चुनाव आयोग पर कांग्रेस का नया हमला, SIR और मतदाता सूची को लेकर उठाए गंभीर सवाल
चुनाव आयोग के हालिया प्रेस नोट को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है

जयराम रमेश ने कहा, प्रेस नोट से नहीं मिले जवाब; ECINet, AI और मतदाता अधिकारों पर मांगी स्पष्टता
नई दिल्ली। चुनाव आयोग के हालिया प्रेस नोट को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक नया बयान जारी करते हुए आरोप लगाया कि आयोग का प्रेस नोट वास्तविक सवालों का जवाब देने के बजाय "डैमेज कंट्रोल" की कोशिश है।
चुनाव आयोग द्वारा कल रात जारी किए गए प्रेस नोट के दावों की सच्चाई पहले ही सामने आ चुकी है और यह भी साफ हो चुका है कि वह असल में क्या है-डैमेज कंट्रोल की एक हताश कोशिश, जिसमें सब कुछ छिपाने की कोशिश की गई है और कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया। अब उस पूरी तरह अर्थहीन प्रेस नोट के दावों… pic.twitter.com/DvbDO8PLuz
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) September 27, 2026
कांग्रेस ने अपने ताजा बयान में कहा कि चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची और विशेष पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर दिए गए स्पष्टीकरण कई महत्वपूर्ण मुद्दों को संबोधित नहीं करते। पार्टी का दावा है कि जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं या जिनके नाम हटने का खतरा बताया जा रहा है, उनके अधिकारों की सुरक्षा को लेकर आयोग की ओर से पर्याप्त जवाब नहीं दिया गया है।
बयान में चुनाव आयोग के ECINet सॉफ्टवेयर की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची तैयार करने और संशोधित करने की प्रक्रिया में तकनीकी प्रणालियों के इस्तेमाल को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती गई। पार्टी ने कहा कि इस संबंध में स्वतंत्र और स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि किसी भी तरह की आशंका दूर हो सके।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि मतदाता पंजीकरण से जुड़े कुछ प्रक्रियात्मक बदलावों और फॉर्म-6 से संबंधित प्रावधानों पर आयोग की दलीलें पूरी तरह संतोषजनक नहीं हैं। पार्टी का कहना है कि इन बदलावों के प्रभाव और कानूनी आधार को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं।
अपने बयान में कांग्रेस ने मतदाता सूची तैयार करने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के संभावित उपयोग को लेकर भी चिंता जताई। पार्टी का कहना है कि यदि ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है तो उसके बारे में स्पष्ट दिशा-निर्देश और पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए, क्योंकि यह सीधे मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा मामला है।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग से सभी विवादित बिंदुओं पर विस्तृत स्पष्टीकरण देने और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग की है। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से इन ताजा आरोपों पर औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर शुरू हुआ यह विवाद आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि विपक्ष लगातार इस विषय पर सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांग रहा है।


