संसद में गतिरोध पर भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन का कांग्रेस और विपक्षी दलों पर हमला, चिराग पासवान ने भी की आलोचना
संसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पूरे विपक्ष को मूल मुद्दों से भटकाने का काम किया और संसद में सार्थक चर्चा नहीं होने दी।

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पूरे विपक्ष को मूल मुद्दों से भटकाने का काम किया और संसद में सार्थक चर्चा नहीं होने दी।
नितिन नवीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "संसद लोकतंत्र का वह पवित्र मंदिर है, जहां जनता के मुद्दों पर सार्थक चर्चा से देश की दिशा तय होती है, लेकिन इस बार के मानसून सत्र में गैर-जिम्मेदार कांग्रेस ने पूरे विपक्ष को मुद्दों से भटकाने का ही काम किया है, उनको गुमराह किया है। इस पूरे सत्र में राहुल गांधी और समूचे विपक्ष का रवैया उनकी अराजक मानसिकता और लोकतंत्र-विरोधी सोच को उजागर करता है। पूरा सत्र बीतने को है, पर वे एक भी मुद्दे पर गंभीर चर्चा के लिए तैयार नहीं हुए। पहले उन्होंने युवाओं के विषय पर चर्चा करने की मांग की, और जब मोदी सरकार इसके लिए पूरी तरह तैयार हो गई, तो विपक्ष यह कहकर भाग खड़ा हुआ कि उन्हें कोई चर्चा ही नहीं करनी है।"
उन्होंने लिखा कि सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष लगातार जनता के मुद्दों से भागता रहा। आखिर विपक्ष डिबेट, डिस्कशन और बातचीत से क्यों भाग रहा था? यह साफतौर पर दिखाता है कि विपक्ष मुद्दों को लेकर न तो संजीदा है और न ही गंभीर। संसद में कई नए सांसदों का यह पहला सत्र था। विपक्ष ने केवल हंगामा करके उन नए सांसदों के सामने हमारे लोकतंत्र की एक बेहद शर्मनाक तस्वीर पेश की है। इनके इस अड़ियल रवैये के कारण देश प्रश्नकाल से भी वंचित रह गया और लोकतंत्र के इस मंदिर में जनता से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बात तक नहीं हो सकी।
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि राहुल गांधी जी, भारत में नेता प्रतिपक्ष का पद हमेशा से उच्च संवैधानिक गरिमा रखता आया है। लेकिन, आपने बार-बार अमर्यादित भाषा, अहंकार, अपने ढुलमुल और गैरजिम्मेदार रवैये से न सिर्फ इस पद को शर्मसार किया है, बल्कि सदन की मर्यादा और गरिमा में भी भारी गिरावट ला दी है। सच्चाई यह है कि विपक्ष चर्चा से इसलिए भाग रहा था क्योंकि वे गृह मंत्री का सामना करने से डरते हैं। गृह मंत्री जी ने सड़क से सदन तक का एक लंबा राजनैतिक सफर तय किया है और पूरा देश जानता है कि जब वे सदन में तथ्यों के साथ बोलते हैं, तो उनके तर्कों के सामने विपक्ष की बोलती बंद हो जाती है। इसी डर से विपक्ष पूरे सत्र में केवल विषयों को बदलता रहा और चर्चा से भागता रहा।
वहीं, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी विपक्ष के रवैये की आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "गृह मंत्री अमित शाह के स्पष्ट हस्तक्षेप और सरकार की ओर से चर्चा की तैयारियों के बावजूद विपक्ष ने सदन की कार्यवाही बाधित की, जो दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है। सरकार छात्रों से जुड़े मुद्दों, राम मंदिर और विपक्ष द्वारा उठाए गए अन्य सभी विषयों पर चर्चा और जवाब देने के लिए तैयार थी। संसद देश का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है, जहां पक्ष और विपक्ष दोनों को अपने विचार रखने का अवसर मिलता है।"
उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष के पास कोई मुद्दे, प्रश्न या तर्क हैं तो उन्हें सदन के भीतर चर्चा करनी चाहिए। लोकतंत्र में समस्याओं का समाधान बहस और संवाद से निकलता है, न कि व्यवधान पैदा करने से। असहमति का सम्मान होना चाहिए, लेकिन उसे व्यक्त करने का सबसे उचित मंच संसद ही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चर्चा से नहीं भाग रही थी, बल्कि हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार थी। ऐसे में विपक्ष का व्यवहार लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता। विपक्ष का यह रवैया संसदीय परंपराओं को कमजोर करने वाला है और इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को नुकसान पहुंचता है।


