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राम मंदिर प्रकरण में पैसों की नहीं, बल्कि आस्था की हुई चोरी; पेपर लीक रोकने को सिस्टम में सुधार जरूरत: वेद प्रकाश

एनसीईआरटी के पूर्व अंडर सेक्रेटरी वेद प्रकाश ने शिक्षा व्यवस्था, राम मंदिर प्रकरण, पेपर लीक और प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरे समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी राय रखी है

राम मंदिर प्रकरण में पैसों की नहीं, बल्कि आस्था की हुई चोरी; पेपर लीक रोकने को सिस्टम में सुधार जरूरत: वेद प्रकाश
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नई दिल्ली। एनसीईआरटी के पूर्व अंडर सेक्रेटरी वेद प्रकाश ने शिक्षा व्यवस्था, राम मंदिर प्रकरण, पेपर लीक और प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरे समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी राय रखी है। उन्होंने पाठ्यक्रम सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और राष्ट्रीय मुद्दों पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत पर जोर दिया।

नए शिक्षा नीति के तहत एनसीईआरटी के सिलेबस में बदलाव पर वेद प्रकाश ने कहा, "नई शिक्षा नीति में तय किया गया था कि हम जो किताबें बनाएंगे, वे कॉम्पिटेंस बेस्ड होंगी। इस बार सोशल स्टडी की किताब में छह चैप्टर डालकर बहुत सी जानकारी देने की कोशिश की गई है। मुझे लगता है कि देश के संगठनों के बारे में बच्चों को बताना चाहिए, जिससे वे जागरूक हों। आजकल का बच्चा बहुत बुद्धिमान है, उसे कैसे उपयोग करना है, यह वह खुद समझ जाएगा।"

अयोध्या राम मंदिर में हुई चोरी पर वेद प्रकाश ने दुख जताते हुए कहा, "यह बहुत ही खराब हुआ, जो नहीं होना चाहिए था। यह आस्था का प्रश्न है, न कि पैसे का। यह आस्था की चोरी है। इस पर केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को मिलकर काम करना चाहिए। भविष्य में दोबारा ऐसा न हो, इसके लिए तैयारी करनी होगी। लगता है कि ट्रस्ट के काम में कहीं न कहीं कमी रह गई।"

देशभर में हो रहे पेपर लीक मामलों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि सिस्टम में कुछ सुधार की जरूरत है। मैंने भी अपने समय में परीक्षाएं आयोजित की थीं। 'नेशनल टैलेंट सर्च परीक्षा' में कभी पेपर लीक होने की खबर नहीं आई। हमें और ज्यादा सतर्क होने और सिस्टम को ठीक करने की जरूरत है। प्रशासन और पुलिस, दोनों को इसमें शामिल होना होगा। नहीं तो बच्चों का भविष्य खराब होता रहेगा।"

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे की सराहना करते हुए वेद प्रकाश ने कहा, "प्रधानमंत्री का विदेश दौरा बहुत अच्छी बात है। जब भी वे विदेश जाते हैं तो देश के लिए कुछ फायदेमंद चीजें लेकर आते हैं। इसमें कोई शक नहीं है। चाहे सम्मान मिले या बिजनेस डील हों, ट्रेड एग्रीमेंट हों – ये सभी देश के हित में होते हैं। ऐसे में इसके बारे में संशय करना उचित नहीं है।"


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