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आज लोकतंत्र की सबसे बड़ी रक्षक बनने का ढोंग कर रही कांग्रेस: जेपी नड्डा

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण व रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के दुर्ग में आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ यात्रा में प्रतिभाग किया और इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कांग्रेस और राहुल गांधी पर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने तथा चुनाव आयोग पर अनर्गल आरोप लगाने का आरोप लगाया।

आज लोकतंत्र की सबसे बड़ी रक्षक बनने का ढोंग कर रही कांग्रेस: जेपी नड्डा
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नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण व रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के दुर्ग में आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ यात्रा में प्रतिभाग किया और इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कांग्रेस और राहुल गांधी पर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने तथा चुनाव आयोग पर अनर्गल आरोप लगाने का आरोप लगाया।

जेपी नड्डा ने कहा कि मतदाता सूची का शुद्धिकरण लोकतंत्र की मजबूती और घुसपैठियों की पहचान के लिए आवश्यक है। उन्होंने आपातकाल, कांग्रेस शासनकाल में लोकतांत्रिक संस्थाओं के कथित दुरुपयोग और विपक्ष की वोट चोरी संबंधी राजनीति का उल्लेख करते हुए कार्यकर्ताओं से गांवों, चौपालों और मोहल्लों में तथ्यों एवं तर्कों के साथ जनजागरण अभियान चलाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव, केदार कश्यप, श्याम बिहारी जायसवाल, सांसद विजय बघेल, प्रदेश उपाध्यक्ष जगन्नाथ पाणिग्रही सहित अन्य नेतागण उपस्थित रहे।

उन्होंने कहा कि हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि हमारा जन्म भारत जैसे देश में हुआ है। भारत को प्रजातंत्र की जननी और 'मदर ऑफ डेमोक्रेसी' कहा जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा प्रजातांत्रिक देश है। हमारे देश में 90 करोड़ से अधिक मतदाता हैं और इसकी आबादी 140 करोड़ है। सबसे खुशी की बात यह है कि जब दुनिया में चुनाव कराने की बात आती है, तो विश्व भारत के चुनाव आयोग की खुले दिल से प्रशंसा करता है। लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं, जो चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट सहित संवैधानिक संस्थाओं को डराने-धमकाने का प्रयास करते हैं, ताकि वे अपना स्वार्थ पूरा कर सकें। ये वही लोग हैं, जिन्हें आपने बचपन में स्कूल में देखा होगा।

उन्होंने कहा कि जब कोई बच्चा कभी-कभी परीक्षा में पास हो जाता है, तो वह खुद को बहुत होशियार बताता है, लेकिन जब वह बार-बार फेल होता है, तो मास्टर को खराब बताने लगता है। यही हाल राहुल गांधी का है। कभी-कभी चुनाव जीतने पर वे खुद को बहुत होशियार बताते हैं और लगातार चुनाव हारने पर चुनाव आयोग को खराब बताते हैं। इन लोगों ने यही तरीका अपना लिया है। इस अराजकता से हमें बचने की आवश्यकता है। इसके लिए हमें जनजागरण करना होगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के बस्तर में चांदामेटा नामक एक स्थान है, जहां वर्ष 2023 तक मतदान नहीं होता था लेकिन मोदी सरकार ने जिस तरह नक्सलवाद को समाप्त किया, उसके बाद वर्ष 2023 में वहां पहली बार मतदान केंद्र स्थापित हुआ और स्थानीय मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। चांदामेटा में लगभग 300 लोगों ने मतदान किया। चुनाव आयोग के 10 कर्मचारी मीलों पैदल चलकर वहां पहुंचे और मतदान केंद्र स्थापित करके इस कार्य को पूरा किया। जो लोग चुनाव आयोग पर आरोप लगाते हैं, वे प्रजातंत्र का विरोध करते हैं और लोकतंत्र को खतरे में डालने का प्रयास कर रहे हैं। इसके बावजूद वे लोकतंत्र की बात करते हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने ही प्रजातंत्र को कटघरे में खड़ा किया, लोकतंत्र को जंजीरों में बांधा और आपातकाल लगाया था। आपातकाल के दौरान एक लाख लोगों को बिना किसी कारण, बिना किसी दलील और बिना कोई मुकदमा दर्ज किए दो साल तक जेल में डाल दिया गया था। यह इनकी करतूत है और आज यही लोग लोकतंत्र की दुहाई देते हैं। अंग्रेजों ने भी भारत छोड़ो आंदोलन और आजादी के अन्य आंदोलनों के दौरान कभी इतनी बड़ी संख्या में लोगों को जेल में नहीं डाला, जितना इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान डाला था। आज यही लोग लोकतंत्र के रक्षक बनने का दावा करते हैं।

जेपी नड्डा ने कहा कि ये वही लोग हैं जो अभी परसों हुए एमएलसी चुनाव में ईवीएम का विरोध करते थे और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करते थे। 28 सीटों पर चुनाव हुए, जिनमें से केवल एक सीट कांग्रेस पार्टी को मिली और बाकी सभी सीटों पर उसके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। यह कांग्रेस पार्टी की स्थिति है। कर्नाटक में भी कांग्रेस की सरकार है, लेकिन वहां चार एमएलसी सीटों पर चुनाव हुए और कांग्रेस को चारों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। देश में अब तक 12 बार एसआईआर हो चुका है। इनमें से 10 बार कांग्रेस पार्टी ने एसआईआर कराया है। केवल दो बार एसआईआर हमारी सरकार के समय हुआ है, एक बार श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी के कार्यकाल में और दूसरी बार प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में हुआ है। इस प्रक्रिया के लिए लगभग 12 लाख 62 हजार बूथ लेवल ऑफिसर्स लगाए गए और इनमें सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल थे। कांग्रेस पार्टी भी इस प्रक्रिया में शामिल थी। इन सभी ने घर-घर जाकर 96 करोड़ लोगों के मतदाता पहचान पत्र बनाए। वर्ष 2010 में एक चुनाव आयुक्त नियुक्त हुए थे। उन्होंने यह निर्णय लिया था कि अब चुनाव रिटर्निंग ऑफिसर को वोट काटने का अधिकार नहीं होगा। इसके कारण वर्ष 2010 से किसी भी वोट को नहीं काटा गया। यहां तक कि जिन लोगों का निधन हो चुका था, उनके नाम भी मतदाता सूची से नहीं हटाए गए।

वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि जिन 13 करोड़ वोटों के कटने की बात कही जा रही है, इनमें 3 करोड़ ऐसे लोग थे, जो अपने निर्धारित स्थान पर नहीं मिले। इन्हें एब्सेंटी कहा जाता है। इसके अलावा, 6 करोड़ 30 लाख ऐसे लोग थे, जिन्होंने अपना निवास स्थान बदल लिया था। उदाहरण के तौर पर, कुछ लोग दुर्ग से रायपुर और रायपुर से बेमेतरा चले गए थे। ऐसे लोगों के पुराने स्थान से वोट हटाए गए। लगभग 1 करोड़ डुप्लीकेट वोट थे, यानी जिनका नाम दुर्ग के साथ-साथ उनके गांव की मतदाता सूची में भी दर्ज था। ऐसे लोगों को एक ही स्थान पर अपना वोट रखने के लिए कहा गया। इसके अलावा, 2 करोड़ 80 लाख ऐसे वोट थे, जिनके मतदाताओं का निधन हो चुका था। इस तरह ये सभी श्रेणियां मिलकर कुल वोटों की संख्या बनाती हैं। इस पूरी प्रक्रिया पर अभी काम चल रहा है। यदि किसी व्यक्ति का वोट गलत तरीके से कट गया है, तो वह फॉर्म भरकर अपना दावा प्रस्तुत कर सकता है। यदि उसका वोट सही पाया जाता है, तो उसे फिर से मतदान करने का अधिकार मिल जाएगा। पिछली बार वर्ष 2003-04 में एसआईआर हुआ था। आज जो युवा 18 वर्ष का हो चुका है और अपना वोट बनवाने जाएगा, तो उससे यह पूछा जाएगा कि वर्ष 2002-03 में उसके माता-पिता का वोट कहां दर्ज था? कुछ लोगों को इसी बात पर आपत्ति है। इसका कारण यह है कि वे भारतीय नागरिकों के वोट के आधार पर सरकार नहीं चलाना चाहते, बल्कि घुसपैठियों के सहारे अपनी सरकार चलाना चाहते हैं। यही पूरा विवाद है और यही समस्या है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश की सीमा से लगे नौ जिले हैं, जहां मतदाताओं की संख्या में 70 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत से भी अधिक की वृद्धि हुई है। उत्तर दिनाजपुर में मतदाताओं की संख्या 105 प्रतिशत बढ़ गई। इसी तरह मालदा में मतदाताओं की संख्या 94 प्रतिशत बढ़कर लगभग दोगुनी हो गई। मुर्शिदाबाद में 87 प्रतिशत, दक्षिण 24 परगना में 83 प्रतिशत और जलपाईगुड़ी में 83 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इन लोगों के आधार कार्ड की जांच करने पर पता चला कि उनके आधार कार्ड मुर्शिदाबाद में बने हैं। वहां तो जैसे गेटवे ऑफ इंडिया बन गया है, जहां से देश में कहीं भी आने-जाने का रास्ता मिल गया है। सीमा से सटे इन नौ जिलों में मतदाताओं की संख्या में 100 प्रतिशत तक वृद्धि कैसे हो गई? इन लोगों को पीड़ा इस बात की है कि ममता बनर्जी का 'होबे ना, होबे ना' का दावा पूरा नहीं हुआ। इसी कारण उन्हें परेशानी हो रही है, क्योंकि वे घुसपैठियों के सहारे सरकार चलाते थे और एसआईआर के माध्यम से ऐसे नामों की जांच और सफाई हुई है। बिहार के पूर्णिया और कटिहार जैसे जिलों में भी मतदाता सूची में बदलाव हुआ।

नड्डा ने कहा कि बिहार में पहले कुल 7 करोड़ 89 लाख मतदाता थे, जो घटकर 7 करोड़ 42 लाख रह गए। इसके बाद हुए चुनाव में 66.9 प्रतिशत मतदान हुआ। यह पहली बार हुआ कि मतदाताओं की संख्या घटने के बावजूद मतदान करने वालों की संख्या बढ़ गई। जब मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, तो परिणाम सामने आया कि बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से 202 सीटें एनडीए को मिलीं। यही प्रजातंत्र की ताकत है। प्रधानमंत्री मोदी का स्पष्ट कहना है कि किसी भी विदेशी या गलत व्यक्ति को भारत में मतदान करने का अधिकार नहीं है। भारत धर्मशाला नहीं है कि कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से यहां आकर रहने लगे और अपना वोट बनवा ले। यदि हमें देश को आगे बढ़ाना है, तो एसआईआर को पूरा समर्थन देना होगा। प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं कि घुसपैठियों को डिटेक्ट करो, डिलीट करो और डिपोर्ट करो। वहीं, विपक्ष का कहना है कि वोट को नॉर्मलाइज करो, विदेशी को भी अपना बना लो, उसे रिकॉग्नाइज करो और फॉर्मलाइज कर दो। यानी वोट और आधार कार्ड के माध्यम से उन्हें आगे बढ़ा दो। यह देशभक्तों और देश विरोधी ताकतों के बीच की लड़ाई है। एक तरफ वे लोग हैं, जो राष्ट्रभक्त हैं और देश की चिंता करते हैं, तो दूसरी तरफ वे लोग हैं, जो घुसपैठियों के सहारे इस देश को चलाना चाहते हैं।

वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि राहुल गांधी कॉलेज के दिनों में अपनाए जाने वाले हिट एंड रन के तरीके से राजनीति कर रहे हैं। वे आरोप लगाकर भाग जाते हैं। राहुल गांधी ने कर्नाटक के महादेवपुरा में एक लाख गलत वोट होने का आरोप लगाया था। इस आरोप को लगाए 477 दिन हो चुके हैं। हम लगातार उनसे चुनाव आयोग में एफिडेविट दाखिल करने को कह रहे हैं, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए, लेकिन वे ऐसा करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इसके बजाय राहुल गांधी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग करते हैं। राहुल गांधी ने महाराष्ट्र में भी आरोप लगाए थे। हमने उनसे एफिडेविट दाखिल करने को कहा, लेकिन आठ दिन बीत जाने के बाद भी उन्होंने एफिडेविट दाखिल नहीं किया। इसी तरह, हरियाणा में भी राहुल गांधी ने आरोप लगाए। हमने उनसे एफिडेविट दाखिल करके यह बताने को कहा कि कौन-सा वोट गलत है, लेकिन उन्होंने एफिडेविट दाखिल नहीं किया और सुप्रीम कोर्ट में जुलूस लेकर पहुंच गए। यह कांग्रेस के प्रजातंत्र की स्थिति है। कांग्रेस पहले संवैधानिक संस्थाओं पर अनर्गल आरोप लगाती है, उन्हें डराती है और महाभियोग की बात करके देश में अराजकता फैलाने का प्रयास करती है। कांग्रेस न्यायालय और चुनाव आयोग के अधिकारों को स्वीकार नहीं करती, लेकिन इसके बावजूद लोकतंत्र की रक्षा करने की दुहाई देती है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इंदिरा गांधी और कांग्रेस पार्टी ने धारा 356 के तहत चुनी हुई सरकारों को 100 बार गिराया, जिनमें से 50 बार इंदिरा गांधी ने सरकारें गिराईं। इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश जगमोहन लाल सिन्हा ने रायबरेली मामले में इंदिरा गांधी को दोषी पाया था और छह साल तक चुनाव लड़ने से रोक दिया था। इसके बाद उन्होंने कानून ही बदल दिया। इंदिरा गांधी ने कहा था कि हमें कमिटेड (समर्पित) जुडिशरी चाहिए। जब सीएजी ने 2जी घोटाले पर सवाल उठाए, तो कांग्रेस ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को डराने-धमकाने का प्रयास किया। क्या यही लोकतंत्र और न्यायिक फैसलों का सम्मान था? पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने योजना आयोग के बारे में कहा था, 'दिस इज ए बंच ऑफ जोकर्स,' जबकि उस समय योजना आयोग के अध्यक्ष डॉ. मनमोहन सिंह थे, जो बाद में 10 साल तक भारत के प्रधानमंत्री रहे। राहुल गांधी ने डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार के अध्यादेश को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूरी दुनिया के सामने फाड़ दिया था। संसद में पारित कानून और संसद की गरिमा को तार-तार करने वाले लोग आज लोकतंत्र की दुहाई दे रहे हैं।

नड्डा ने कहा कि 2023 तक चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का अधिकार केंद्र सरकार के पास था। वर्ष 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने इसमें बदलाव की आवश्यकता जताई। वर्षों तक कांग्रेस पार्टी अपनी पसंद के चुनाव आयुक्त नियुक्त करती रही। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 2023-24 में नेता प्रतिपक्ष को भी चयन समिति में शामिल किया गया और उन्हें इसका सदस्य बनाया गया। हम कांग्रेस के कुछ पुराने मामलों को भी सामने रखते हैं। टी.एन. शेषन मुख्य चुनाव आयुक्त थे। कांग्रेस पार्टी ने उन्हें गांधीनगर से श्री लालकृष्ण आडवाणी जी के खिलाफ अपने टिकट पर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया। एम.एस. गिल चुनाव आयुक्त थे, जिन्हें राज्यसभा में लाकर भारत का खेल मंत्री बनाया गया। नवीन चावला चुनाव आयुक्त थे, जिन्हें राजस्थान में अशोक गहलोत ने एक शिक्षा ट्रस्ट के नाम पर छह एकड़ जमीन दी। सुकुमार सेन चुनाव आयुक्त थे, जिन्हें वर्धमान विश्वविद्यालय का कुलपति बनाया गया। के.के. सुंदरम को गृह मंत्री का सलाहकार बनाया गया। नागेंद्र सिंह को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत का प्रतिनिधि बनाया गया। आर.के. त्रिवेदी को गुजरात का राज्यपाल और वी. रमा देवी को कर्नाटक तथा हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया। कांग्रेस चुनाव आयोग को लुभाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाती थी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी वोट चोरी का आरोप लगाती है, जबकि कर्नाटक में उसकी अपनी सरकार है। परसों आए नतीजों ने बता दिया कि चार सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली। आने वाले समय में कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश, दोनों राज्यों में कांग्रेस की सरकार जाएगी। ये कांग्रेस की अपनी करतूतें हैं। कांग्रेस इस बात पर ध्यान नहीं देती कि आखिर जनता उसे क्यों नकार रही है। कांग्रेस वोट चोरी की बात करती है, जबकि तमिलनाडु में पिछले 58 साल से, पश्चिम बंगाल में 48 साल से, गुजरात में 35 साल से, बिहार में 35 साल से और उत्तर प्रदेश में 35 साल से उसकी सरकार नहीं बनी है। झारखंड के गठन के बाद से कांग्रेस अपने दम पर कभी सरकार में नहीं रही। ओडिशा में 25 साल से और दिल्ली में पिछले 12 साल से कांग्रेस सत्ता से बाहर है। दूसरी तरफ एनडीए लगातार जनता का समर्थन हासिल कर रहा है। एनडीए तीसरी बार हरियाणा में सरकार बना रहा है। उत्तर प्रदेश में लगातार दो बार, उत्तराखंड में लगातार दूसरी बार, असम में तीसरी बार और त्रिपुरा में दूसरी बार सरकार बनाई है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी जिस तरह दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, उससे जनता का विश्वास जीतने का प्रयास कर रहे हैं। जनता का दिल जीतना पड़ता है, वोट चोरी की साजिशें नहीं रचनी पड़तीं। कांग्रेस पार्टी जिन राज्यों में सत्ता में है, वहां उसका खराब शासन ही उसकी समस्याओं का कारण है।

नड्डा ने कहा कि जो लोग रिजीम चेंज की बात करते हैं, उन्हें समझना चाहिए कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन वोट के माध्यम से होता है, सड़कों पर आंदोलन करके नहीं। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को जनता का दिल जीतना और उनके बीच जाकर उनसे जुड़ना सीखना चाहिए। लोगों के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश करने के बजाय उन्हें जनता का विश्वास हासिल करना चाहिए। भारत की जनता बहुत परिपक्व है। वह जानती है कि देश आज सुरक्षित है और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है। विपक्ष के हारे हुए और थके हुए नेता, जिन्हें जनता ने अस्वीकार कर घर बैठा दिया है, इस तरह के कुत्सित प्रयासों के माध्यम से अपनी साजिशों को सफल बनाना चाहते हैं। हमें उनके इन प्रयासों को सफल नहीं होने देना है। इसलिए गांवों, चौपालों, इलाकों और मोहल्लों में उन सभी बातों पर चर्चा करें, जिन्हें उन्होंने तथ्यों और तर्कों के साथ आपके सामने रखा है। यदि विपक्ष में इतनी ताकत है, तो वह चुनाव आयोग के सामने जाकर बताए कि कौन-सा वोट चोरी हुआ है। चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है। पत्थर मारकर भागने जैसा व्यवहार करने के बजाय जिम्मेदारी से अपनी बात रखनी चाहिए। विपक्ष के इस गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार को खारिज करना और उसका पर्दाफाश करना आवश्यक है।


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