प्रति बेड 15000 रुपये किराया, लेकिन मेंटेनेंस शून्य… दिल्ली PG हादसे में नया खुलासा, इस लापरवाही ने ली 6 जिंदगियां?
सत्य निकेतन में लंबे समय से रहने वाले स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में बड़ी संख्या में मकानों को PG में तब्दील कर दिया गया है। कई इमारतों में छात्रों की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन उनके मुताबिक भवनों के नियमित रखरखाव और सुरक्षा जांच पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक सत्य निकेतन में रविवार दोपहर एक बहुमंजिला पेइंग गेस्ट इमारत के अचानक ढहने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हादसे में छह छात्रों की मौत की बात सामने आई है, जबकि कई लोगों के मलबे में दबने की सूचना है। हादसे के बाद पुलिस, दमकल और बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। यह घटना दोपहर करीब 1:30 बजे की बताई गई है। संकरी गली में स्थित इमारत के मलबे में छात्र और वहां काम कर रहे मजदूर फंस गए। बचावकर्मियों ने मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की। आसपास की कुछ इमारतों को भी सुरक्षा कारणों से खाली कराया गया।
बेसमेंट में चल रहा था तोड़फोड़ का काम
स्थानीय लोगों के अनुसार, इमारत में हादसे से पहले करीब एक सप्ताह से बेसमेंट में तोड़फोड़ और निर्माण संबंधी काम चल रहा था। बताया गया कि बेसमेंट में पहले से पानी जमा था और ढांचे की स्थिति भी कमजोर थी। आशंका जताई गई कि खुदाई के दौरान एक पिलर प्रभावित हुआ, जिसके बाद पूरी इमारत का संतुलन बिगड़ गया। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। अधिकारियों की ओर से भी घटनास्थल और इमारत की संरचनात्मक स्थिति की जांच की जा रही है।
छात्रों से प्रति बेड हजारों रुपये किराया
स्थानीय जानकारी के मुताबिक, इमारत में करीब 15 कमरे थे और प्रत्येक कमरे में दो से तीन छात्र रहते थे। यहां रहने वाले ज्यादातर छात्र दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से जुड़े कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे थे। इनमें मोतीलाल नेहरू कॉलेज, आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज और श्री वेंकटेश्वर कॉलेज के छात्र शामिल बताए गए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि PG में छात्रों से प्रति बेड करीब 15 हजार रुपये तक किराया लिया जाता था। इसके बावजूद इमारत के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने PG व्यवस्था पर उठाए सवाल
सत्य निकेतन में लंबे समय से रहने वाले स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में बड़ी संख्या में मकानों को PG में तब्दील कर दिया गया है। कई इमारतों में छात्रों की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन उनके मुताबिक भवनों के नियमित रखरखाव और सुरक्षा जांच पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। एक स्थानीय निवासी ने आरोप लगाया कि कई मकान मालिक छात्रों से ऑनलाइन किराया तो लेते हैं, लेकिन इमारत की स्थिति देखने के लिए नियमित रूप से मौके पर नहीं आते। उनका कहना है कि इलाके में कई पुरानी और बहुमंजिला इमारतों की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है।
आसपास की इमारतों पर भी नजर
हादसे के बाद पास की एक अन्य इमारत में दरारें दिखाई देने की बात सामने आई। एहतियात के तौर पर उसे खाली कराया गया। बचाव अभियान के दौरान उसके भी प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए गए।
पुलिस ने दर्ज की FIR
मामले में पुलिस ने इमारत के मालिक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या और लापरवाही से संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की है। बताया गया है कि मालिक गुरुग्राम में रहता है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इमारत में निर्माण या बदलाव के दौरान निर्धारित नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
MCD की कार्रवाई और सुरक्षा पर बड़ा सवाल
हादसे ने दिल्ली में छात्रों के लिए संचालित PG और बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर निगम की ओर से सत्य निकेतन की जर्जर और खतरनाक इमारतों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। दिल्ली की मेयर ने चार मंजिल से अधिक के अवैध निर्माणों पर कार्रवाई और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात कही है। सत्य निकेतन हादसा अब केवल एक इमारत के गिरने की घटना नहीं रह गया है। इसने छात्रों की सुरक्षा, PG संचालन, भवन निर्माण नियमों और प्रशासनिक निगरानी की पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।


