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सीजेआई पर संजय राउत की टिप्पणी से बढ़ा राजनीतिक विवाद, भाजपा ने किया पलटवार

नीट पेपर लीक मामले को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शन के बीच शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने बड़े पैमाने पर राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत का धन्यवाद किया है

सीजेआई पर संजय राउत की टिप्पणी से बढ़ा राजनीतिक विवाद, भाजपा ने किया पलटवार
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नई दिल्ली/मुंबई। नीट पेपर लीक मामले को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शन के बीच शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने बड़े पैमाने पर राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत का धन्यवाद किया है।

सांसद ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि देशभर में चल रहे जनआंदोलनों को नई ऊर्जा देने का श्रेय केवल एक व्यक्ति, माननीय जस्टिस सूर्यकांत जी को जाता है। उन्होंने लिखा कि मुख्य न्यायाधीश ने देश के सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों में नई जान फूंक दी है और इसी वजह से आज इतने बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं।

राउत का यह बयान राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच आया है, जहां पुलिस की पाबंदियों के बावजूद हजारों प्रदर्शनकारी 'संसद मार्च' के लिए इकट्ठा हुए थे। न्यायपालिका की भूमिका पर उनकी टिप्पणियों पर सभी राजनीतिक दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं, जिससे पेपर लीक विवाद को लेकर चल रही देशव्यापी बहस और तेज हो गई है।

इससे पहले, राउत ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की चल रही भूख हड़ताल के संदर्भ में केंद्र सरकार पर कड़ा हमला बोला था। उन्होंने प्रशासन पर 'युवाओं से डरने' और बल प्रयोग करके लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शनों को दबाने का आरोप लगाया था।

राउत ने प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई का जिक्र करते हुए जंतर-मंतर पर इकट्ठा हुए युवाओं से कहा कि सरकार ने शुरू में सोनम वांगचुक और अभिजीत दिपके जैसी प्रमुख आवाजों को मामूली रुकावट समझकर नजरअंदाज कर दिया था।

उन्होंने कहा कि सरकार को लगा था कि वे इन कार्यकर्ताओं को छोटे कीड़ों की तरह कुचल सकते हैं, लेकिन तथाकथित 'कॉकरोच' मजबूती से डटे रहे और देश भर के लोग उनके समर्थन में आगे आए।

राउत ने शांतिपूर्ण रैलियों की अनुमति न देने के सरकार के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि एक सच्ची लोकतांत्रिक सरकार प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत करती, न कि उनके मार्च पर रोक लगाती या पुलिस के दबाव में सोनम वांगचुक जैसे कार्यकर्ताओं को जबरदस्ती अस्पताल में भर्ती कराती।

उन्होंने कहा कि सरकार को युवाओं की शिकायतों पर सीधे ध्यान देना चाहिए था और युवा पीढ़ी को संतुष्ट करने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना चाहिए था।

इस बीच, जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की विपक्ष की मांगों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने आयोजकों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि 'कॉकरोच' विरोध प्रदर्शन असल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को बदनाम करने के लिए रचा गया एक राजनीतिक नाटक था।

बावनकुले ने कहा कि चल रहा विरोध प्रदर्शन पूरी तरह से नाटक है, जिसमें कुछ युवा निराशा के कारण शामिल हो रहे हैं। उन्होंने पूछा कि क्या उन्होंने या शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने परीक्षा का पेपर लीक किया था। उन्होंने कहा कि सुधार के लिए रचनात्मक सुझावों का स्वागत है, लेकिन मंत्री के इस्तीफे की मांग पूरी तरह से राजनीतिक मकसद से प्रेरित है।


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