Top
Begin typing your search above and press return to search.

मतदाता सूची से लाखों नाम हटाना लोकतंत्र के लिए खतरा

चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं

मतदाता सूची से लाखों नाम हटाना लोकतंत्र के लिए खतरा
X

अधीर रंजन चौधरी ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

  • एसआईआर प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई
  • पश्चिम बंगाल में 34 लाख मामले ट्रिब्यूनल में लंबित
  • कांग्रेस नेता ने स्वतंत्र जांच की मांग दोहराई

नई दिल्ली। चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया कि एसआईआर के तहत बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

उन्होंने मांग की कि एसआईआर के बाद जिन क्षेत्रों में चुनाव हो चुके हैं, वहां के चुनाव परिणामों की समीक्षा की जानी चाहिए।

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि लोकतंत्र के लिए इससे बड़ा खतरा क्या हो सकता है कि चुनाव आयोग पर ही मतदाता सूची में हेरफेर के आरोप लग रहे हों। लाखों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए और कुछ लोगों के नाम नए सिरे से जोड़े गए। इन घटनाओं के कारण पूरी चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

चौधरी ने एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट और कलकत्ता हाई कोर्ट में चल रही कानूनी लड़ाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों को ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश होना है, लेकिन पर्याप्त संख्या में ट्रिब्यूनल और न्यायिक अधिकारी उपलब्ध नहीं हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों में बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की बात सामने आई है, जबकि अब तक केवल सीमित संख्या में मामलों पर फैसला हुआ है।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि अकेले उनके जिले में सात लाख से अधिक मामले और पूरे पश्चिम बंगाल में 34 लाख से अधिक मामले ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित हैं, जबकि अब तक केवल 514 मामलों में फैसला हुआ है।

चौधरी ने राहुल गांधी द्वारा एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे को लेकर उठाए गए सवालों का भी हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के भीतर से सामने आए बयानों ने इस मुद्दे पर नई बहस को जन्म दिया है। यदि ईआरओ, डीईओ और सीईओ जैसे स्थानीय अधिकारियों के पास पर्याप्त अधिकार नहीं थे और निर्णयों पर केंद्रीय स्तर से नियंत्रण था, तो मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया की निष्पक्षता की जांच जरूरी है।

उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र और व्यापक जांच की मांग करते हुए कहा कि एसआईआर से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाना चाहिए, ताकि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का समाधान हो सके।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it