रामलीला मैदान रैली पर सियासी घमासान: जयराम रमेश बोले- भाजपा का दुष्प्रचार फेल, व्यापारियों को हुआ फायदा
कांग्रेस नेता ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि रैली से पहले बाजार बंद होने और व्यापारियों को नुकसान पहुंचने का जो माहौल बनाया गया, उसका उद्देश्य असली राजनीतिक मुद्दों से जनता का ध्यान हटाना था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा वोट चोरी और चुनाव आयोग की जवाबदेही जैसे सवालों पर चर्चा नहीं होने देना चाहती थी।

नई दिल्ली: दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA ब्लॉक की महारैली के बाद अब राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। रैली के कारण दिल्ली के व्यापारियों को हुए नुकसान को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोमवार को भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष की रैली को बदनाम करने के लिए राजधानी के बाजार बंद होने और कारोबारियों को भारी नुकसान पहुंचने का डर फैलाया गया था। उन्होंने दावा किया कि भाजपा का यह प्रचार पूरी तरह नाकाम रहा और दिल्ली आने वाले लोगों ने बाजारों में खरीदारी कर स्थानीय कारोबारियों को फायदा पहुंचाया। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि भाजपा का पूरा दुष्प्रचार पंक्चर हो गया है। उन्होंने तर्क दिया कि जब देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली पहुंचेंगे तो वे यहां खरीदारी भी करेंगे। इससे छोटे-बड़े सभी व्यापारियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा। उनके मुताबिक, दिल्ली के कारोबारियों ने लोकतांत्रिक विरोध और व्यापारिक गतिविधियों के बीच बेहतर संतुलन बनाया।
वोट चोरी के मुद्दे से ध्यान भटकाने का लगाया आरोप
कांग्रेस नेता ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि रैली से पहले बाजार बंद होने और व्यापारियों को नुकसान पहुंचने का जो माहौल बनाया गया, उसका उद्देश्य असली राजनीतिक मुद्दों से जनता का ध्यान हटाना था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा वोट चोरी और चुनाव आयोग की जवाबदेही जैसे सवालों पर चर्चा नहीं होने देना चाहती थी। इसके साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने और लोगों को महारैली में शामिल होने से रोकने की कोशिश की गई। रमेश ने कहा कि दिल्ली की जनता और देश के अलग-अलग राज्यों से आए लोगों ने भाजपा के इस कथित दुष्प्रचार का जवाब दिया। राहुल गांधी की अपील पर रैली में शामिल होने पहुंचे लोगों ने स्थानीय बाजारों में खरीदारी की। पुरानी दिल्ली के थोक बाजारों में दुकानें खुली रहीं और कारोबार भी हुआ। छोटे दुकानदारों के साथ रेहड़ी-पटरी लगाने वाले विक्रेताओं से भी लोगों ने सामान खरीदा।
अखबारों की रिपोर्ट का दिया हवाला
जयराम रमेश ने दावा किया कि मीडिया में प्रकाशित खबरें भी भाजपा के उस नैरेटिव को गलत साबित करती हैं, जिसमें रैली के कारण व्यापारियों को भारी नुकसान होने की बात कही गई थी। उन्होंने दिल्ली के व्यापारियों, दुकानदारों और आम नागरिकों का आभार जताते हुए कहा कि लोगों ने लोकतांत्रिक अधिकारों के समर्थन के साथ स्थानीय कारोबार को भी महत्व दिया। उन्होंने भाजपा और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की जनता पिछले 12 वर्षों से सरकार की कार्यशैली देख रही है और अब उसके दावों से भ्रमित होने वाली नहीं है। रमेश के मुताबिक, जनता अपने मताधिकार की रक्षा करने के साथ कारोबार भी चलाएगी और सरकार से जवाबदेही भी मांगेगी।
सीटीआई ने 11 हजार करोड़ रुपये तक के नुकसान का किया दावा
कांग्रेस के दावों के विपरीत चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने रैली के कारण दिल्ली के व्यापारिक क्षेत्र को भारी नुकसान होने की बात कही है। संगठन के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने रविवार को दावा किया था कि रामलीला मैदान में आयोजित रैली की वजह से दिल्ली के कारोबार को करीब 10 हजार से 11 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। गोयल के अनुसार, रैली स्थल के आसपास स्थित 20 से 25 बड़े बाजार प्रभावित हुए। इन बाजारों में लगभग तीन लाख दुकानें हैं, जिनमें से करीब 2.5 लाख दुकानें बंद रहीं। सीटीआई के इस दावे ने रैली के आर्थिक प्रभाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
राहुल गांधी ने भी भाजपा पर लगाए थे आरोप
रैली से पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी भाजपा पर दिल्ली के कनॉट प्लेस में दुकानदारों को जबरन दुकानें बंद करने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि INDIA ब्लॉक ने रैली में आने वाले लोगों से स्थानीय बाजारों का समर्थन करने और खरीदारी करने की अपील की थी, लेकिन दिल्ली पहुंचने पर कई जगह दुकानें बंद मिलीं।
अमित शाह ने त्योहारों के समय पर उठाए थे सवाल
इस विवाद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी विपक्ष पर निशाना साध चुके हैं। उन्होंने कहा था कि विपक्ष ने त्योहारों के सीजन से ठीक पहले रैली आयोजित कर व्यापारियों की परेशानियों को नजरअंदाज किया। शाह के मुताबिक, व्यापारियों ने विपक्षी नेताओं से दिवाली के बाद रैली आयोजित करने की अपील की थी। उन्होंने दावा किया था कि व्यापारियों ने तीन बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की, पत्र लिखे और रैली की तारीख बदलने का अनुरोध किया। शाह ने कहा था कि त्योहारों के दौरान मिठाइयों और पटाखों का कारोबार सबसे अधिक होता है। यदि इस अवधि में दुकानों पर बिक्री प्रभावित होती है तो कारोबारियों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। फिलहाल INDIA ब्लॉक की रैली को लेकर राजनीतिक विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। एक तरफ कांग्रेस इसे भाजपा के दुष्प्रचार की विफलता बता रही है, तो दूसरी तरफ सीटीआई के आंकड़े व्यापारिक नुकसान की ओर इशारा कर रहे हैं। ऐसे में रैली के वास्तविक आर्थिक प्रभाव और बाजारों में कारोबार की स्थिति को लेकर बहस जारी है।


