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कर्नाटक : सीएम शिवकुमार ने केंद्र को लिखा पत्र, गन्ना किसानों की पांच मांगों पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की

कर्नाटक में गन्ना किसानों के आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को पत्र लिखकर गन्ने की कीमत और चीनी-इथेनॉल नीति से जुड़ी पांच प्रमुख मांगों पर केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

कर्नाटक : सीएम शिवकुमार ने केंद्र को लिखा पत्र, गन्ना किसानों की पांच मांगों पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की
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नई दिल्ली। कर्नाटक में गन्ना किसानों के आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को पत्र लिखकर गन्ने की कीमत और चीनी-इथेनॉल नीति से जुड़ी पांच प्रमुख मांगों पर केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

मुख्यमंत्री ने 14 अक्टूबर 2026 को कृषि भवन में हुई बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि बैठक में राज्य की ओर से सहकारिता मंत्री लक्ष्मण सवदी, कृषि मंत्री नरेंद्र स्वामी और गन्ना मंत्री रुद्रप्पा लमानी ने हिस्सा लिया था। किसानों और राज्य सरकार ने मिलकर जो मांगें रखीं, वे सभी गन्ना मूल्य निर्धारण से जुड़ी हैं और गन्ना नियंत्रण आदेश 1966 और चीनी नियंत्रण आदेश 2025 के तहत केंद्र के अधिकार क्षेत्र में आती हैं।

किसानों की पांच प्रमुख मांगे हैं। पहला, स्वामीनाथन आयोग के सी2प्लस50 प्रतिशत फॉर्मूले पर गन्ना मूल्य तय हो। किसान 10.25 प्रतिशत रिकवरी पर मौजूदा 3650 रुपये प्रति टन एफआरपी के मुकाबले 5500 रुपए प्रति टन की मांग कर रहे हैं।

दूसरा, एफआरपी बेस रिकवरी को 9.5 प्रतिशत पर बहाल किया जाए। 8.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10.25 प्रतिशत करने से कम रिकवरी वाले क्षेत्रों के किसानों का बेस प्राइस घट गया है। राज्य ने 16 जनवरी 2026 को 9.5 प्रतिशत पर 4440 रुपए प्रति टन की सिफारिश की थी।

तीसरा, चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाया जाए। यह 14 फरवरी 2019 से 31 रुपए किलो पर स्थिर है, जबकि राज्य ने 9 अगस्त 2024 को 41.50 रुपए किलो की सिफारिश की थी।

चौथा, गन्ना आधारित डिस्टिलरी के लिए इथेनॉल आवंटन में कर्नाटक को उचित हिस्सा मिले। राज्य को ईएसवाई 2025-26 में सिर्फ 117 करोड़ लीटर मिला, जबकि क्षमता 225 करोड़ लीटर है। राज्य ने इथेनॉल के लिए 73, 67 और 61 रुपये प्रति लीटर की दर की सिफारिश की थी।

पांचवा, डॉ. रंगराजन राजस्व-साझाकरण फॉर्मूले में संशोधन हो ताकि इथेनॉल से होने वाली आय भी किसानों के साथ साझा हो।

मुख्यमंत्री ने पत्र में बताया कि राज्य ने किसानों का भरोसा जीतने के लिए कई कदम उठाए हैं। रिकवरी जांच के लिए कृषि वैज्ञानिकों की टीमें हर महीने दो बार किसान नेताओं की मौजूदगी में मिलों का निरीक्षण कर रही हैं; सभी मिलों को एनएबीएल मान्यता लेने को कहा गया है।

राज्य की औसत रिकवरी 2024-25 में 10.50 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 11.09 प्रतिशत हो गई है। तौल में पारदर्शिता के लिए 27 नवंबर 2023 की एसओपी के तहत सभी 81 मिलों में डिजिटल लोड सेल लगाए गए हैं, जिनकी हर 15 दिन में जांच होती है। 170 तालुकों में मुफ्त एपीएमसी तौल कांटे हैं और तौल में गड़बड़ी साबित करने पर 5 लाख रुपए इनाम का प्रावधान है।

शिवकुमार ने कहा कि एसएपी यानी राज्य परामर्शित मूल्य का मॉडल तमिलनाडु पैटर्न पर लागू करने से राज्य पर सालाना 4090 करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा, जो एफआरपी, एमएसपी और इथेनॉल नीति में सुधार का विकल्प नहीं है। 2025-26 के लिए 99.85 प्रतिशत गन्ना भुगतान हो चुका है और मिलों ने एफआरपी से 500-600 रुपए अधिक दिया है। राज्य ने अतिरिक्त 100 रुपए के लिए 290 करोड़ रुपए खुद दिए।

उन्होंने आग्रह किया कि मौजूदा सीजन के लिए चीनी के एमएसपी में संशोधन, 22 अक्टूबर 2026 के इथेनॉल निर्देश की फरवरी 2027 के फसल अनुमान के बाद समीक्षा और कटाई-परिवहन शुल्क के साथ और बिना एफआरपी की घोषणा की जाए, ताकि किसान आंदोलन खत्म कर पेराई शुरू हो सके।


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