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भूमि अधिग्रहण घोटाले पर ईडी का एक्शन, छत्तीसगढ़ में 8 ठिकानों पर छापे

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मंगलवार को भूमि अधिग्रहण घोटाला मामले में छत्तीसगढ़ के अभनपुर, रायपुर, धमतरी और कुरुद स्थित आठ परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया

भूमि अधिग्रहण घोटाले पर ईडी का एक्शन, छत्तीसगढ़ में 8 ठिकानों पर छापे
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नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मंगलवार को भूमि अधिग्रहण घोटाला मामले में छत्तीसगढ़ के अभनपुर, रायपुर, धमतरी और कुरुद स्थित आठ परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया।

यह कार्रवाई भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर–विशाखापट्टनम हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण में कथित अवैध मुआवजा प्राप्त करने के मामले से जुड़ी है।

तलाशी के दौरान ईडी ने 66.9 लाख रुपये नकद, करीब 37.13 किलोग्राम वजनी चांदी की ईंटें और अन्य चांदी के सामान, डिजिटल उपकरण तथा कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए। एजेंसी के अनुसार, ये सभी बरामदगी मामले में कथित वित्तीय अनियमितताओं और अवैध लेनदेन की ओर संकेत करती हैं।

ईडी ने इस मामले में जांच की शुरुआत पीएमएलए, 2002 के तहत आर्थिक अपराध शाखा, रायपुर/एसीबी, रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की थी।

इस एफआईआर में तत्कालीन एसडीओ (राजस्व) निर्भय साहू और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 तथा भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

आरोप है कि सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से दस्तावेजों में हेरफेर कर भूमि अधिग्रहण रिकॉर्ड में बदलाव किए गए और इसके जरिए अवैध रूप से अधिक मुआवजा हासिल किया गया।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने कुछ लोक सेवकों और अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), रायपुर द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 3ए के तहत अधिसूचना जारी होने के बाद भी भूमि स्वामित्व को जानबूझकर स्थानांतरित किया गया। साथ ही, धारा 3डी की अधिसूचना से पहले भूमि को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर मुआवजे की राशि बढ़ाने की कोशिश की गई।

ईडी के अनुसार, संशोधित और हेरफेर किए गए खसरा रिकॉर्ड के आधार पर मुआवजा स्वीकृत और वितरित किया गया, जिससे वास्तविक से अधिक राशि प्राप्त की गई। एजेंसी ने स्पष्ट किया कि इस तरह से प्राप्त अतिरिक्त धन ‘अपराध की आय’ की श्रेणी में आता है, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा और आरोपियों को अवैध लाभ मिला।

ईडी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों व नेटवर्क की पहचान की जा रही है।


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