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पंजाब के सरकारी स्कूलों में बदलाव को लेकर मनीष सिसोदिया का दावा, बोले- पुराने और नए आंकड़ों के साथ हो निष्पक्ष तुलना

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने पंजाब के सरकारी स्कूलों को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रतिक्रिया दी है

पंजाब के सरकारी स्कूलों में बदलाव को लेकर मनीष सिसोदिया का दावा, बोले- पुराने और नए आंकड़ों के साथ हो निष्पक्ष तुलना
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नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने पंजाब के सरकारी स्कूलों को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पंजाब की शिक्षा व्यवस्था का आकलन करते समय केवल वर्तमान तस्वीर देखने के बजाय वर्ष 2022 की स्थिति और आज के आंकड़ों की निष्पक्ष तुलना की जानी चाहिए। सिसोदिया ने पत्रकारों से अपील की कि वे पंजाब के सरकारी स्कूलों में पिछले करीब साढ़े चार वर्षों में हुए बदलाव को पूरी तस्वीर के साथ सामने रखें।

सिसोदिया के मुताबिक, वर्ष 2022 में भगवंत मान के मुख्यमंत्री बनने के समय पंजाब के बड़ी संख्या में सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। उन्होंने दावा किया कि उस समय कई स्कूलों में शौचालय नहीं थे, करीब चार लाख बच्चे फर्श पर बैठकर पढ़ने को मजबूर थे और हजारों स्कूलों में पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी।

उन्होंने दावा किया कि इसके बाद करीब 20 हजार सरकारी स्कूलों में बड़े स्तर पर सुधार कार्य किए गए। उनके अनुसार, इस अवधि में 9,000 से अधिक नए क्लासरूम और लैब बनाए गए, 13,920 नए शौचालयों का निर्माण हुआ तथा करीब दो लाख नए डेस्क उपलब्ध कराए गए। इसके अलावा 10 हजार से अधिक स्कूलों में इंटरैक्टिव पैनल लगाए गए हैं।

सिसोदिया ने बताया कि 5,012 स्कूलों में एडवांस कंप्यूटर लैब तैयार की गई हैं और सभी सरकारी स्कूलों को वाई-फाई से जोड़ने का दावा किया गया है। वहीं, करीब 99 प्रतिशत स्कूलों में बाउंड्री वॉल होने की बात भी उन्होंने कही। सिसोदिया ने प्राकृतिक आपदाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पंजाब में आई दो बड़ी बाढ़ों के कारण 7,000 से अधिक स्कूल प्रभावित हुए थे। इनमें गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त करीब 500 स्कूलों के पुनर्निर्माण और रेस्टोरेशन का काम अभी जारी है। शिक्षा के परिणामों को लेकर सिसोदिया ने कहा कि सरकारी स्कूलों में बदलाव का आकलन केवल नई इमारतों और सुविधाओं से नहीं किया जा सकता।

उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में 3.64 लाख बच्चे निजी स्कूलों से निकलकर पंजाब के सरकारी स्कूलों में दाखिल हुए हैं। उनके अनुसार, नीट क्वालिफाई करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 80 से बढ़कर 882 हो गई है। चार वर्षों में 2,166 विद्यार्थियों ने नीट और 786 विद्यार्थियों ने जेईई क्वालिफाई किया है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि 2.30 लाख बच्चों ने ‘बिजनेस ब्लास्टर्स’ कार्यक्रम के माध्यम से कारोबार और उद्यमिता से जुड़ी जानकारी हासिल की। सिसोदिया के मुताबिक, कक्षा एक से 12वीं तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की पढ़ाई शुरू करने वाला पंजाब देश का पहला राज्य बना है। इसके अलावा 40 स्किल एजुकेशन स्कूल शुरू किए गए हैं। सिसोदिया ने बीजेपी और कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पंजाब की शिक्षा व्यवस्था की तुलना राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर नहीं, बल्कि आंकड़ों और जमीनी स्थिति के आधार पर होनी चाहिए।

उन्होंने निष्पक्ष पत्रकारों से अपील की कि वे कांग्रेस और बीजेपी के 15-20 वर्षों के कार्यकाल तथा आम आदमी पार्टी सरकार के करीब साढ़े चार वर्षों के काम की ईमानदारी से तुलना करें। उन्होंने कहा कि पंजाब में शिक्षा के क्षेत्र में काम पूरा होने का दावा नहीं किया जा रहा है, लेकिन दशकों से चली आ रही समस्याओं में बदलाव की शुरुआत जरूर हुई है।

सिसोदिया ने कहा कि सरकारी स्कूल केवल बजट से बेहतर नहीं होते, बल्कि अभिभावकों का भरोसा और बच्चों के बेहतर परिणाम ही उनकी वास्तविक सफलता का पैमाना हैं। उनके अनुसार, भगवंत मान सरकार ने सरकारी स्कूलों के प्रति जनता का भरोसा वापस लाने की दिशा में काम किया है।


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