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राम मंदिर चढ़ावा विवाद की निष्पक्ष जांच हो : मनीष तिवारी

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने राम मंदिर चंदा मामले को लेकर आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले के बयान समेत कई मामलों पर प्रतिक्रिया दी

राम मंदिर चढ़ावा विवाद की निष्पक्ष जांच हो : मनीष तिवारी
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चंडीगढ़। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने राम मंदिर चंदा मामले को लेकर आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले के बयान समेत कई मामलों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राम मंदिर से जुड़े कथित गबन के मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, क्योंकि यह करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है।

उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि वहां कथित गबन हुआ है और इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। यह मामला करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है, क्योंकि यह रामलला के जन्मस्थान का विषय है, जिसकी अपनी पवित्रता है। उस पवित्रता को बनाए रखना और करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करना आवश्यक है। जो भी घटनाक्रम वहां हुआ है, उसकी उच्चतम न्यायालय की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके और लोगों का विश्वास कायम रहे।

महाराष्ट्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की दिशा में ड्राफ्टिंग कमेटी बनाए जाने की घोषणा पर मनीष तिवारी ने कहा कि संविधान यूनिफॉर्म सिविल कोड की बात करता है, कॉमन सिविल कोड की नहीं। पिछली बार जब इस विषय पर चर्चा हुई थी और केंद्र सरकार ने पहल करने का प्रयास किया था, तब स्वयं केंद्र सरकार ने कहा था कि अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जनजातियों और विभिन्न एथनिक माइनॉरिटी समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखा जाएगा।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब समाज का इतना बड़ा वर्ग, जिसमें अनुसूचित जनजातियां और वे समुदाय शामिल हैं, जिनके अपने पारंपरिक और कस्टमरी लॉ हैं, उन्हें यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाएगा, तो फिर इसे वास्तविक अर्थों में यूनिफॉर्म सिविल कोड कैसे कहा जा सकता है। यही सबसे बड़ा भ्रम है और संविधान, जिसे डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर ने निर्मित किया था, यूनिफॉर्म सिविल कोड की अवधारणा की बात करता है, न कि कॉमन सिविल कोड की।

सिंधु जल संधि पर भारत के सख्त रुख और आतंकवाद के कारण संधि पर रोक के सवाल पर मनीष तिवारी ने कहा कि इस विषय पर भारत की नीति लंबे समय से स्पष्ट रही है। साल 1994 और 2013 में संसद में इस संबंध में प्रस्ताव पारित किए गए थे। पिछले साल 7 मई से 10 मई के बीच पाकिस्तान के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद जब भारतीय प्रतिनिधिमंडल विभिन्न देशों में गया था, तब भी स्पष्ट रूप से यह संदेश दिया गया था कि पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देता है और आतंकवाद तथा बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते।

तिवारी ने कहा कि देश में इस मुद्दे पर व्यापक आम सहमति है कि 'खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।' इस राष्ट्रीय सहमति को सरकार को प्रभावी ढंग से लागू करना चाहिए और उसी के अनुरूप अपनी नीति पर आगे बढ़ानी चाहिए।


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