Top
Begin typing your search above and press return to search.

अमेरिका और ईरान समझौते के बीच घटीं आपूर्ति की चिंताएं

नई दिल्ली, अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में हुई वार्ता के बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को तेज गिरावट दर्ज की गई।

अमेरिका और ईरान समझौते के बीच घटीं आपूर्ति की चिंताएं
X

नई दिल्ली, अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में हुई वार्ता के बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को तेज गिरावट दर्ज की गई। सप्लाई में रुकावट की आशंकाएं कम होने और ईरान के तेल निर्यात बढ़ने की उम्मीद के चलते कच्चे तेल की कीमतें 3 प्रतिशत तक गिर गईं।

अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 2 प्रतिशत से अधिक गिरकर लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। कारोबार की शुरुआत में यह 82 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया था। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड करीब 75 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा, जो लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है।

कीमतों में यह गिरावट तब आई जब अमेरिका और ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच स्विट्जरलैंड में हुई वार्ता का पहला दौर समाप्त हुआ। इस बातचीत का उद्देश्य नाजुक युद्धविराम को आगे बढ़ाना और क्षेत्रीय तनाव को कम करना था।

हालांकि, इससे पहले भी पिछले सप्ताह तेल की कीमतों में 8 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी। बाजार को उम्मीद थी कि खाड़ी क्षेत्र में फंसी तेल खेपों की आपूर्ति फिर से शुरू हो सकती है और किसी बड़े समझौते के तहत ईरान के तेल निर्यात पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों में भी ढील दी जा सकती है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि तेहरान को तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्यात के लिए छूट मिली है। इसके अलावा, कुछ फंसी हुई संपत्तियों को जारी करने और देश के पुनर्निर्माण एवं विकास कार्यक्रम शुरू करने पर भी सहमति बनी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चितताओं के बावजूद ब्रेंट क्रूड का 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बने रहना इस बात का संकेत है कि बाजार किसी बड़े संघर्ष की संभावना को फिलहाल कीमतों में शामिल नहीं कर रहा है।

हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि क्षेत्र की भू-राजनीतिक स्थिति अभी भी बदल सकती है और उस पर लगातार नजर बनाए रखने की जरूरत है।

विशेषज्ञों के अनुसार, "वैश्विक निवेशकों का रुख अभी भी सतर्क बना हुआ है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शेयर बाजार मिले-जुले और कमजोर संकेतों के साथ खुले, क्योंकि खबरें आईं कि नए भू-राजनीतिक तनाव के बाद ईरान ने स्विट्जरलैंड में चल रही वार्ता से खुद को अलग कर लिया है।"

कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का सकारात्मक असर शेयर बाजारों पर भी देखने को मिला। सोमवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख बेंचमार्क बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए।

इसके अलावा, तेल की कीमतों में आई यह गिरावट बड़े तेल आयातक देशों के लिए राहत लेकर आ सकती है, जिससे आयात लागत कम होगी, महंगाई पर दबाव घटेगा और चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it