिखाएं और इसी क्षेत्र में अपना करियर बनाएं लेकिन उनके शिक्षकों और परिवार ने उनकी आवाज को पहचाना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

साल 1978 से 1984 के बीच उन्हें भारत सरकार की नेशनल टैलेंट सर्च स्कॉलरशिप भी मिली, जिसने उनके संगीत सफर को और मजबूत बनाया।

के. एस. चित्रा को फिल्मी दुनिया में पहला बड़ा मौका मलयालम संगीतकार एम. जी. राधाकृष्णन ने दिया। साल 1979 में उन्होंने चित्रा की आवाज रिकॉर्ड की। इसके बाद धीरे-धीरे उनकी पहचान बनने लगी। साल 1982 में आई फिल्म 'केलकथा शब्दम' से उनके प्लेबैक सिंगिंग करियर की शुरुआत मानी जाती है।

इसके बाद चित्रा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने मलयालम, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, हिंदी समेत कई भाषाओं में हजारों गाने गाए। उनकी आवाज को लोगों ने इतना पसंद किया कि उन्हें 'केरल की कोकिला' और 'लिटिल नाइटिंगेल ऑफ इंडिया' जैसे नामों से सम्मान मिला।

संगीत की दुनिया में चित्रा ने ए. आर. रहमान, इलैयाराजा, एम. एम. कीरवानी और कई बड़े संगीतकारों के साथ काम किया। हिंदी सिनेमा में भी उन्होंने कई लोकप्रिय गाने दिए। फिल्म 'बॉम्बे' का गाना 'कहना ही क्या' आज भी लोगों की जुबा पर मौजूद है।

चित्रा के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में छह नेशनल फिल्म अवॉर्ड शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने कई फिल्मफेयर अवॉर्ड, राज्य सरकारों के पुरस्कार और साल 2005 में पद्म श्री तथा 2021 में पद्म भूषण जैसे बड़े सम्मान हासिल किए। साल 2001 में उन्होंने लंदन के प्रतिष्ठित रॉयल अल्बर्ट हॉल में भी प्रस्तुति दी।

चित्रा ने जरूरतमंद और रिटायर हो चुके संगीतकारों की मदद के लिए 'स्नेहानंदना ट्रस्ट' भी शुरू किया।


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