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अमजद अली खान ने बताई अपने म्यूजिक की खासियत

ग्वालियर, मशहूर सरोद वादक अमजद अली खान ने अपने परिवार की संगीत विरासत और ग्वालियर स्थित 'सरोज घर' के बारे में बात की, जहां उनके पूर्वजों और भारत के कई महान संगीतकारों के इंस्ट्रूमेंट्स सहेजकर रखे गए हैं।

अमजद अली खान ने बताई अपने म्यूजिक की खासियत
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ग्वालियर, मशहूर सरोद वादक अमजद अली खान ने अपने परिवार की संगीत विरासत और ग्वालियर स्थित 'सरोज घर' के बारे में बात की, जहां उनके पूर्वजों और भारत के कई महान संगीतकारों के इंस्ट्रूमेंट्स सहेजकर रखे गए हैं।

उन्होंने आईएएनएस संग बातचीत में बताया कि जिस घर में उनका जन्म हुआ था, उसे अब म्यूजियम में बदल दिया गया है। इस म्यूजियम में उनके परिवार की कई पीढ़ियों की संगीत विरासत के साथ दूसरे महान कलाकारों के इंस्ट्रूमेंट्स भी मौजूद हैं।

आईएएनएस से बात करते हुए अमजद अली खान ने कहा कि उनके बचपन के दिनों का सरोद भी इसी म्यूजियम में रखा गया है। उन्होंने बताया, ''ग्वालियर में म्यूजियम में मेरे शुरुआती दिनों का सरोद रखा है, जहां मेरा जन्म हुआ था। हमारे पुश्तैनी घर को म्यूजियम में बदल दिया गया है। इसका नाम 'सरोज घर' है। यहां मेरे पूर्वजों और भारत के दूसरे महान संगीतकारों के सभी इंस्ट्रूमेंट्स रखे गए हैं।''

उन्होंने आगे कहा, ''कई बड़े संगीतकारों ने अपने इंस्ट्रूमेंट्स इस म्यूजियम को दान किए हैं। हर महान संगीतकार और सरोद वादक का अपने इंस्ट्रूमेंट के साथ एक खास रिश्ता होता है। हर कलाकार अपने अंदाज में सरोद बजाता है और उसकी धुन में उसकी अपनी पहचान झलकती है।''

अमजद अली खान ने कहा, ''हर सरोद वादक का म्यूजिक और उसे बजाने का तरीका अलग होता है। मेरे पिता के सरोद और मेरे बेटों अमान अली बंगश और अयान अली बंगश के म्यूजिक काफी अलग है। मेरा साउंड भी अलग है। भगवान की कृपा से मैं सिर्फ सरोद नहीं बजाता, बल्कि अपने इंस्ट्रूमेंट के जरिए गाता हूं।''

अमजद अली खान के कहा, ''म्यूजिक में सबसे जरूरी बात यह है कि इंस्ट्रूमेंट के जरिए भावनाओं को किस तरह सामने लाया जाता है। मेरे लिए सरोद से निकलने वाली धुन में गायकी का अहसास होना बहुत अहम है। यही बात मेरे म्यूजिक को खास बनाती है।''

सरोद के भविष्य और नई पीढ़ी के कलाकारों पर बात करते हुए अमजद अली खान ने खुशी जताई। उन्होंने कहा, ''आज दुनियाभर में करीब 500 सरोद वादक हैं और यह इस इंस्ट्रूमेंट के लिए अच्छी बात है। भारतीय शास्त्रीय संगीत की अलग-अलग विधाओं में युवा कलाकार शानदार काम कर रहे हैं। सितार, तबला, गायकी और डांस समेत भारतीय संगीत की अलग-अलग विधाओं में नई पीढ़ी के प्रतिभाशाली कलाकार सामने आ रहे हैं। मुझे भरोसा है कि आने वाले समय में सरोद की पहचान और मजबूत होगी।''


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