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राहुल गांधी ने खड़गे के खिलाफ टिप्पणी को लेकर असम के मुख्यमंत्री की आलोचना की

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर तीखा हमला बोला

राहुल गांधी ने खड़गे के खिलाफ टिप्पणी को लेकर असम के मुख्यमंत्री की आलोचना की
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नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सरमा पर कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ कथित तौर पर की गई टिप्पणियों को लेकर निशाना साधा और उनके द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा को अपमानजनक, शर्मनाक और अस्वीकार्य करार दिया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में राहुल गांधी ने लिखा, "असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के विरुद्ध इस्तेमाल की गई अभद्र और घटिया भाषा पूरी तरह निंदनीय, शर्मनाक और अस्वीकार्य है।"

उन्होंने कहा कि खरगे देश के एक वरिष्ठ और लोकप्रिय दलित और जननेता हैं - उनका अनुभव, कद और प्रतिष्ठा अतुलनीय है। उनका अपमान किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि इस देश के एससी-एसटी समाज के करोड़ों लोगों का भी अपमान है। लेकिन यह कोई नई बात नहीं है, यह भाजपा-आरएसएस की पुरानी और सुनियोजित मानसिकता है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि बाबासाहेब अंबेडकर का अपमान हो, दलित नेताओं को नीचा दिखाना हो, या एससी-एसटी समाज के प्रतिनिधियों पर व्यक्तिगत हमले हों, भाजपा और आरएसएस का इतिहास गवाह है कि जब-जब कोई दलित नेता सच बोलता है, तब-तब ये उसे अपमानित करने पर उतर आते हैं। यही इनकी विचारधारा है, यही इनका असली चरित्र और चेहरा है।

इस मुद्दे पर चुप्पी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल करते हुए राहुल गांधी ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा सवाल है, क्या आप हिमंता सरमा की इस भाषा का समर्थन करते हैं? आपकी चुप्पी मजबूरी नहीं, सहमति है।"

राहुल गांधी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अगर देश के करोड़ों दलितों के सम्मान पर हमला होते देख मुँह न खोलें, वो न सिर्फ अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं, बल्कि उस अपमान के हिस्सेदार भी हैं।

कांग्रेस नेता की इन टिप्पणियों ने चुनावी मुकाबलों से पहले कांग्रेस और भाजपा के बीच चल रहे राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। दोनों ही पार्टियां नेतृत्व, विचारधारा और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगा रही हैं।


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