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जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज में ‘सिम्फनी’26 का भव्य आगाज, ‘उबंतू—आई एम बिकॉज वी आर’ थीम के साथ सांस्कृतिक महोत्सव की शुरुआत
जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज में वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव ‘सिम्फनी’26 का भव्य शुभारंभ उत्साह और रचनात्मकता के बीच हुआ। इस वर्ष महोत्सव की थीम ‘उबंतू—आई एम बिकॉज़ वी आर’ निर्धारित की गई है, जो एकता, सह-अस्तित्व और साझा मानवता के दर्शन को अभिव्यक्त करती है।

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज में वार्षिक सांस्कृतिक उत्सव ‘सिम्फनी’26 का भव्य शुभारंभ उत्साह और रचनात्मकता के बीच हुआ। इस वर्ष महोत्सव की थीम ‘उबंतू—आई एम बिकॉज़ वी आर’ निर्धारित की गई है, जो एकता, सह-अस्तित्व और साझा मानवता के दर्शन को अभिव्यक्त करती है। उद्घाटन समारोह में कला, संस्कृति और शिक्षा जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। तीन दिवसीय इस उत्सव में अभिनय, वाद-विवाद, नुक्कड़ नाटक, नृत्य, संगीत और कविता सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं और प्रस्तुतियों की श्रृंखला आयोजित की जा रही है। महोत्सव का उद्देश्य केवल प्रतिभाओं का प्रदर्शन नहीं, बल्कि विविधता और समावेशन के मूल्यों को सशक्त मंच प्रदान करना है।
‘उबंतू’ की भावना
इस वर्ष की थीम ‘उबंतू’ अफ्रीकी दर्शन से प्रेरित है, जिसका अर्थ है—“मैं इसलिए हूं क्योंकि हम हैं।” यह विचार इस बात पर बल देता है कि व्यक्ति की पहचान और विकास समाज से जुड़ा होता है। कॉलेज प्रशासन के अनुसार, आज की विभाजित और प्रतिस्पर्धात्मक दुनिया में यह थीम विशेष रूप से प्रासंगिक है। उत्सव के मंच से वक्ताओं ने कहा कि जब हम एक-दूसरे का समर्थन करते हैं, विविधताओं का सम्मान करते हैं और सामूहिक रूप से आगे बढ़ते हैं, तभी एक मजबूत और दयालु समुदाय का निर्माण संभव होता है। ‘सिम्फनी’26 का ध्येय इसी भावना को मूर्त रूप देना है।
प्राचार्य प्रो. स्वाति पाल का प्रेरक उद्बोधनकार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज की प्राचार्य प्रो. स्वाति पाल के जोशीले और प्रेरक उद्बोधन से हुई। उन्होंने छात्रों को रचनात्मक अभिव्यक्ति और सामूहिक सहयोग के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक उत्सव केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास और सामाजिक चेतना का सशक्त साधन है। प्रो. पाल ने छात्रों से आग्रह किया कि वे इस मंच का उपयोग अपनी प्रतिभा को निखारने और एक-दूसरे से सीखने के अवसर के रूप में करें। उनके संबोधन ने समारोह के लिए सकारात्मक और ऊर्जावान वातावरण तैयार किया।
मंजरी चतुर्वेदी ने साझा किया अनुभव
उद्घाटन समारोह की मुख्य अतिथि प्रख्यात कथक नृत्यांगना, निर्देशक, कोरियोग्राफर, फिल्म निर्माता और लेखिका मंजरी चतुर्वेदी रहीं। उन्होंने 25 वर्षों के अपने करियर में 500 से अधिक संगीत कार्यक्रमों में भाग लिया है और 32 देशों में 24 प्रस्तुतियां दी हैं। वे 408 से अधिक संगीतकारों के साथ सहयोग कर चुकी हैं।
मंजरी चतुर्वेदी ने निमंत्रण के लिए कॉलेज का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि युवाओं के बीच सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने वाली ऐसी पहल से जुड़ना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कार्यक्रम की सुनियोजित रूपरेखा और छात्रों की ऊर्जा की सराहना की। प्रतिभागियों से बातचीत के बाद उन्होंने कहा कि कॉलेज परिसर में सृजनात्मकता और उत्साह स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उन्होंने आयोजन समिति को सफल और प्रेरक उत्सव के लिए शुभकामनाएं दीं।
कुलजीत सिंह ने याद किया कॉलेज से जुड़ाव
समारोह के दूसरे विशिष्ट अतिथि कलाकार और शिक्षाविद कुलजीत सिंह रहे। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत कॉलेज से अपने पुराने संबंधों को याद करते हुए की। उन्होंने बताया कि 1996 से 1999 तक वे इसी संस्थान में स्नातक छात्र रहे और इसी मंच पर थिएटर समूह ‘अंकुर’ के साथ भीष्म साहनी के नाटक ‘चीफ की दावत’ में अभिनय किया था।
कुलजीत सिंह ने सिनेमा और थिएटर में अपने अनुभव साझा किए। उनके प्रमुख कार्यों में ‘मार्गरीटा विद ए स्ट्रॉ’ (2015), ‘ब्रीद: इनटू द शैडोज’ (2020), ‘सरदार उधम’ (2021), ‘आकांक्षी’ (2022), ‘ट्रायल बाय फायर’ (2022) और ‘चमक’ (2024-25) शामिल हैं। उन्होंने छात्रों को बताया कि कला केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज से संवाद का माध्यम है।
‘उबंतू’ पर कुलजीत सिंह का विचार
कुलजीत सिंह ने ‘उबंतू’ की अवधारणा को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक दर्शन है, जो हमें अंतर्संबंध, सहयोग और साझा जिम्मेदारी का बोध कराता है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे प्रतिस्पर्धा से अधिक सहयोग को महत्व दें और रचनात्मकता को सहानुभूति के साथ जोड़ें। उन्होंने कहा कि समय बदलता रहता है, तकनीक विकसित होती रहती है, लेकिन संस्थान की मूल भावना और मूल्य कालातीत रहते हैं। उनके प्रेरक शब्दों ने छात्रों को गहराई से प्रभावित किया।
अनुराधा कृष्णा का संदेश
शासी निकाय की अध्यक्ष अनुराधा कृष्णा ने छात्रों, शिक्षकों और अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कॉलेज उत्सव रचनात्मकता और सामुदायिक भावना को सशक्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं, विशेषकर ऐसे समय में जब डिजिटल दुनिया में मानवीय संवाद सीमित होता जा रहा है। उन्होंने सह-पाठ्यचर्या गतिविधियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये गतिविधियां छात्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विविधता, समावेशिता और सहयोग को शिक्षा प्रणाली का अभिन्न अंग बताते हुए उन्होंने तीन दिवसीय समारोह की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।
विशिष्ट उपस्थिति और सांस्कृतिक समापन
समारोह में मानव विकास और परिवार सशक्तिकरण विभाग की वरिष्ठ शिक्षिका निर्मला मुरलीधरन भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। चार दशकों से अधिक के उनके अकादमिक अनुभव ने कार्यक्रम को अतिरिक्त गरिमा प्रदान की। उद्घाटन समारोह का समापन प्रसिद्ध गायक ऐश किंग के लाइव प्रदर्शन के साथ हुआ। उनके लोकप्रिय गीतों ने पूरे परिसर को उत्साह से भर दिया। छात्र-छात्राएं संगीत की धुनों पर झूमते नजर आए और वातावरण में उत्सव की ऊर्जा स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
रचनात्मकता और समुदाय का संगम
‘सिम्फनी’26 का यह शुभारंभ न केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत है, बल्कि एक ऐसे विचार का उत्सव भी है जो सामूहिक विकास और मानवीय मूल्यों को केंद्र में रखता है। कॉलेज प्रशासन और आयोजन समिति का मानना है कि यह उत्सव छात्रों को अपनी पहचान को समझने, विविधताओं को अपनाने और सामूहिकता की शक्ति को महसूस करने का अवसर देगा। तीन दिवसीय इस महोत्सव में विभिन्न प्रतियोगिताओं और प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रतिभाएं निखरेंगी और ‘उबंतू’ की भावना को साकार किया जाएगा। भव्य उद्घाटन के साथ ‘सिम्फनी’26 ने रचनात्मकता, एकता और उत्साह का ऐसा स्वर छेड़ा है, जिसकी गूंज पूरे परिसर में लंबे समय तक सुनाई देगी।
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