DU News: 'भारत को जानो’ उत्सव बना प्रवासी भारतीयों के बीच सांस्कृतिक सेतु
समारोह का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके केंद्र में भारत की सभ्यतागत विरासत, सांस्कृतिक वैभव और वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने का ऐतिहासिक अवसर रहा। इस आयोजन ने भारत और विश्वभर में बसे प्रवासी भारतीयों के बीच सांस्कृतिक सेतु का कार्य किया और युवा पीढ़ी को भारत की आत्मा से जोड़ने का सशक्त प्रयास किया।

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज में शुक्रवार, 22 जनवरी 2026 को “भारत को जानो” उत्सव समारोह का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रवासी भारतीय अनुसंधान एवं संसाधन केंद्र ( विदेश मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समर्थित) के सहयोग से आयोजित हुआ। समारोह का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके केंद्र में भारत की सभ्यतागत विरासत, सांस्कृतिक वैभव और वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने का ऐतिहासिक अवसर रहा। इस आयोजन ने भारत और विश्वभर में बसे प्रवासी भारतीयों के बीच सांस्कृतिक सेतु का कार्य किया और युवा पीढ़ी को भारत की आत्मा से जोड़ने का सशक्त प्रयास किया।
प्राचार्य प्रो. स्वाति पाल के निर्देशन में आयोजन
समारोह का आयोजन महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. स्वाति पाल के कुशल निर्देशन में संपन्न हुआ। यह उत्सव कॉलेज की भारतीय भाषा समिति के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें शैक्षणिक, सांस्कृतिक और वैचारिक तीनों स्तरों पर भारत की पहचान को रेखांकित किया गया। कॉलेज प्रशासन ने इसे एक शैक्षणिक कार्यक्रम से आगे बढ़ाते हुए भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और प्रवासी भारतीयों से संवाद का मंच बनाया।
भारतीय परंपरा से अतिथियों का स्वागत
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रवासी आगंतुकों के पारंपरिक भारतीय स्वागत से किया गया। अतिथियों का तिलक, दुशाला भेंट और आत्मीय अभिवादन के साथ स्वागत हुआ, जो भारतीय संस्कृति में आतिथ्य की जीवंत परंपरा का प्रतीक है। इसके पश्चात दीप प्रज्ज्वलन किया गया, जिसके साथ महाविद्यालय प्रार्थना और विश्वविद्यालय कुलगीत का सामूहिक गायन हुआ। इस सांस्कृतिक आरंभ ने पूरे वातावरण को भारतीय परंपरा और गरिमा से भर दिया।
विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
समारोह में कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व उपस्थित रहे। प्रमुख आमंत्रित अतिथियों में राजदूत विनोद कुमार, अध्यक्ष, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद, श्याम परांडे, नारायण कुमार, प्रो. गोपाल अरोड़ा रहे। मेजबान कॉलेज की ओर से प्राचार्य प्रो. स्वाति पाल, उप-प्राचार्य एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. संध्या गर्ग, सी.आई.एन.पी. निदेशक प्रो. वी. राज्यलक्ष्मी, आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. कुश कुमार गयासेन, उप-आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. शिवानी बर्णवाल सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, छात्राएं और शोधार्थी उपस्थित रहे।
प्राचार्य का संबोधन: भारत एक जागृत सभ्यता
औपचारिक उद्घाटन संबोधन में प्राचार्य प्रो. स्वाति पाल ने भारत की सभ्यतागत चेतना और सांस्कृतिक निरंतरता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर को स्मरण करते हुए भारत को “विश्व की पुरातन जागृत संस्कृति” बताया। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि विचारों, मूल्यों और सह-अस्तित्व की परंपरा है, जिसने सदियों से मानवता को दिशा दी है।
स्वामी विवेकानंद और विविधता में एकता का संदेश
प्राचार्य ने अपने संबोधन में स्वामी विवेकानंद को स्मरण करते हुए कहा “भारत की विविधता ही उसकी शक्ति है और इसी विविधता में एकता की भावना राष्ट्र निर्माण का आधार है। सभी धर्मों और भाषाओं का सम्मान भारत को विश्व के लिए उदाहरण बनाता है।” उन्होंने प्रवासी युवा आगंतुकों को स्वामी विवेकानंद के प्रेरक संदेश—“उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” का मर्म समझाते हुए कहा कि यह वाक्य केवल प्रेरणा नहीं, बल्कि जीवन दर्शन है।
टैगोर का राष्ट्र-स्वप्न और आधुनिक भारत
प्राचार्य ने राष्ट्र की संकल्पना को रेखांकित करते हुए रवींद्रनाथ टैगोर के प्रसिद्ध विचारों का भी स्मरण किया—
“जहां मन भयमुक्त हो और सिर ऊंचा रहे, जहां ज्ञान स्वतंत्र हो…
हे मेरे पिता, मेरे देश को स्वतंत्रता के उस स्वर्ग में जागृत करो।” उन्होंने कहा कि यह विज़न आज भी भारत के लोकतांत्रिक और नैतिक आदर्शों का आधार है।
प्रधानमंत्री के संदेश का उल्लेख
अपने संबोधन के अंत में प्राचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2025 के अभिभाषण को उद्धृत करते हुए कहा— “भारत आज रुकने के मूड में नहीं है। हम न रुकेंगे, न धीमे होंगे। 140 करोड़ भारतीय पूरी गति से एक साथ आगे बढ़ेंगे।” उन्होंने युवाओं को संदेश दिया—“प्रश्न कीजिए, जिज्ञासा से घूमिए और दूसरों का सम्मान कीजिए। यही हमारी वास्तविक पहचान है।”
कॉलेज के संस्थापक को नमन
समारोह में महाविद्यालय के संस्थापक ब्रज कृष्ण चांदीवाला के त्याग, समर्पण और सत्यनिष्ठा को भी भावपूर्वक स्मरण किया गया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से उनकी मित्रता और समाज के वंचित वर्ग की मेधावी छात्राओं के लिए कॉलेज स्थापना के उद्देश्य को दोहराया गया।
राजदूत विनोद कुमार का प्रेरक संबोधन
मुख्य अतिथि राजदूत विनोद कुमार ने भारत के प्रशासनिक महत्व, लोकतांत्रिक मूल्यों और सांप्रदायिक सद्भाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा—
“भारत के युवा ही भारत का भविष्य हैं और भविष्य मेधावी, जागरूक और जिम्मेदार युवाओं का ही होगा।” उन्होंने प्रवासी भारतीयों से भारत के साथ भावनात्मक और बौद्धिक संबंध बनाए रखने का आह्वान किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजा मंच
इसके बाद कॉलेज की सांस्कृतिक छात्र समितियों यूफिनि, नूपुर, नृत्या और झंकार द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। नृत्य, संगीत और लोक कलाओं के माध्यम से भारत की बहुरंगी सांस्कृतिक विरासत को मंच पर जीवंत कर दिया गया।
प्रवासी आगंतुकों का कैंपस भ्रमण
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के पश्चात प्राचार्य प्रो. स्वाति पाल द्वारा प्रवासी आगंतुकों को कॉलेज परिसर का भ्रमण कराया गया। अतिथियों ने शैक्षणिक वातावरण, सुविधाओं और छात्र गतिविधियों की सराहना की।
20 देशों के प्रवासी भारतीयों की सहभागिता
इस आयोजन में विश्व के लगभग 20 देशों—दक्षिण अफ्रीका, गुयाना, मलेशिया, सूरीनाम, मॉरीशस, म्यांमार, फिजी, अमेरिका, कनाडा, पनामा, मलावी, श्रीलंका, सिंगापुर, फ्रांस, यूके, स्विट्ज़रलैंड, नीदरलैंड्स, इज़राइल सहित अन्य देशों से आए प्रवासी भारतीयों ने भाग लिया। उनके बीच प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, संवाद और परिचर्चा आयोजित की गई, जिसमें सभी ने उत्साहपूर्वक सहभागिता दर्ज कराई।
सम्मान समारोह और औपचारिक समापन
समारोह के अंतिम चरण में फिजी, गुयाना, त्रिनिडाड, सूरीनाम, दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका से आए विशिष्ट राजदूतों का सम्मान किया गया। प्रवासी आगंतुकों को सम्मान प्रतीक प्रदान किए गए और उनके विचार सुने गए। इसी के साथ “भारत को जानो” उत्सव का औपचारिक समापन हुआ, जो भारत की सांस्कृतिक चेतना और वैश्विक संवाद का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा।


