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जंतर-मंतर पर तनाव, सुरक्षा कड़ी, दीपके का दावा- इंटरनेट बंद

राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर इलाके में बुधवार रात प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प की खबर है। रात करीब 8:30 बजे कनॉट प्लेस के टॉलस्टॉय मार्ग पर कुछ उपद्रवियों ने पुलिस पर पत्थर और बोतलें फेंकी

जंतर-मंतर पर तनाव, सुरक्षा कड़ी, दीपके का दावा- इंटरनेट बंद
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जंतर-मंतर पर फिर तनाव, पुलिस-प्रदर्शनकारी भिड़े

  • सीआरपीएफ की 20 कंपनियां दिल्ली भेजी गईं
  • शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी
  • सोनम वांगचुक ने शांति बनाए रखने की अपील की

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर इलाके में बुधवार रात प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प की खबर है। रात करीब 8:30 बजे कनॉट प्लेस के टॉलस्टॉय मार्ग पर कुछ उपद्रवियों ने पुलिस पर पत्थर और बोतलें फेंकी। इस दौरान एसीपी विवेक भगत घायल हो गए। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। लगभग 15 मिनट तक स्थिति तनावपूर्ण रही, जिसके बाद हालात सामान्य किए गए।

जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है। इससे पहले 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान भी इसी तरह की झड़प हुई थी, जिसमें लाठीचार्ज करना पड़ा था।

इंटरनेट बंद होने का दावा

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया है कि जंतर-मंतर पर इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा— “Govt planning another brutal crackdown?” उनका यह संदेश तेजी से वायरल हो रहा है। इंटरनेट बंद होने और पुलिस की भारी तैनाती से प्रदर्शनकारियों में नाराज़गी बढ़ी है।

अतिरिक्त बल की तैनाती

केंद्र सरकार ने हालात को देखते हुए पश्चिम बंगाल से सीआरपीएफ की 20 अतिरिक्त कंपनियां दिल्ली भेजी हैं। गृह मंत्रालय के आदेश पर करीब 2000 जवानों को कोलकाता से एयरलिफ्ट कर राजधानी लाया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संभावित अशांति को रोकने के लिए उठाया गया है।

आंदोलन की मांगें

जंतर-मंतर पर सीजेपी का प्रदर्शन जारी है। हजारों समर्थक नारेबाजी कर रहे हैं। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने बताया कि सोनम वांगचुक ने भी प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की है। दास ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल द्वारा भेजे गए असामाजिक तत्व अक्सर आंदोलन को बिगाड़ने की कोशिश करते हैं और बाद में शांतिप्रिय प्रदर्शनकारियों पर ही दोष मढ़ा जाता है।


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