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तारिक अनवर ने नीट पेपर लीक पर सरकार की कार्रवाई को दिखावा बताया, आरएसएस पर उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने मंगलवार को विभिन्न मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए

तारिक अनवर ने नीट पेपर लीक पर सरकार की कार्रवाई को दिखावा बताया, आरएसएस पर उठाए सवाल
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नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने मंगलवार को विभिन्न मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं, राहुल गांधी की भूमिका, आरएसएस के स्वरूप और मदरसों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के रुख पर अपनी बात रखी।

नीट परीक्षा के लिए टेलीग्राम पर बैन लगाने के फैसले का समर्थन करते हुए तारिक अनवर ने कहा कि यह बिल्कुल सही है और मेरा मानना है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर ध्यान दिया है। यह जरूरी था और सुप्रीम कोर्ट अपनी देखरेख में पूरी व्यवस्था में बदलाव लाने की कोशिश करेगा। हमें यही उम्मीद है।

वहीं,नीट की दोबारा परीक्षा को लेकर सरकार की तैयारियों पर उन्होंने सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि हमें इन सब चीजों से कोई फायदा नहीं दिखता। जिस तरह से नीट के सवाल लीक हुए हैं और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है, उसके बाद सरकार जो सावधानी बरत रही है, वह सिर्फ दिखावा और मामले को दबाने की कोशिश लगती है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। सरकार से लोगों का भरोसा उठता जा रहा है, खासकर छात्रों का। कई जगह छात्र रैलियां कर रहे हैं और राहुल गांधी वहां जा रहे हैं। छात्रों के भीतर जो गुस्सा और नाराजगी है, वह और बढ़ेगी।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लेकर डीएमके नेताओं के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि डीएमके के लोग क्या कहते हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। हर कोई जानता है कि राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं। वह देश की सबसे बड़ी, सबसे पुरानी और ऐतिहासिक पार्टी के नेता हैं और पूरा हिंदुस्तान उन्हें चाहता है और मानता है। आज अगर कोई व्यक्ति है जो मोदी के सामने आंख मिलाकर बात कर सकता है, तो वह राहुल गांधी हैं।

कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे द्वारा आरएसएस के अस्तित्व और उसकी कार्यप्रणाली पर उठाए गए सवालों का समर्थन करते हुए तारिक अनवर ने कहा कि आरएसएस शायद दुनिया का एकमात्र ऐसा संगठन है जो खुद को एनजीओ और गैर-राजनीतिक बताता है, फिर भी हर समय राजनीतिक गतिविधियों में शामिल रहता है। पिछले 100 वर्षों में उसके पास कहां से पैसा आया और कितना खर्च हुआ, उसका कोई स्पष्ट हिसाब-किताब सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। चूंकि वह पंजीकृत नहीं है, इसलिए सरकार भी उसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती। प्रियंक खड़गे ने इसी मुद्दे को उठाया है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मदरसों को लेकर दिए गए बयानों पर भी कांग्रेस सांसद ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि योगी बेवजह मदरसों को निशाना बना रहे हैं। मदरसे उन बच्चों के लिए हैं जिनकी सरकारी स्कूलों तक पहुंच नहीं है। वहां उन्हें कुछ न कुछ शिक्षा मिल जाती है और वे पढ़ना-लिखना सीख जाते हैं। अगर सरकार के पास क्षमता है तो हर जगह स्कूल खोलने चाहिए। सभी लोग चाहते हैं कि उनके बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ें, लेकिन स्कूलों की कमी के कारण लोग अपने बच्चों को मदरसों में भेजने को मजबूर होते हैं।


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