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एआई और बायोटेक्नोलॉजी से प्रेरित औद्योगिक क्रांति में भारत अहम भूमिका निभाएगा: डॉ. जितेंद्र सिंह

केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अगली औद्योगिक क्रांति में एक बड़ी ताकत बनने के लिए तैयार है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बायोटेक्नोलॉजी से संचालित होगी।

एआई और बायोटेक्नोलॉजी से प्रेरित औद्योगिक क्रांति में भारत अहम भूमिका निभाएगा: डॉ. जितेंद्र सिंह
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नई दिल्ली। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को कहा कि भारत अगली औद्योगिक क्रांति में एक बड़ी ताकत बनने के लिए तैयार है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बायोटेक्नोलॉजी से संचालित होगी।

उन्होंने कहा कि बॉयोई3 पॉलिसी, नेशनल क्वांटम मिशन और इंडियाएआई मिशन जैसी पहलों के जरिए देश ने उभरती हुई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में दुनिया के शुरुआती देशों में अपनी जगह बना ली है।

टेक्नोलॉजी डेवलपर्स, इंडस्ट्री लीडर्स और दूसरे स्टेकहोल्डर्स की मौजूदगी में एक मीडिया कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि भारत ने एक खास बायोटेक्नोलॉजी पॉलिसी, बॉयोई3 (इकोनॉमी, रोजगार और पर्यावरण के लिए बायोटेक्नोलॉजी) बनाने वाले शुरुआती देशों में से एक के तौर पर अपनी पहचान बनाई है, साथ ही नेशनल क्वांटम मिशन और इंडियाएआई मिशन जैसी पहल भी शुरू की हैं।

सिंह ने कहा, "अगली औद्योगिक क्रांति, जो बायोटेक्नोलॉजी और एआई पर आधारित होगी, उसमें भारत एक अहम भूमिका निभाएगा। पिछली इंडस्ट्रियल क्रांति आईटी पर आधारित थी और भारत उसमें देर से शामिल हुआ था।"

मंत्री ने कहा, "भारत अब दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास एक खास बायोटेक्नोलॉजी पॉलिसी है, यानी बॉयोई3।"

मंत्री ने कहा कि ग्लोबल इकोनॉमी धीरे-धीरे बायोटेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रीसाइक्लिंग और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे नए और अहम सेक्टर की ओर बढ़ रही है और भारत इस बदलाव में सबसे आगे रहने की तैयारी कर रहा है।

उन्होंने कहा कि पिछली इंडस्ट्रियल क्रांति मुख्य रूप से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी पर आधारित थी, जिसमें भारत ग्लोबल बदलाव में बाद के चरण में शामिल हुआ था, लेकिन अब देश इनोवेशन की अगली लहर को आकार देने वाले शुरुआती देशों में शामिल है।

भारत की तेजी से होती टेक्नोलॉजिकल तरक्की का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि देश की स्पेस इकोनॉमी, जो कभी बहुत छोटी थी, अब बढ़कर लगभग 9 अरब डॉलर की हो गई है और अगले आठ से नौ सालों में इसके 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

उन्होंने इस ग्रोथ का श्रेय पॉलिसी में किए गए सुधारों को दिया, खासकर 2020 में स्पेस सेक्टर को प्राइवेट भागीदारी के लिए खोलने के फैसले को।

सिंह ने कहा, "भारत की टेक्नोलॉजिकल यात्रा में बड़ा बदलाव आया है और देश अब कई क्षेत्रों में ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के मुताबिक काम कर रहा है।"


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