जंतर-मंतर पर CJP कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर सियासी घमासान, केजरीवाल, राहुल, स्टालिन समेत विपक्ष ने उठाए सवाल
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर दोनों कार्यकर्ताओं की न्यायिक हिरासत पर आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल किया कि क्या अपने ही देश में राष्ट्रीय ध्वज लहराना अपराध है? केजरीवाल ने इस कार्रवाई को बेतुका करार देते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिए जाने का मामला अब राजनीतिक विवाद में बदल गया है। दोनों कार्यकर्ताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद विपक्षी दलों के नेताओं ने कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन और शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने इस कार्रवाई की आलोचना की है। नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय ध्वज लहराने और शांतिपूर्ण विरोध करने के अधिकार को लेकर सवाल उठाए हैं।
केजरीवाल ने कार्रवाई को बताया बेतुका
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर दोनों कार्यकर्ताओं की न्यायिक हिरासत पर आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल किया कि क्या अपने ही देश में राष्ट्रीय ध्वज लहराना अपराध है? केजरीवाल ने इस कार्रवाई को बेतुका करार देते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उनकी प्रतिक्रिया के बाद मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अपनी बात रखने का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है। हालांकि, हिरासत में लिए जाने के पीछे पुलिस की ओर से बताए गए कारण और मामले में लगाए गए आरोपों की जानकारी भी निष्पक्ष आकलन के लिए महत्वपूर्ण होगी।
एमके स्टालिन ने कानूनी मदद देने की पेशकश की
तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने भी दोनों कार्यकर्ताओं को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल किया कि सरकार कितने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेगी और कितने युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश करेगी। स्टालिन ने कहा कि युवाओं को जेल भेजने से विरोध की आवाज खत्म नहीं होगी, बल्कि इससे आम लोग भी सड़कों पर उतरकर अपनी असहमति जाहिर कर सकते हैं। उन्होंने सौरव दास और आशुतोष रांका को आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की पेशकश भी की। उनके बयान को विपक्ष की ओर से दोनों कार्यकर्ताओं के समर्थन में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राहुल गांधी ने लोकतांत्रिक अधिकारों का उठाया मुद्दा
इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी दोनों कार्यकर्ताओं की न्यायिक हिरासत पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराना अपराध नहीं होना चाहिए। राहुल ने युवाओं को जेल भेजने की कार्रवाई को कायरता बताया। राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि छात्र, युवा, पत्रकार और विपक्षी दल अलग-अलग मंचों से अपनी बात रख सकते हैं, लेकिन वे अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं। उन्होंने जंतर-मंतर को देश के नागरिकों के विरोध और अपनी आवाज उठाने का स्थान बताते हुए कहा कि इसे जनता के लिए फिर से हासिल किया जाएगा।
आदित्य ठाकरे ने भी उठाए सवाल
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने भी सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि अपने ही देश में राष्ट्रीय ध्वज पकड़ने के लिए युवाओं को जेल क्यों भेजा जा रहा है। ठाकरे ने इसे सत्ता में बैठे लोगों और देशभक्त युवाओं के बीच संघर्ष के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को वापस हासिल करने की लड़ाई जारी रहेगी। उनके बयान से साफ है कि इस मामले को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार और प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।
सीजेपी ने कहा- कार्रवाई से नहीं डरेंगे कार्यकर्ता
सीजेपी सदस्य अजिंक्य शिंदे के मुताबिक, सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। इसके बाद दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। शिंदे ने कहा कि इस कार्रवाई से पार्टी के कार्यकर्ता पीछे हटने वाले नहीं हैं। फिलहाल, मामले ने राष्ट्रीय ध्वज के साथ प्रदर्शन, शांतिपूर्ण विरोध और संवैधानिक अधिकारों को लेकर बहस तेज कर दी है। एक ओर विपक्षी नेता कार्रवाई को अनुचित बता रहे हैं, वहीं मामले की पूरी तस्वीर सामने आने के लिए पुलिस का पक्ष, हिरासत के आधार और न्यायिक कार्यवाही से जुड़ी जानकारी भी जरूरी है।


