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अनुपम खेर की फिल्म 'तन्वी द ग्रेट' की रिलीज को एक साल पूरा

मुंबई, अभिनेता अनुपम खेर की फिल्म 'तन्वी द ग्रेट' ने शनिवार को अपनी रिलीज के एक साल पूरे कर लिए हैं। इस मौके पर अभिनेता ने फिल्म से जुड़े यादगार सफर पर बात की।

अनुपम खेर की फिल्म तन्वी द ग्रेट की रिलीज को एक साल पूरा
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मुंबई, अभिनेता अनुपम खेर की फिल्म 'तन्वी द ग्रेट' ने शनिवार को अपनी रिलीज के एक साल पूरे कर लिए हैं। इस मौके पर अभिनेता ने फिल्म से जुड़े यादगार सफर पर बात की। उन्होंने बताया कि इसका सबसे बड़ा इनाम दुनिया भर में मिली तारीफ नहीं थी, बल्कि परिवारों पर पड़ा असर और लोग ऑटिज्म को जिस तरह से देखते हैं, वह था।

अनुपम खेर ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने फिल्म के प्रभाव के बारे में बात की। उन्होंने कमेंट सेक्शन में भी इसका जिक्र किया। उन्होंने लिखा, "आज हमारी फिल्म 'तन्वी द ग्रेट' को रिलीज हुए एक साल पूरा हो गया है। आज, जब मैं इस एक साल के अद्भुत सफर को पीछे मुड़कर देखता हूं, तो मेरा मन कृतज्ञता से भर जाता है। यह फिल्म दुनिया के कई देशों तक पहुंची, प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों का हिस्सा बनी, सम्मान और पुरस्कार प्राप्त किए।"

दिग्गज स्टार ने बताया कि कैसे फ़िल्म को कई पुरस्कार समारोहों और फ़िल्म समारोहों में सम्मानित किया गया। उन्होंने लिखा, "फिल्म को इंडियन पैनोरमा (आईएफएफआई) में चयन, फिप्रेसी अवॉर्ड से बेस्ट फीचर फिल्म का सम्मान, इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ ऑस्ट्रेलिया में बेस्ट स्क्रीनप्ले और हमारी शानदार शुभांगी के लिए बेस्ट एक्ट्रेस और बेस्ट डेब्यू एक्ट्रेस जैसे अनेक सम्मान इस यात्रा को और भी यादगार बनाते हैं।”

हालांकि, अनुपम के लिए अवॉर्ड फिल्म के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि नहीं हैं। उन्होंने आगे लिखा, "अगर आप मुझसे पूछें, तो इनमें से कोई भी इस फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धि नहीं है। इस फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धि हैं वे हजारों संदेश, जो हमें माता-पिता, शिक्षकों और युवाओं से मिले। किसी ने लिखा कि अब वे ऑटिज्म को एक नई नजर से देखते हैं। किसी ने कहा कि अब उन्होंने अपने बच्चे को छिपाना बंद कर दिया है। किसी ने लिखा कि इस फिल्म ने उन्हें अपने बच्चे को समझने की एक नई दृष्टि दी।"

अनुपम खेर द्वारा अभिनीत और निर्देशित फिल्म 'तन्वी द ग्रेट' ऑटिज्म से पीड़ित एक विशेष बच्ची और उसके साहस की अनूठी कहानी है। अनुपम खेर ने ऑटिज्म को एक 'सुपर पावर' के रूप में पेश किया है और समाज को यह समझाने की कोशिश की है कि ऑटिस्टिक बच्चे किसी भी तरह से सामान्य बच्चों से कम नहीं होते हैं।


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