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चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन पर भाजपा का तीखा हमला, कहा-देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं राहुल गांधी

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर इंडिया ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन को एनडीए नेताओं ने जनता को भ्रमित करने वाली नौटंकी करार दिया है।

चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन पर भाजपा का तीखा हमला, कहा-देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं राहुल गांधी
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नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर इंडिया ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन को एनडीए नेताओं ने जनता को भ्रमित करने वाली नौटंकी करार दिया है।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने देश में अच्छा काम किया है। एसआईआर कोई नई चीज नहीं है। कांग्रेस के शासनकाल में भी मतदाता सूची का पुनरीक्षण होता रहा है। एसआईआर से कम से कम बिहार और बंगाल जैसे राज्यों में बांग्लादेशी मुसलमानों को छांटने का काम किया गया है। इसके खिलाफ राहुल गांधी और तेजस्वी यादव घूम-घूमकर प्रचार करते रहे। चुनाव आयुक्त उनसे नाम मांगते रहे कि किसका नाम काटा गया है, नाम बताइए लेकिन वे नाम नहीं दे पाए। इससे साफ जाहिर होता है कि ये लोग अराजकता फैलाते हैं। ये लोग अर्बन नक्सल की भूमिका में हैं और देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं।

भाजपा नेता जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने कहा कि लजाई बिल्ली खंभा नोचे। अभी इन लोगों के पास दूसरा कोई मुद्दा नहीं है। जो संवैधानिक संस्थाएं हैं, ये लोग उन्हें डराना चाहते हैं। चुनाव आयोग निष्पक्ष रूप से चुनाव कराने का काम करता है। यहां तो ज्ञानेश कुमार ने भी बहुत पाक-साफ और निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराए हैं।

हरियाणा सरकार में मंत्री अनिल विज ने कहा कि मुझे नहीं मालूम कि राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने के लिए कोई आवेदन दिया है या नहीं दिया है। अगर दिया है, तो क्या चुनाव आयोग ने उससे इनकार किया है? हम भी जब विपक्ष में थे, तो कई बार चुनाव आयुक्त को समय लेकर मिलते थे। ये भी मिल सकते हैं लेकिन लोकतंत्र का इससे बड़ा उदाहरण क्या होगा कि वो गांधी परिवार, जो कभी अर्श पर होता था, आज अपनी गलत सोच, गलत नीतियों और गलत कामों के कारण फर्श पर आ गया है। मिलने का हर आदमी का अधिकार है, कोई किसी से जाकर मिल सकता है लेकिन राहुल गांधी बताएं कि उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से कब समय मांगा और कब उन्होंने चिट्ठी लिखी।

महाराष्ट्र से भाजपा नेता स्नेहा दुबे पंडित ने कहा कि पहली बात तो यह है कि राहुल गांधी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनकी नियुक्ति के समय तीन सदस्यों वाली एक समिति बनाई गई थी, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल थे। विरोध करने के लिए तथ्य होने चाहिए जो कि उनके पास नहीं हैं।

भाजपा नेता आरपी सिंह ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर लगाए जा रहे धक्का-मुक्की के आरोपों पर कहा कि सिर्फ धक्का-मुक्की नहीं, बल्कि मेरा मानना है कि यह एक महिला के साथ छेड़खानी का मामला है। एक महिला पुलिसकर्मी है, आप उस पर हाथ क्यों लगा रहे हैं? अगर आपको कोई समस्या है तो अपनी महिला कार्यकर्ता से कहिए कि वह कुछ करें। इससे पता चलता है कि किस प्रकार की मानसिकता है। ऐसा लगता है कि वे सोचते हैं कि हम राजा हैं और हम जैसा चाहें, वैसा कर सकते हैं। कल इसी प्रकार प्रियंका वाड्रा ने भी एक पुलिस अधिकारी के साथ बदतमीजी और धक्का-मुक्की की। बाद में उन्होंने कहा कि उनकी पीठ छिल गई थी, लेकिन उसी समय जब वह बस में बैठीं, तो मुस्कुरा रही थीं और हाथ हिला रही थीं। इससे लगता है कि यह सब एक तरह का दिखावा हो रहा है। यह मानसिकता कि हम राजा हैं, हम जैसा चाहें, वैसा कर लेंगे और सभी अधिकारी हमारे अधीन हैं, यह चलने वाला नहीं है।

भाजपा नेता तुहिन सिन्हा ने कहा कि जवाबदेही तय करने वाले राहुल गांधी कौन हैं? सुप्रीम कोर्ट जवाबदेही तय कर रहा है। इसका मतलब है कि राहुल गांधी को या तो कोर्ट पर विश्वास नहीं है या फिर वे यह समझ नहीं पा रहे हैं कि कोर्ट ने क्या फैसला दिया है। सोमवार को आए कोर्ट के फैसले में सीधे तौर पर जवाबदेही तय करने की बात की गई है। इसमें सवाल उठाए गए हैं कि किस प्रकार के निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए और किस प्रकार के निर्णय लिए गए। यह भी देखा जा रहा है कि ये निर्णय कानूनी रूप से पूरी तरह पुख्ता हैं या नहीं। इसलिए चुनाव आयोग की जवाबदेही सुप्रीम कोर्ट तय करेगा, राहुल गांधी नहीं। सबसे पहले राहुल गांधी को इस भ्रम से बाहर निकलना चाहिए।


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