कांग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान भाजपा महिला कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी: बांसुरी स्वराज
भाजपा की महिला मोर्चा द्वारा कांग्रेस मुख्यालय के बाहर किए गए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के पदाधिकारियों ने महिला कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट और बदसलूकी की। यह आरोप भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने मंगलवार को लगाया।

नई दिल्ली। भाजपा की महिला मोर्चा द्वारा सोमवार को कांग्रेस मुख्यालय के बाहर किए गए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के पदाधिकारियों ने महिला कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट और बदसलूकी की। यह आरोप भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने मंगलवार को लगाया।
नई दिल्ली से भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने प्रेस वार्ता में कहा कि कांग्रेस पार्टी का 'स्मैश द पैट्रियार्की' का नारा केवल दिखावटी है और पार्टी खुद उसके सिद्धांतों का पालन नहीं करती।
बांसुरी स्वराज ने आरोप लगाया कि भाजपा महिला मोर्चा के प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी और मुख्य मीडिया समन्वयक संजीव सिंह वहां पहुंचे और भाजपा की महिला कार्यकर्ताओं के साथ धक्का-मुक्की तथा बदसलूकी करने लगे।
उन्होंने कहा, "इतना ही नहीं, उन्होंने बार-बार महिला कार्यकर्ताओं को धक्का दिया, उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और अनुचित आचरण किया।"
उन्होंने कांग्रेस के एक प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार के साथ कथित बदसलूकी का भी जिक्र किया और कहा कि इससे कांग्रेस के दोहरे मापदंड सामने आते हैं।
बांसुरी स्वराज ने कहा, "कांग्रेस के शीर्ष नेता 'स्मैश द पैट्रियार्की' जैसे खोखले नारे लगाते हैं, लेकिन कभी महिला पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट होती है तो कभी महिला पत्रकारों पर हमला किया जाता है।"
बता दें कि भाजपा महिला मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को कांग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था। यह प्रदर्शन जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की छात्राओं के कथित यौन उत्पीड़न के मामले में कांग्रेस सांसद और बर्खास्त प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम के खिलाफ तथा उन्हें शीर्ष नेतृत्व द्वारा कथित संरक्षण दिए जाने के विरोध में किया गया था।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने जेएनयू की 11 बेटियां न्याय की हकदार बेटियां जैसे नारे लगाए।
इसी बीच, भाजपा की कुछ महिला सांसदों ने मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात कर इस मामले की जानकारी दी। उनका कहना था कि सांसद पर लगे गंभीर आरोपों के कारण उनका पद पर बने रहना उचित नहीं है।
बांसुरी स्वराज ने कहा, "जेएनयू की आंतरिक समिति ने उन्हें यौन दुराचार का दोषी पाया था और इसके बाद विश्वविद्यालय ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं। इसके बावजूद राहुल गांधी और कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है।"


