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1984 के दंगों में शामिल नहीं थी कांग्रेस: राहुल गांधी

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में हुए जनसंहार को बेहद दुखद त्रासदी करार देते हुए कहा कि वह इस हिंसा में शामिल लोगों को सजा दिए जाने को पूर्ण समर्

1984 के दंगों में शामिल नहीं थी कांग्रेस: राहुल गांधी
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लंदन। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में हुए जनसंहार को बेहद दुखद त्रासदी करार देते हुए कहा कि वह इस हिंसा में शामिल लोगों को सजा दिए जाने को पूर्ण समर्थन देंगे।

ब्रिटेन की यात्रा पर आये राहुल गांधी शुक्रवार से हाउस आफ कामंस परिसर में “ भारत एवं विश्व” परिचर्चा कार्यक्रम में 1984 के सिख विरोधी दंगों में कांग्रेस पार्टी की ‘ संलिप्तता’ के बारे में सवाल पूछा गया था, जिसका उत्तर देते हुए उन्होंने कहा, यह घटना ‘बेहद पीड़ादायक त्रासदी’ थी और वह इस बात से सहमत नहीं है कि कांग्रेस इसमें ‘शामिल’ थी।”

राहुल गांधी ने कहा, “ मेरा मानना है कि किसी के खिलाफ की गयी कोई भी हिंसा को उचित नहीं ठहराया जा सकता। इस मामले में कानूनी प्रक्रियाएं चल रही हैं और जहां तक मेरा मानना है उस समय हुई किसी भी गलती के लिए सजा मिलनी चाहिए. मैं इसमें पूरी तरह से शत प्रतिशत समर्थन दूंगा।”

श्रीमती गांधी की हत्या के बाद हुए इन दंगों में 3000 हजार से अधिक सिख मारे गए थे और दिल्ली में स्थिति बहुत भयावह थी।

एक अन्य कार्यक्रम में दिल्ली में सिख दंगों पर पूछे गए सवाल पर श्री गांधी ने कहा, “ जब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस संबंध में कहा तो वह हम सबकी तरफ से बोले, मैं पहले भी कह चुका हूं मैं हिंसा का पीड़ित हूं और इसका दंश मैं जानता हूं।”
राहुल गांधी 1991 में उनके पिता पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की लिट्टे द्वारा की गयी हत्या का उल्लेख कर रहे थे। उन्होंने कहा, “ मैं इस धरा पर किसी के विरुद्ध किसी भी तरह की हिंसा के खिलाफ हूं., किसी को आहत होते देखने पर मैं परेशान हो जाता हूं और इसलिए मैं हिंसा की शत प्रतिशत निंदा करता हूं।”

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि जिन लोगों का हिंसा से सामना नहीं हुआ है, उन्हें तो यही महसूस होता है कि हिंसा वही है जो फिल्मों में मारधाड़ में दिखते हैं। उन्होंने कहा, “ ऐसा नहीं है, जिन्हें मैं बहुत चाहता था, मैंने उन लोगों को मरते देखा है। मेरे पिता को जिसने मारा था मैंने उस प्रभाकरण को भी मरते देखा है। श्रीलंका के जाफना में जब प्रभाकरण को मृत देखा तो उसके लिए भी मुझे पीड़ा हुई, चूंकि प्रभाकरण के स्थान पर अपने पिता को देखा और अपनी जगह उसके बच्चों को समझा।”


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