दिल्ली में विपक्ष की रैली के खिलाफ भाजपा का मार्च, हरदीप पुरी ने दिल्ली में संभाली कमान
दिल्ली में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के नेतृत्व में हरि नगर से तिलक नगर तक मार्च निकाला गया। करीब एक किलोमीटर लंबे इस मार्च में 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों के सदस्यों के साथ सिख समुदाय के लोगों ने भी हिस्सा लिया।

नई दिल्ली: BJP March: दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA ब्लॉक की रैली के एक दिन बाद रविवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन शुरू किया। पार्टी ने इस अभियान को ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ नाम दिया है। दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में भाजपा नेता और कार्यकर्ता मार्च निकालकर कांग्रेस पर निशाना साध रहे हैं। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में रामलीला मैदान में रैली आयोजित करने के लिए जानबूझकर 1 नवंबर की तारीख चुनी। पार्टी का कहना है कि इसी दिन 1984 में देश ने सिख विरोधी हिंसा का दर्दनाक दौर देखा था। दिल्ली में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के नेतृत्व में हरि नगर से तिलक नगर तक मार्च निकाला गया। करीब एक किलोमीटर लंबे इस मार्च में 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों के सदस्यों के साथ सिख समुदाय के लोगों ने भी हिस्सा लिया। प्रदर्शन में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और पार्टी के कई अन्य नेता शामिल हुए। नेताओं ने सिर पर काली पट्टियां बांधकर हिंसा में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग उठाई।
हरि नगर से तिलक नगर तक निकला मार्च
भाजपा का दिल्ली मार्च हरि नगर बस डिपो से शुरू होकर तिलक नगर मेट्रो स्टेशन तक पहुंचा। पार्टी ने इसे 1984 की हिंसा के पीड़ितों के साथ एकजुटता दिखाने और कांग्रेस से जवाब मांगने का अभियान बताया। मार्च में शामिल लोगों ने कहा कि तीन दशक से अधिक समय बीतने के बाद भी पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र की बात करने वाली पार्टी को पहले 1984 की हिंसा पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र की दुहाई देने वालों से आज सिख समाज पूछ रहा है कि 1984 में जो हुआ था, क्या वह लोकतंत्र की हत्या नहीं थी? आज देश में अराजकता फैलाने का काम वही लोग कर रहे हैं।” रेखा गुप्ता ने दावा किया कि मार्च में हजारों सिख भाई-बहन शामिल हुए और वे कांग्रेस से यह जानना चाहते हैं कि उन्हें न्याय कब मिलेगा। उन्होंने कहा कि 1984 की हिंसा को भुलाया नहीं जा सकता और पीड़ित परिवारों की आवाज लगातार उठाई जानी चाहिए।
आशीष सूद बोले- 1984 में सरकारी स्तर पर फैली थी अराजकता
दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने भी कांग्रेस की रैली और उसकी राजनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस देश को अराजकता की ओर ले जाने का प्रयास कर रही है, जबकि भाजपा युवाओं को जागरूक करने के लिए सड़कों पर उतरी है। सूद ने कहा, “1984 में जो हुआ, वह अराजकता थी। सरकार द्वारा फैलाई गई अराजकता।” उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि विदेशी देशों में हुई हिंसा और अशांति के चित्रों के जरिए वह देश को क्या संदेश देना चाहते हैं। मंत्री ने कहा कि भाजपा ऐसी राजनीति का विरोध करेगी और युवाओं को इसके प्रति जागरूक करेगी।
रोहतक में नितिन नवीन का मार्च
दिल्ली के अलावा हरियाणा के रोहतक में भी भाजपा ने मार्च निकाला। पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसकी अगुवाई करते हुए कांग्रेस पर चुनावी प्रक्रिया और जनता के जनादेश का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वोट चोरी कांग्रेस की विरासत रही है। उनके मुताबिक, कांग्रेस वोट चोरी भी करती है और जनता के वोट का सम्मान भी नहीं करती। नवीन ने राहुल गांधी पर विदेशी ताकतों की टूलकिट बनकर काम करने का आरोप लगाया। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस की राजनीति देश को कमजोर करने वाली है और पार्टी को जनता के सामने इसका जवाब देना चाहिए।
नड्डा ने राहुल गांधी की राजनीति पर उठाए सवाल
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भी कांग्रेस की रामलीला मैदान रैली को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर का दिन 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को याद करने और उनके प्रति संवेदना व्यक्त करने का था, लेकिन राहुल गांधी इस दिन रामलीला मैदान में अपनी राजनीति चमकाने में लगे हैं। नड्डा ने आरोप लगाया कि रामलीला मैदान में आयोजित कार्यक्रम लोकतंत्र के सम्मान के बजाय लोकतंत्र के नाम पर अराजकता फैलाने की सोची-समझी कोशिश है। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीति के चार चरण गिनाते हुए कहा कि इसमें पहले झूठ और अफवाहें फैलाई जाती हैं, फिर सड़कों पर अराजकता और उपद्रव किया जाता है। इसके बाद देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने और विदेशी ताकतों के इशारे पर चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने का प्रयास होता है।
चार मकसद गिनाकर कांग्रेस को घेरा
नड्डा ने 1 नवंबर को हुई रैली के पीछे कांग्रेस के चार कथित मकसद बताए। उनके अनुसार, पहला मकसद सिख समुदाय के जख्मों पर नमक छिड़कना, दूसरा दिल्ली में दंगा और अराजकता फैलाकर चुनी हुई सरकार को हटाने की साजिश करना, तीसरा त्योहारों के मौसम में दुकानदारों और व्यापारियों की कमाई को नुकसान पहुंचाना और चौथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि खराब करना है। उन्होंने कहा कि भारत एक मजबूत लोकतंत्र है और देश संविधान तथा जनता के जनादेश के आधार पर चलेगा, न कि दंगा आधारित राजनीति से। नड्डा ने दावा किया कि रामलीला मैदान की रैली कांग्रेस के राजनीतिक पतन की दिशा में आखिरी कील साबित होगी। भाजपा के इस प्रदर्शन से साफ है कि 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। एक ओर INDIA ब्लॉक ने SIR और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर सरकार तथा चुनाव आयोग को घेरने के लिए रामलीला मैदान में रैली की, वहीं भाजपा ने उसी तारीख को लेकर कांग्रेस की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होता दिखाई दे रहा है।


