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'वंदे मातरम' पर घमासान तेज, भाजपा और कांग्रेस नेता आमने-सामने

'वंदे मातरम' को लेकर जारी सियासी विवाद अब और तेज हो गया है। मुंबई में भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के अपमान और तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया

वंदे मातरम पर घमासान तेज, भाजपा और कांग्रेस नेता आमने-सामने
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नई दिल्ली। 'वंदे मातरम' को लेकर जारी सियासी विवाद अब और तेज हो गया है। मुंबई में भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के अपमान और तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया, वहीं हिमाचल प्रदेश विधानसभा के स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने भाजपा पर सदन में राष्ट्रगान के दौरान ही नारेबाजी करने का आरोप लगाते हुए पलटवार किया। तो महाराष्ट्र के पुणे में कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंढे ने भी भाजपा नेता किरीट सोमैया के आरोपों पर जवाब देते हुए भाजपा और हिंदू महासभा के ऐतिहासिक राजनीतिक रुख पर सवाल उठाए।

भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने कांग्रेस कार्यसमिति के 'वंदे मातरम' को लेकर लिए गए फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एक कांग्रेस कार्यक्रम में राष्ट्रगीत के दौरान कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की ओर से 'वंदे मातरम' को बीच में रोकने की कोशिश की गई। इसके बाद कांग्रेस ने अपने कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' के केवल दो पद गाने का प्रस्ताव पारित किया।

भाजपा विधायक ने कांग्रेस के इस फैसले को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि जब संसद ने 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगीत के तौर पर स्वीकार किया है और पूरे गीत को गाने की अनुमति दी गई है, तो कांग्रेस को इस पर आपत्ति क्यों है। उपाध्याय ने 1937 के राजनीतिक घटनाक्रम का हवाला देते हुए कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उस समय मुस्लिम लीग की आपत्तियों के बाद कांग्रेस ने 'वंदे मातरम' से दूरी बनाई थी।

भाजपा विधायक ने इसी ऐतिहासिक संदर्भ को भारत के विभाजन और पाकिस्तान के गठन से जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि अगर आज कांग्रेस 'वंदे मातरम' के पूरे स्वरूप को लेकर आपत्ति कर रही है तो क्या कांग्रेस अब मुस्लिम लीग का विकल्प बन गई है? उन्होंने कांग्रेस से राष्ट्रगीत के सम्मान और उसके पूरे स्वरूप को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने ‘वंदे मातरम’ विवाद को लेकर भाजपा पर पलटवार किया। पठानिया ने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही की शुरुआत राष्ट्रगान से होती है, जबकि 'वंदे मातरम' सदन में अंत में गाया जाता है। उन्होंने दावा किया कि जिस दिन विवाद हुआ, उस दिन सदन की शुरुआत राष्ट्रगान से हुई थी। राष्ट्रगान शुरू होते ही भाजपा के सदस्यों ने अपनी सीटों पर बैठने के बजाय नारेबाजी शुरू कर दी।

उन्होंने कहा कि ऐसे में यह सवाल भाजपा से पूछा जाना चाहिए कि राष्ट्रगान के सम्मान का उल्लंघन किसकी ओर से हुआ। पठानिया ने कहा कि पूरे घटनाक्रम को देखकर जनता खुद तय कर सकती है कि अपमान किसका हुआ।

कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंढे ने भाजपा नेता किरीट सोमैया के 'वंदे मातरम' और दो-राष्ट्र के सवालों पर पलटवार किया। उन्होंने भाजपा पर ही टुकड़े-टुकड़े गैंग होने का आरोप लगाया। लोंढे ने हिंदू महासभा, श्यामा प्रसाद मुखर्जी और विनायक दामोदर सावरकर से जुड़े ऐतिहासिक राजनीतिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए भाजपा पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कुछ राजनीतिक संगठनों और नेताओं ने मुस्लिम लीग के साथ अलग-अलग समय में राजनीतिक सरकारों में भागीदारी की थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल, पंजाब और सिंध में उस दौर में मुस्लिम लीग के साथ राजनीतिक सहयोग किया गया था। लोंढे ने सावरकर के 1937 में दिए गए कथित 'द्विराष्ट्र सिद्धांत' के संदर्भ का भी उल्लेख किया। भाजपा पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि इतिहास में विभाजन की राजनीति के आरोप कांग्रेस पर लगाने से पहले भाजपा को अपने वैचारिक इतिहास पर भी बात करनी चाहिए।

अतुल लोंढे ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और आचार्य कृपलानी जैसे नेताओं ने देश की एकता को प्राथमिकता दी थी। उन्होंने कहा कि 'वंदे मातरम' के दो छंदों को लेकर कांग्रेस के फैसले को इसी ऐतिहासिक संदर्भ में देखना चाहिए। इन नेताओं की प्राथमिकता देश को एकजुट रखना थी और इसलिए ‘वंदे मातरम’ के उन हिस्सों को प्राथमिकता दी गई जिन्हें व्यापक रूप से स्वीकार किया जा सके। लोंढे ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह हिंदू-मुस्लिम मुद्दे को बार-बार उठाकर समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश करती है।


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