INDIA गठबंधन की महारैली में CJP गायब, कांग्रेस से दूरी या रणनीतिक फैसला?
CJP से जुड़े लोगों के मुताबिक, पार्टी को INDIA गठबंधन की महारैली में शामिल होने का निमंत्रण नहीं दिया गया था। पार्टी के कुछ नेता जरूर रैली का माहौल देखने रामलीला मैदान पहुंचे, लेकिन उन्हें मंच पर जगह नहीं मिली और न ही किसी नेता ने सार्वजनिक रूप से उनका परिचय कराया।

नई दिल्ली: पिछले महीने दिल्ली की सड़कों पर वोट चोरी के आरोपों को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन और खुद को जेन-जी की आवाज बताने वाली काकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता एक साथ नजर आए थे। उस समय दोनों पक्षों की नजदीकी को केंद्र सरकार के खिलाफ साझा राजनीतिक मोर्चे के तौर पर देखा गया। निषेधाज्ञा के उल्लंघन के आरोप में CJP नेताओं की गिरफ्तारी पर कांग्रेस ने भी सरकार और पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की थी। लेकिन रविवार को रामलीला मैदान में आयोजित INDIA गठबंधन की महारैली में यह तस्वीर पूरी तरह अलग दिखाई दी। रैली में CJP न तो मंच पर नजर आई और न ही उसे भीड़ में कोई औपचारिक स्थान मिला। कार्यक्रम के दौरान पार्टी का झंडा या बैनर भी दिखाई नहीं दिया। यहां तक कि मंच से किसी नेता ने CJP या उसके नेतृत्व का उल्लेख तक नहीं किया। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे हैं कि पिछले महीने साथ दिखने वाले दोनों पक्षों के बीच दूरी क्यों बढ़ गई है।
महारैली में CJP को नहीं मिला न्योता
CJP से जुड़े लोगों के मुताबिक, पार्टी को INDIA गठबंधन की महारैली में शामिल होने का निमंत्रण नहीं दिया गया था। पार्टी के कुछ नेता जरूर रैली का माहौल देखने रामलीला मैदान पहुंचे, लेकिन उन्हें मंच पर जगह नहीं मिली और न ही किसी नेता ने सार्वजनिक रूप से उनका परिचय कराया। रैली से एक दिन पहले CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पार्टी का रुख स्पष्ट किया था। उन्होंने कहा था कि CJP जनहित से जुड़े मुद्दों और सरकार विरोधी प्रदर्शनों का सैद्धांतिक समर्थन करती है, लेकिन वह किसी राजनीतिक दल की पिछलग्गू बनकर काम नहीं करेगी। दीपके ने पार्टी को स्वतंत्र और तटस्थ मंच बताते हुए कहा था कि वह अपनी अलग राजनीतिक पहचान से समझौता नहीं करना चाहती। उनके इस बयान को कांग्रेस और INDIA गठबंधन से पार्टी की दूरी के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि, CJP की ओर से रैली में आमंत्रित नहीं किए जाने को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कांग्रेस क्यों नहीं बढ़ाना चाहती CJP की राजनीतिक हैसियत?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस CJP को अपने साथ मंच साझा कराकर उसे अतिरिक्त राजनीतिक पहचान और महत्व नहीं देना चाहती। खासकर दिल्ली की राजनीति में कांग्रेस के सामने आम आदमी पार्टी का उदाहरण मौजूद है। कभी दिल्ली में कांग्रेस की मजबूत राजनीतिक जमीन रही थी, लेकिन आम आदमी पार्टी के उभार के बाद पार्टी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। बाद में पंजाब में भी कांग्रेस को AAP से सत्ता गंवानी पड़ी। इसी पृष्ठभूमि में माना जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व किसी नए राजनीतिक मंच को अपने समानांतर मजबूत होने का अवसर देने से बचना चाहता है। राहुल गांधी और कांग्रेस के दूसरे वरिष्ठ नेता यह नहीं चाहेंगे कि भविष्य में कोई नया संगठन उनके राजनीतिक आधार को चुनौती देने लगे। हालांकि, यह राजनीतिक विश्लेषकों का आकलन है, कांग्रेस की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।
नेहा बोरा को मंच पर जगह मिलने से NSUI में बेचैनी
महारैली में CJP की गैरमौजूदगी के अलावा एक और घटनाक्रम ने कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI और युवक कांग्रेस के भीतर चर्चा तेज कर दी है। वामपंथी छात्र संगठन आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा को रैली के मंच पर जगह दी गई। इतना ही नहीं, उन्हें सभा को संबोधित करने का अवसर भी मिला। कांग्रेस नेतृत्व की ओर से नेहा बोरा को दी गई इस अहमियत को लेकर NSUI के कुछ नेताओं में असहजता और नाराजगी की बात सामने आई है। पार्टी के छात्र संगठन के नेताओं के बीच सवाल उठ रहे हैं कि जब कांग्रेस का अपना छात्र संगठन मौजूद है, तो दूसरे छात्र संगठन की नेता को इतने बड़े राजनीतिक मंच पर इतनी प्रमुखता क्यों दी गई? बताया जा रहा है कि युवक कांग्रेस के कुछ नेता भी इस घटनाक्रम से खुश नहीं हैं। हालांकि, इन संगठनों की ओर से नाराजगी को लेकर कोई औपचारिक सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।


