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उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन आज से चार राज्यों के दौरे पर

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शनिवार से तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और लक्षद्वीप के तीन दिवसीय दौरे पर जाएंगे। इस दौरान वह शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक कार्यक्रमों से जुड़े कई आयोजनों में भाग लेंगे।

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन आज से चार राज्यों के दौरे पर
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तमिलनाडु में टेक्नोलॉजी ट्रस्ट समारोह में होंगे शामिल

  • बेंगलुरु में रामकृष्ण हेगड़े जन्मशती कार्यक्रम
  • केरल में अरनमुला जल महोत्सव और ओणम पेजेंट्री का उद्घाटन
  • लक्षद्वीप और कोच्चि में सांस्कृतिक व शैक्षणिक कार्यक्रम

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शनिवार से तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और लक्षद्वीप के तीन दिवसीय दौरे पर जाएंगे। इस दौरान वह शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक कार्यक्रमों से जुड़े कई आयोजनों में भाग लेंगे।

आधिकारिक बयान के अनुसार, उपराष्ट्रपति 29 अगस्त को सबसे पहले तमिलनाडु के इरोड जाएंगे, जहां कोंगु वेल्लालर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ट्रस्ट के संस्थापक दिवस समारोह में शामिल होंगे।

इसके बाद वह बेंगलुरु पहुंचेंगे, जहां कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े की जन्मशती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेंगे। यह कार्यक्रम विधान सौधा में आयोजित किया जाएगा।

30 अगस्त को उपराष्ट्रपति केरल के दौरे पर रहेंगे। वह सबसे पहले अलप्पुझा में केरल कौमुदी के 115वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम लियो 13वां उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित किया जाएगा।

इसके बाद वह पथानामथिट्टा जाएंगे और अरनमुला जल महोत्सव 2026 का उद्घाटन करेंगे। बाद में वह तिरुवनंतपुरम पहुंचेंगे, जहां केरल के प्रमुख सांस्कृतिक पर्व ओणम के अवसर पर आयोजित ओणम पेजेंट्री का उद्घाटन करेंगे।

31 अगस्त को उपराष्ट्रपति लक्षद्वीप के अगाती द्वीप का दौरा करेंगे। वहां वह मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के एक जनसंपर्क कार्यक्रम में मुख्य अतिथि होंगे। इसके बाद वह केरल लौटेंगे और कोच्चि के कक्कनाड स्थित राजागिरि स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के रजत जयंती समारोह तथा कॉनफ्लुएंस 3.0 इंडस्ट्री-अकादमिक सम्मेलन में भाग लेंगे।

इससे पहले शुक्रवार को उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने विश्व संस्कृत दिवस के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने कहा, "संस्कृत भारत के ज्ञान, दर्शन और सभ्यता की शाश्वत भाषा है। संस्कृत ने सदियों से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और बौद्धिक परंपराओं को आकार दिया है।"

उन्होंने लोगों से इस अमूल्य धरोहर को संरक्षित, प्रोत्साहित और आगे बढ़ाने का संकल्प लेने की अपील की।


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