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कांग्रेस ने 'सिख्या क्रांति' के दावों पर पंजाब सरकार की आलोचना की

विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने रविवार को पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के ‘सिख्या क्रांति’ के बहुचर्चित दावों पर हमला बोला। बाजवा ने कहा कि सरकार के एक विधायक ने शिक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियों को सार्वजनिक रूप से उजागर किया है।

कांग्रेस ने सिख्या क्रांति के दावों पर पंजाब सरकार की आलोचना की
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चंडीगढ़। विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने रविवार को पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के ‘सिख्या क्रांति’ के बहुचर्चित दावों पर हमला बोला। बाजवा ने कहा कि सरकार के एक विधायक ने शिक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियों को सार्वजनिक रूप से उजागर किया है।

बाजवा ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के राज्य के सरकारी स्कूलों को बदलने के बार-बार किए गए दावे विधायक सुखवीर सिंह मैसरखाना द्वारा उठाए गए मुद्दों से बिल्कुल उलट हैं। सुखवीर सिंह मैसरखाना ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में शिक्षकों की कमी और सरकारी स्कूलों के कामकाज को लेकर सार्वजनिक रूप से शिकायतें की थीं।

बाजवा ने एक बयान में कहा कि भगवंत मान चाहे ‘सिख्या क्रांति’ का नारा दोहराते रहें, लेकिन पंजाब के सरकारी स्कूलों की हकीकत को छुपाना मुश्किल होता जा रहा है। जब आम आदमी पार्टी का एक मौजूदा विधायक सार्वजनिक रूप से कहता है कि उसके अपने बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं और छात्रों को प्रभावित करने वाली शिक्षकों की कमी के बारे में चिंता व्यक्त करता है, तो यह आम आदमी पार्टी के प्रचार और जमीनी हकीकत के बीच बढ़ती खाई को उजागर करता है।

मैसरखाना ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि उनके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं और उन्होंने अपर्याप्त शिक्षण स्टाफ को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और सरकार के समक्ष उठाया था, लेकिन उनका दावा है कि उनकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया।

बाजवा ने कहा कि उनके बयानों से आम आदमी पार्टी सरकार के 'सिख्या क्रांति' के दावे पर बुनियादी सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि अगर एक निर्वाचित विधायक को कक्षाओं में पर्याप्त शिक्षकों की कमी जैसे बुनियादी मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाना पड़ रहा है, तो मान सरकार जिस 'सिख्या क्रांति' का प्रचार कर रही है, वह आखिर है क्या? शिक्षा को नारों, ब्रांडिंग और प्रचार से नहीं बदला जा सकता। इसके लिए कक्षाओं में शिक्षकों का होना, सुचारू रूप से चलने वाले स्कूल और अभिभावकों व छात्रों के प्रति जवाबदेही जरूरी है।

उन्होंने मैसरखाना के खिलाफ की गई कार्रवाई पर भी सवाल उठाया। सरकार की सार्वजनिक आलोचना के बाद आम आदमी पार्टी की पंजाब इकाई ने विधायक को 'दल विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता' का हवाला देते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया।

बाजवा ने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेतृत्व ने संदेश को संबोधित करने के बजाय संदेशवाहक के खिलाफ कार्रवाई करना चुना है। शिक्षकों की कमी शासन का मुद्दा है, न कि दल विरोधी गतिविधि। अगर कोई निर्वाचित प्रतिनिधि अपने निर्वाचन क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा को लेकर चिंता व्यक्त करता है, तो सरकार को सुनना चाहिए, जांच करनी चाहिए और समस्या का समाधान करना चाहिए, न कि उसे चुप कराना चाहिए।


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