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भीड़ में भी तन्हा हूँ- अविका गौर ने शेयर किया भावुक पोस्ट हुआ वायरल

मुंबई, टेलीविजन इंडस्ट्री की लोकप्रिय अभिनेत्री अविका गौर ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर अपने अकेलेपन और अपने वजूद को लेकर पोस्ट शेयर किया। अभिनेत्री ने बताया कि अकेलापन हमेशा अकेले रहने से महसूस नहीं होता, बल्कि कई बार आप सैकड़ों लोगों के बीच मौजूद रहकर भी समझ नहीं पाते कि हो क्या रहा है।

भीड़ में भी तन्हा हूँ- अविका गौर ने शेयर किया भावुक पोस्ट हुआ वायरल
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मुंबई, टेलीविजन इंडस्ट्री की लोकप्रिय अभिनेत्री अविका गौर ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर अपने अकेलेपन और अपने वजूद को लेकर पोस्ट शेयर किया। अभिनेत्री ने बताया कि अकेलापन हमेशा अकेले रहने से महसूस नहीं होता, बल्कि कई बार आप सैकड़ों लोगों के बीच मौजूद रहकर भी समझ नहीं पाते कि हो क्या रहा है।

अभिनेत्री अविका गौर ने इंस्टाग्राम स्टोरीज सेक्शन पर एक नोट शेयर करते हुए लिखा, "हाल ही के दिनों में मैंने महसूस किया है कि अकेलापन सिर्फ कमरे में अकेले रहने का नाम नहीं है, क्योंकि कई बार हम बहुत सारे लोगों के बीच होते हैं, फिर भी हम बिल्कुल पराया और अकेला महसूस करते हैं। ऐसे समय में दोस्तों और जिनसे करीबी रिश्ता है, उनके बीच जगह बनाना बहुत थका देने वाला होता है। आप जितनी भी कोशिश करें। लोग या तो सोचते हैं कि आपको उनकी जरूरत नहीं है या फिर आपको जरूरत से ज्यादा उनसे जुड़ने वाला समझ लेते हैं।"

अविका ने बताया कि उन्होंने अपना पूरा जीवन अपने करियर को दे दिया, लेकिन वे यह नहीं समझ पाईं कि समय के साथ लोगों को अपनी जिंदगी में बिना शर्त शामिल करना कितना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने लिखा, "मैंने अपनी पूरी जिंदगी सिर्फ अपना करियर बनाने में लगा दी, लेकिन मुझे यह अंदाजा नहीं था कि वक्त बीतने के साथ ऐसे लोग मिलना कितना मुश्किल हो जाता है, जो बिना किसी मतलब या शर्त के आपको अपना दोस्त बना लें।"

उन्होंने लिखा, "कोई आपको यह नहीं बताता कि बड़ा होना सिर्फ उम्र बढ़ने या समय बीतने का नाम नहीं है। इसके साथ यह भी होता है कि ऐसे लोग मिलना मुश्किल हो जाता है, जो आपको उतनी ही अहमियत दें, जितनी आप उन्हें देते हैं। जब वे दोस्ती कर रहे थे, तब शायद आप तैयार नहीं थे और अब जब आप लोगों को अपनाने और अपनी जिंदगी में जगह देने के लिए तैयार हैं, तब तक ज्यादातर लोगों का अपना-अपना दायरा बन चुका होता है। ऐसे में कई बार आप सबको जानते तो हैं, लेकिन फिर भी कहीं भी अपना नहीं महसूस करते।"


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