PM मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर विवाद, CJP ने कहा- युवाओं को उम्मीद दें, ऐसे लेबल नहीं
CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश के प्रमुख कॉलेजों में शामिल SRCC में पढ़ने वाले युवाओं को ‘दिमागी नक्सल’ कहना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, देश के शीर्ष नेतृत्व से युवाओं को उम्मीद, अवसर और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मिलने चाहिए।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) में दिए भाषण को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में 15 अगस्त को लाल किले से दिए भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का फिर जिक्र किया। उनके इस बयान पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने आपत्ति जताते हुए कहा कि देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में प्रधानमंत्री को युवाओं से जुड़े वास्तविक सवालों पर चर्चा करनी चाहिए थी। CJP का कहना है कि कॉलेज के मंच का इस्तेमाल शिक्षा, रोजगार, छात्र कल्याण और शिक्षकों से जुड़े मुद्दों पर संवाद के लिए किया जाना चाहिए था। संगठन ने प्रधानमंत्री के बयान को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि सवाल पूछने वाली युवा पीढ़ी को किसी विशेष राजनीतिक लेबल से संबोधित करना उचित नहीं है।
CJP ने प्रधानमंत्री पर क्या सवाल उठाए?
CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश के प्रमुख कॉलेजों में शामिल SRCC में पढ़ने वाले युवाओं को ‘दिमागी नक्सल’ कहना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, देश के शीर्ष नेतृत्व से युवाओं को उम्मीद, अवसर और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मिलने चाहिए। दास ने कहा कि शिक्षक दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में शिक्षकों और छात्रों की समस्याओं पर बात ज्यादा महत्वपूर्ण होती। उन्होंने प्रधानमंत्री से शिक्षा व्यवस्था और कैंपस से जुड़े व्यावहारिक सवालों पर चर्चा करने की अपेक्षा जताई।
शिक्षकों और छात्रों के मुद्दे उठाने की मांग
CJP ने कहा कि SRCC के शिक्षकों से जुड़े मेडिकल और चाइल्डकेयर लीव जैसे मुद्दों के साथ कॉलेज के बुनियादी ढांचे की स्थिति पर भी चर्चा होनी चाहिए थी। संगठन ने छात्रों के बीच बढ़ते प्रतिस्पर्धी दबाव और उनके भविष्य से जुड़े रोजगार के सवालों को भी महत्वपूर्ण बताया। CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने कहा कि SRCC जैसे संस्थान में प्रधानमंत्री का संबोधन युवाओं के सामने मौजूद चुनौतियों पर केंद्रित होना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मुद्दों के बजाय भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ जैसे राजनीतिक रूप से विवादित शब्द को प्रमुखता मिली।
पीएम मोदी ने ‘होम्योपैथिक गोली’ का क्यों किया जिक्र?
SRCC के शताब्दी समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण का संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त को लाल किले से उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया था। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में इसे ‘होम्योपैथिक गोली’ बताते हुए कहा कि इसके बाद उन विचारों का समर्थन करने वाले लोग सामने आने लगे, जिनकी ओर वह इशारा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इससे जनता को ऐसे लोगों का ‘असली रंग’ देखने का मौका मिला।
2013 के SRCC दौरे को भी किया याद
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में वर्ष 2013 के SRCC दौरे का भी उल्लेख किया। उन्होंने उस समय की आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों की तुलना वर्तमान स्थिति से की। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ से निकलकर ‘पॉलिसी डायनेमिज्म’ की दिशा में आगे बढ़ने का काम किया है। उन्होंने अपने भाषण में महंगाई, भ्रष्टाचार और विकास दर जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया और कहा कि आज के भारत की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पहले की तुलना में अधिक मजबूत है।
शांतनु गुप्ता ने आशुतोष रांका को दिया जवाब
वहीं, लेखक शांतनु गुप्ता ने आशुतोष रांका के पोस्ट पर पलटवार करते हुए लिखा '' आशुतोष रांका जी, क्या आपने सच में भाषण सुना — या आप बस "दिमागी नक्सल" वाली बात पर ही अटक गए? शायद 'चोर की दाढ़ी में तिनका' वाली बात है? PM मोदी ने SRCC में भविष्य के बारे में बात की, AI, ड्रोन, यूनिकॉर्न, इनोवेशन और ऐसी भारतीय कंपनियां बनाने के बारे में जो ग्लोबल लीडर बन सकें। अब इसकी तुलना CJP आंदोलन से कीजिए। जहां टेक्नोलॉजी के जरिए पेपर लीक रोकने का आपका रोडमैप कहां था? CBT के जरिए परीक्षाएं डिजिटल करने पर चर्चा कहां थी? JEE, NEET और CUET जैसे सुधारों को मानने की बात कहां थी, जिन्होंने छात्रों के लिए अलग-अलग एंट्रेंस एग्जाम के झंझट को कम किया? हमने सुना — "अल्लाह का नाम रह जाएगा।" हमने सुना — "नीता का पति, सीता का पति।" हमने मोदी के प्रति बेहिसाब नफरत सुनी।
बयान पर आगे भी जारी रह सकती है सियासत
प्रधानमंत्री के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर CJP की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। एक तरफ प्रधानमंत्री ने अपने बयान के जरिए वैचारिक विरोधियों पर निशाना साधा, वहीं CJP ने युवाओं और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने की मांग की है। SRCC जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में दिए गए इस भाषण के बाद अब बहस इस बात पर केंद्रित है कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के मंचों पर राजनीतिक विमर्श और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों के बीच संतुलन किस तरह बनाया जाए।


