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राम मंदिर प्रबंधन को लेकर 'आप' ने साधु-संतों को जिम्मेदारी सौंपने की उठाई मांग

आम आदमी पार्टी (आप) ने अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर के प्रबंधन के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किए जाने की तैयारी का कड़ा विरोध करते हुए सरकार पर निशाना साधा

राम मंदिर प्रबंधन को लेकर आप ने साधु-संतों को जिम्मेदारी सौंपने की उठाई मांग
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नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) ने अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर के प्रबंधन के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किए जाने की तैयारी का कड़ा विरोध करते हुए सरकार पर निशाना साधा। पार्टी का कहना है कि मंदिर का संचालन नेताओं और अधिकारियों के बजाय धर्माचार्यों एवं साधु-संतों के हाथों में होना चाहिए।

पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार का यह कदम राम मंदिर से कथित तौर पर अरबों रुपये के चढ़ावे की चोरी के मामले से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश है।

'आप' के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राम मंदिर का प्रबंधन किसी नेता या सरकारी अधिकारी के बजाय धर्माचार्यों को सौंपा जाना चाहिए। उनका कहना था कि भगवान श्रीराम का मंदिर आस्था का केंद्र है और इसका संचालन ऐसे लोगों के हाथों में होना चाहिए, जिनका जीवन धार्मिक मूल्यों और सेवा भावना से जुड़ा हो।

इससे पहले, शुक्रवार को रामलला के दर्शन करने के बाद अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पूरे हिंदू समाज की यह मांग है कि मंदिर ट्रस्ट में बैठे नेताओं और अधिकारियों का मंदिर के संचालन से कोई संबंध नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़ी जैसे प्राचीन मंदिरों का संचालन वर्षों से साधु-संत करते आ रहे हैं और वहां करोड़ों रुपये का चढ़ावा आने के बावजूद कभी किसी प्रकार के वित्तीय अनियमितता का आरोप नहीं लगा। साधु-संत निर्मोही होते हैं और मंदिर की गरिमा तथा परंपराओं को बेहतर ढंग से बनाए रख सकते हैं। इसलिए श्रीराम मंदिर का संचालन भी धर्माचार्यों को सौंपा जाना चाहिए।

वहीं, आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जब मंदिर ट्रस्ट का गठन भी केंद्र सरकार ने किया और अब सीईओ की नियुक्ति भी सरकार ही करेगी, तो इससे व्यवस्था में आखिर क्या बदलाव आएगा।

उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों हिंदुओं की मांग किसी नए सीईओ की नियुक्ति नहीं, बल्कि मंदिर के प्रबंधन को साधु-संतों के हाथों में सौंपने की है।

सौरभ भारद्वाज ने सवाल उठाया कि सरकार को मंदिरों का संचालन करने की आवश्यकता क्यों है। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन में सरकार की दखलंदाजी उचित नहीं है और धार्मिक मामलों का संचालन धर्माचार्यों एवं संत समाज द्वारा ही किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है, इसलिए इसके प्रबंधन में राजनीतिक या प्रशासनिक हस्तक्षेप से बचा जाना चाहिए। आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार से मांग की है कि श्रीराम मंदिर के संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी पूरी तरह साधु-संतों और धर्माचार्यों को सौंपी जाए, ताकि मंदिर की धार्मिक परंपराओं और श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान सुनिश्चित हो सके।


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