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अर्जुन बिजलानी : त्योहारों का मौसम अपनों के साथ

मुंबई, टेलीविजन अभिनेता अर्जुन बिजलानी का मानना ​​है कि त्योहारों का मौसम आपके व्यस्त काम से ब्रेक लेने और अपने प्रियजनों के साथ अच्छा समय बिताने का एक बेहतरीन मौका होता है। उन्हें खुद भी अपने परिवार के साथ घर पर पारंपरिक तरीके से दीपावली मनाना पसंद है।

अर्जुन बिजलानी : त्योहारों का मौसम अपनों के साथ
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मुंबई, टेलीविजन अभिनेता अर्जुन बिजलानी का मानना ​​है कि त्योहारों का मौसम आपके व्यस्त काम से ब्रेक लेने और अपने प्रियजनों के साथ अच्छा समय बिताने का एक बेहतरीन मौका होता है। उन्हें खुद भी अपने परिवार के साथ घर पर पारंपरिक तरीके से दीपावली मनाना पसंद है।

उन्होंने आगे कहा, "दीपावली का मतलब हमेशा परिवार के साथ अच्छा समय बिताना होता है। हम आमतौर पर घर पर ही त्योहार मनाते हैं, पूजा करते हैं, घर को सजाते हैं, स्वादिष्ट खाना खाते हैं और हां, यह पक्का करते हैं कि खूब हंसी-खुशी का माहौल हो। मैं अपने काम में हमेशा व्यस्त रहता हूं, लेकिन फिर भी अपने परिवार के लिए समय निकालने और उनके साथ त्योहार मनाने की पूरी कोशिश करता हूं।"

अर्जुन ने कहा, "यह काम और त्योहारों के बीच तालमेल बिठाने की बात है। मुझे लगता है कि जो लोग और चीजें आपके लिए मायने रखती हैं, उनके लिए समय निकालना बहुत जरूरी है। मैं अपना शेड्यूल इस तरह से सेट करने की कोशिश करता हूं कि मैं अपने परिवार के साथ त्योहारों का आनंद ले सकूं। काम महत्वपूर्ण है, लेकिन दिन के अंत में, अपने प्रियजनों के साथ बिताए गए ये पल भी उतने ही कीमती होते हैं।"

अर्जुन ने यह भी माना कि समय के साथ दीपावली को लेकर उनका नजरिया बदल गया है।

उन्होंने कहा, "बचपन में दीपावली का मतलब नए कपड़े, मिठाइयां, पटाखे और परिवार से मिलना-जुलना होता था। लेकिन बड़े होने पर समझ आता है कि इस त्योहार के मायने कहीं ज्यादा गहरे हैं। मेरे लिए, 'अंधेरे पर रोशनी की जीत' का मतलब उम्मीद, सकारात्मकता और मुश्किल समय में ताकत जुटाने से भी है। यह मुझे याद दिलाता है कि मेरे पास जो कुछ भी है, उसके लिए मुझे आभारी रहना चाहिए और जीवन में चाहे कैसी भी परिस्थितियां आएं, हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए।"

दीपावली की अपनी सबसे प्यारी यादों को साझा करते हुए अभिनेता कहते हैं, "अपने परिवार के साथ दीपावली हमेशा खास होती है, लेकिन जब हम सब एक ही छत के नीचे एक साथ होते हैं, तो वह पल सबसे यादगार बन जाता है। जैसे-जैसे आप बड़े होते हैं, आपको एहसास होता है कि दीपावली की असली खुशी सिर्फ जश्न मनाने में नहीं, बल्कि उन लोगों के साथ होती है जिनके साथ आप इसे मनाते हैं। हंसी-मजाक के वे पल, अपनों के साथ रहना और यादें संजोना ही वह चीज है जिसे आप हमेशा अपने पास रखते हैं।"



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