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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आज विपक्ष की जन-संसद, खरगे पेश करेंगे जन-महाभियोग प्रस्ताव

विपक्षी गठबंधन की ओर से तय कार्यक्रम के अनुसार, शुक्रवार को दोपहर 3:30 बजे जन-संसद की कार्यवाही शुरू होगी। मल्लिकार्जुन खरगे सबसे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जन-महाभियोग का प्रस्ताव पेश करेंगे।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आज विपक्ष की जन-संसद, खरगे पेश करेंगे जन-महाभियोग प्रस्ताव
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नई दिल्ली: वोट चोरी और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्षी गठबंधन आइएनडीआइए ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को विपक्ष की ओर से जन-संसद या जन-सुनवाई आयोजित की जा रही है, जिसमें चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर चर्चा होगी। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगी, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जन-महाभियोग का प्रस्ताव पेश करेंगे। यह कार्यक्रम रामलीला मैदान में प्रस्तावित वोट चोरी विरोधी रैली से पहले आयोजित किया जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि इस जन-सुनवाई के जरिये एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने से प्रभावित लोगों की समस्याओं और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों को सामने लाया जाएगा।

दोपहर 3:30 बजे शुरू होगी जन-संसद

विपक्षी गठबंधन की ओर से तय कार्यक्रम के अनुसार, शुक्रवार को दोपहर 3:30 बजे जन-संसद की कार्यवाही शुरू होगी। मल्लिकार्जुन खरगे सबसे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जन-महाभियोग का प्रस्ताव पेश करेंगे। इसके बाद विपक्ष की ओर से एसआईआर और कथित वोट चोरी से जुड़े आरोपों का विस्तृत दस्तावेज प्रस्तुत किया जाएगा। कार्यक्रम में गठबंधन के विभिन्न दलों के प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा। मीरा कुमार प्रत्येक विपक्षी दल के एक सदस्य को बोलने का मौका देंगी। अंत में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समापन भाषण देंगे। वह विपक्ष के आरोपों के मुताबिक, एसआईआर के जरिये मतदाता सूची में बदलाव और चुनावी लोकतंत्र को प्रभावित करने के कथित प्रयासों का ब्योरा रखेंगे। इसके बाद जन-महाभियोग प्रस्ताव पारित किए जाने की योजना है। हालांकि, यह कार्यक्रम विपक्ष की ओर से आयोजित जन-सुनवाई है, न कि संसद की आधिकारिक कार्यवाही।

एसआईआर से प्रभावित मतदाता भी होंगे शामिल

जन-संसद में विपक्षी दलों के सांसदों के अलावा ऐसे कुछ लोग भी हिस्सा लेंगे, जिनके नाम कथित तौर पर विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। इनके साथ बुद्धिजीवियों और नागरिक समाज से जुड़े लोगों को भी आमंत्रित किया गया है। कांग्रेस का कहना है कि इस कार्यक्रम में प्रभावित मतदाताओं के अनुभवों के माध्यम से यह समझने की कोशिश की जाएगी कि मतदाता सूची से नाम हटने का उनके अधिकारों और लोकतांत्रिक भागीदारी पर क्या असर पड़ा है। कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा और लोकसभा में पार्टी के उपनेता गौरव गोगोई ने कहा कि जन-सुनवाई के जरिये प्रभावित लोगों की परेशानियों और लोकतंत्र से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। विपक्षी दलों का आरोप है कि एसआईआर की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

खरगे के आवास पर हुई बैठक में बनी रणनीति

जन-संसद की रूपरेखा तय करने के लिए विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने गुरुवार को मल्लिकार्जुन खरगे के आवास, 10 राजाजी मार्ग पर बैठक की। इस बैठक की अध्यक्षता भी पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की। बैठक में कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल, प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन, समाजवादी पार्टी के हरेंद्र मलिक, माकपा के जान ब्रिटास और झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ मांझी समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा, वक्ताओं की भूमिका और जन-महाभियोग प्रस्ताव पेश करने की प्रक्रिया पर चर्चा की गई। विपक्षी गठबंधन के सभी दलों के सांसदों को इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कहा गया है। गठबंधन का उद्देश्य एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर संयुक्त रूप से अपनी बात रखना है।

चुनाव आयोग पर विपक्ष के गंभीर आरोप

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में कथित वोट चोरी के जरिये संविधान और चुनावी लोकतंत्र की बुनियाद को कमजोर किया जा रहा है। विपक्षी दलों का दावा है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में उठे सवालों का जवाब मिलना चाहिए। विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि जन-संसद को औपचारिक संसद की तरह प्रस्तुत नहीं किया जाएगा। इसमें न सत्तापक्ष के किसी प्रतिनिधि को प्रतीकात्मक रूप से शामिल किया जाएगा और न ही संसद की आधिकारिक कार्यवाही होने का दावा किया जाएगा। इस कार्यक्रम के जरिये आइएनडीआइए चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाने और एसआईआर के मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की तैयारी में है। वहीं, जन-सुनवाई में लगाए जाने वाले आरोपों और प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों के आधार पर आगे की राजनीतिक रणनीति तय होने की संभावना है।


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