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कंगना रनौत के बयान को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए : महुआ माजी

भाजपा सांसद कंगना रनौत के 'जेनजी' वाले बयान पर जेएमएम सांसद महुआ माजी ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कंगना रनौत की बातों को कोई गंभीरता से नहीं लेता है।

कंगना रनौत के बयान को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए : महुआ माजी
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नई दिल्ली। भाजपा सांसद कंगना रनौत के 'जेनजी' वाले बयान पर जेएमएम सांसद महुआ माजी ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कंगना रनौत की बातों को कोई गंभीरता से नहीं लेता है।

महुआ माजी का यह बयान उस वक्त आया है, जब कंगना रनौत ने परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ हाल ही में हुए प्रदर्शन के दौरान युवाओं द्वारा इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा पर सवाल उठाए और पूछा कि अगर भविष्य में इन युवाओं को कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की जरूरत पड़ी, तो क्या वे या उनके माता-पिता उसका खर्च उठा पाएंगे। ये लोग अपने माता-पिता पर बोझ बनेंगे।

महुआ माजी ने मजाकिए अंदाज में कहा कि लगता है कि वह न्यूटन गति नियमों के बारे में बयान दे रही हैं। उन्होंने हमेशा ऐसे बेतुके बयान दिए हैं, और लोग उनके बयानों को गंभीरता से नहीं लेते हैं।

आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर को लेकर सदन में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के बयान पर महुआ माजी ने कहा कि मुझे कामकोटी की विशेषज्ञता के बारे में जानकारी नहीं है। हालांकि, यह सच है कि कई संघ प्रचारकों को शैक्षणिक संस्थानों में अहम पदों पर नियुक्त किया गया है, और वे जरूरी बौद्धिक स्तर पर काम नहीं करते हैं। वे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इससे छात्रों के भविष्य पर संकट पैदा हो रहा है और भारतीय शिक्षण संस्थान तेजी से पिछड़ रहे हैं।

उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री कहते हैं कि पूरा देश देख रहा है और हम विश्व गुरु बन सकते हैं। हकीकत यह है कि हमारे यहां ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज या बर्कले जैसे विश्वविद्यालय नहीं हैं। विश्व गुरु बनने की बात तो बहुत दूर है।"

माजी ने कहा कि भारत में बड़ी संख्या में पढ़े-लिखे लोग हैं, जो विदेशों में रिसर्च और मेहनत कर रहे हैं, लेकिन देश में उनकी प्रतिभा का सम्मान नहीं हो रहा है। जहां शिक्षा और रिसर्च के लिए बजट बढ़ाया जाना चाहिए, वहां सरकार इसे सीमित कर रही है। खासकर सोशल साइंस में रिसर्च के लिए लगभग कोई फंडिंग नहीं है।

दिल्ली पुलिस और छात्रों के बीच हुई झड़प को लेकर उन्होंने कहा कि ऐसा हमने हिन्दुस्तान में नहीं देखा जो तानाशाही देश होते हैं, वहां इस तरह की हरकतें होती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलनों के दौरान उन पर आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया और यहां तक कि बिहार में एके-47 का इस्तेमाल हुआ, तस्वीरों में दिखाई दिया है।

महुआ माजी ने महाराष्ट्र में पेपर लीक के बाद एक परिवार द्वारा अपनी बेटी की मौत का गम मनाए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि उसी समय सरकार पूर्व शिक्षा मंत्री का स्वागत कर रही थी। इससे देश की बेटियों के बीच गलत संदेश गया है।


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