पिनाराई विजयन का वंदे मातरम को राजनीतिक चश्मे से देखना देश का अपमान : विनोद बंसल
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के 'वंदे मातरम' पर दिए गए बयान की कड़ी आलोचना की है

नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के 'वंदे मातरम' पर दिए गए बयान की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में इस गीत की विरासत को आरएस के एजेंडे तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए और न ही इसे राजनीतिक चश्मे से देखा जाना चाहिए।
विनोद बंसल ने कहा, "पिनाराई विजयन कोई आम व्यक्ति नहीं हैं, वह राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। उन्हें यह भी पता है कि संसद के दोनों सदनों ने कानून बनाकर 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य कर दिया है। इसके बावजूद, पिनाराई विजयन अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए केरल के लोगों को 'वंदे मातरम' के खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रहे हैं और अपना राजनीतिक उल्लू सीधा कर रहे हैं।"
उन्होंने कहा कि विजयन को यह समझना चाहिए कि वंदे मातरम वह गीत है जिसने स्वाधीनता आंदोलन में असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों को अपना सर्वस्व न्योछावर करने के लिए प्रेरित किया। वीएचपी प्रवक्ता ने कहा, "वंदे मातरम के माध्यम से देश की सीमा पर खड़ा मेरा जवान, जो -40 से -50 डिग्री तापमान में अपनी जान को जोखिम में डालकर देश की सेवा करता है। लाखों सैनिक वंदे मातरम गाकर मां भारती के लिए अपना सबकुछ न्यौछावर कर देते हैं। ऐसे वंदे मातरम को नहीं गाने के लिए कहना और सरकार को प्रेरित करना और वो भी स्वाधीनता दिवस के ठीक पहले यह ठीक नहीं है।"
बंसल ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा, "15 अगस्त 1947 को प्रातः 6.30 बजे ऑल इंडिया रेडियो पर पूरा वंदे मातरम गाया गया था। देश की स्वाधीनता के उत्सव के दौरान भी वंदे मातरम पूरा नहीं गाया गया तो यही कहा जाएगा कि देश की स्वाधीनता के वीर जवानों का अपमान कर रहे हैं। आखिरकार यह सोच कहां से आती है? इसे आरएसएस का एजेंडा कहकर अपमान करना, सभी के सभी वीरों का अपमान है।"
वीएचपी प्रवक्ता ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "विजयन को अब इसकी प्रैक्टिस कर लेनी चाहिए। कुछ दिनों के बाद यह गाना उनके लिए अनिवार्य हो जाएगा। अगर दिनों बाद उन्होंने ऐसी कुछ हिमाकत की, तो वह स्वयं अपने लोगों के साथ जेल में होंगे। उन्हें अपने राजनीतिक एजेंडे को देश के ऊपर नहीं समझना चाहिए।"
उन्होंने आरोप लगाया, "केरल में कुछ राजनीतिक दल देशभक्ति के प्रतीकों को लेकर भ्रम फैला रहे हैं। वंदे मातरम किसी दल या संगठन का नारा नहीं है। यह 130 करोड़ भारतीयों की भावना है। इसे बांटने की कोशिश देश को कमजोर करने जैसी है।"


